घर खरीदने की योजना बना रहे हैं तो इन 6 जरूरी अनुपातों के बारे में जान लें

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कोरोना महामारी के चलते पैदा हुई चुनौतियों के बीच जहां ज्यादातर सेक्टरों की ग्रोथ महीनों तक ठप रही, वहीं रियल स्टेट एस्टेट सेक्टर ने अच्छा प्रदर्शन किया है. ब्याज दरें रिकॉर्ड निचले स्तर पर आना, कई बड़े शहरों में स्टाम्प ड्यूटी घटाए जाने और घर से ही दफ्तर के काम निपटाने की नई जरूरत ने देश में मकानों की मांग बढ़ाई है.

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नई दिल्ली. कोरोना महामारी के चलते पैदा हुई चुनौतियों के बीच जहां ज्यादातर सेक्टरों की ग्रोथ महीनों तक ठप रही, वहीं रियल स्टेट एस्टेट सेक्टर ने अच्छा प्रदर्शन किया है. ब्याज दरें रिकॉर्ड निचले स्तर पर आना, कई बड़े शहरों में स्टाम्प ड्यूटी घटाए जाने और घर से ही दफ्तर के काम निपटाने की नई जरूरत ने देश में मकानों की मांग बढ़ाई है. जिनके पास पहले से अपना घर है, वर्क फ्रॉम होम कल्चर के चलते उन्हें बड़े मकान की जरूरत महसूस हो रही है. रेडी-टू-मूव-इन प्रोजेक्ट्स की ऑन- डिमांड उपलब्धता लोगों का उत्साह बढ़ा रहा है. लेकिन मकान खरीदते खरीदते समय अक्सर हम कई महत्वपूर्ण चीजों पर गौर नहीं करते. लोन-टू- वैल्यू रेश्यो और ऋण-आय अनुपात इनमें शामिल है.

ऐसे 6 अनुपातों पर गौर करने से पता चलेगा कि आप कितनी राशि का होम लोन उठा सकते हैं और उस प्रॉपर्टी से कितनी कमाई की संभावना है.

1- लोन-टू-वैल्यू रेश्यो

आप बैंक से कितना होम लोन उठा सकते हैं? यह तय करने के लिए बैंक और एचएफसी जो मानदंड अपनाती हैं, लोन-टू-वैल्यू रेश्यो (एलटीवी) उनमें से एक है. यह प्रॉपर्टी की वैल्यू या असल कीमत और लोन का अनुपात होता है.
होम लेने के अधिकतम एलटीवी

लोन की राशि                                         एलटीवी

30 लाख रुपए तक                                  90 %



30-75 लाख रुपए                                   80 %

75 लाख रुपए से ऊपर                            75 %

2- डेट-टू- इनकम रेश्यो

डेट-टू-इनकम (डीटीआई) रेश्यो की गणना आय. ईएमआई और क्रेडिट कार्ड के बिलों के आधार पर की जाती है. यदि आप कार लोन के लिए 8000, पीएल के लिए 12,000 और क्रेडिट कार्ड के बिल के लिए 5,000 रुपए महीना भुगतान करते हैं, तो आपका कुल मासिक लोन पेमेंट 25,000 रुपए है. यदि आपकी मासिक आय 1 लाख रुपए है को आपका डीटीआई 25 फीसदी है.

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3- परिवार की कुल संपत्ति -

लोन देने के लिए बैंक सह-आवेदक और परिवार के सदस्यों की आय पर गौर करते हैं. इसके लिए बिजनेस से आपकी आय या वेतन के अलावा सह-आवेदकों की आय, उनकी संपत्ति और पूरे परिवार की कुल संपत्ति की वैल्यू आंकी जाती है.

4- किराए से आय

यदि निवेश के लिए प्रॉपर्टी खरीद रहे हैं और आपकी नजर किराए आय पर है तो यह एक महत्वपूर्ण मैट्रिक्स है. आप अलग-अलग प्रॉपर्टी से बतौर किराया होने वाली आय की तुलना कर सकते हैं और अधिक अनुकूल निवेश पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं. किराए से आय की वैल्यू पता करने के लिए किराए से होने वाली सालाना आय को प्रॉपर्टी की कीमत से विभाजित करें.

5- कैपिटलाइजेशन रेट -

कैपिलाइजेशन रेट पता करने के लिए पहले सभी परिटालन खर्चों को वार्षिक किराए में से घटाए और फिर इससे प्रॉपर्टी के मूल्य को विभाजित करें. खर्च में मरम्मत की लागत, टैक्स, एजेंट शुल्क आदि शामिल हो सकते हैं. इससे निवेश पर रिटर्न का अंदाजा लगा सकते हैं.

6- ग्रॉस-नेट इनकम मल्टी -

बैंक आवेदक की घोषित आय को ग्रॉस-नेट इनकम मल्टीप्लायर की कसौटी पर कसता है, ताकि इस बात का अंदाजा लगाया जा सके कि उसे अधिकतम कितनी राशि का लोन दिया जा सकता है.

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