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वित्त वर्ष 2022 में बदली है नौकरी तो ITR भरते समय रखना होगा कुछ जरूरी बातों का ध्यान

इंडिविजुअल टैक्‍सपेयर्स को 31 जुलाई तक आईटीआर दाखिल करनी है.

इंडिविजुअल टैक्‍सपेयर्स को 31 जुलाई तक आईटीआर दाखिल करनी है.

अगर आपने पिछले वित्त वर्ष के दौरान जॉब बदली है तो आपके लिए यह जान लेना जरूरी है कि आपको कैसे ITR फाइल करना है. जॉब बदलने के कारण आपको आईटीआर भरते वक्‍त दोनों कंपनियों द्वारा जारी फॉर्म 16 की जरूरत होगी.

    नई दिल्‍ली. वित्त वर्ष 2021-22 के लिए इनकम टैक्‍स रिटर्न फाइल करने के लिए आयकर विभाग ने ई-फाइलिंग पोर्टल शुरू कर दिया है. इंडिविजुअल टैक्‍सपेयर्स को 31 जुलाई तक आईटीआर दाखिल करनी है. ई-फाइलिंग पोर्टल पर आईटीआर भरने के लिए आपके पास पैन कार्ड, आधार कार्ड, फॉर्म 16, बैंक अकाउंट डिटेल, प्रमाणों के साथ निवेश डिटेल और अन्‍य इनकम प्रूफ होने चाहिए. यही नहीं, आईटीआर फाइल करने के लिए पैन और आधार का लिंक होना भी जरूरी है और आपकी ई-मेल आईडी भी इनकम टैक्‍स डिपार्टमेंट के पास रजिस्‍टर्ड होनी चाहिए.

    अगर आपने पिछले वित्त वर्ष के दौरान जॉब बदली है तो आपके लिए यह जान लेना जरूरी है कि आपको कैसे ITR फाइल करना है. जॉब बदलने के कारण आपको आईटीआर भरते वक्‍त दोनों कंपनियों द्वारा जारी फॉर्म 16 की जरूरत होगी. हर साल 15 जून तक कंपनियों के लिए फॉर्म 16 जारी कर देना आवश्‍यक है. फॉर्म 16 में कंपनी से मिले वेतन का विवरण होता है. इसमें इस बात की भी जानकारी दी जाती है कि कंपनी ने वित्त वर्ष के दौरान कितना TDS काटा है.

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    दोनों कंपनियों से लेना होगा फॉर्म 16

    मनीकंट्रोल डॉट कॉम की एक रिपोर्ट के अनुसार, अगर आपने पिछले वित्त वर्ष में जॉब चेंज की है तो आपको आईटीआर भरने के लिए पहले तो नई और पुरानी, दोनों कंपनियों से फॉर्म 16 लेना होगा. अभी आप जिस कंपनी में जॉब कर रहे हैं वह तो आपके पास स्‍वयं ही यह फॉर्म भेज देगी. लेकिन, पुरानी कंपनी से आपको फॉर्म 16 के लिए रिक्‍वेस्‍ट करनी होगी. नई और पुरानी कंपनी का फॉर्म 16 मिल जाने पर आप उसे एक बार ध्‍यान से चेक लें.

    ग्रॉस सैलरी को जोड़ें

    फॉर्म-16 के पार्ट बी में ग्रॉस सैलरी का कॉलम होता है. आपकी तरफ से डिडक्शन का किया गया दावा और टैक्स के दायरे में नहीं आने वाले अलाउन्सेज भी इसमें शामिल होंगे. आपको दोनों कंपनियों से मिली कुल ग्रॉस सैलरी को जोड़ना होगा. साथ ही दोनों फॉर्म 16 से एचआरए, (HRA), एलटीए (LTA) की राशि भी जोड़नी होगी. इसे जोड़ने पर आपको वह राशि मिल जाएगी, जिस पर टैक्‍स छूट लिए आपको दावा करना है.

    स्‍टैंडर्ड डिडक्‍शन करना है क्‍लेम

    नौकरी करने वाले लोगों को एक वित्त वर्ष में 50,000 स्टैंडर्ड डिडक्शन की इजाजत होती है. यह हो सकता है कि आपके दोनों फॉर्म 16 में 50-50 हजार रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन दिया गया हो. पर आपको सिर्फ एक बार 50,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन का ही दावा करना होगा. अब आपको 80 सी, 80 डी आदि के तहत मिलने वाले डिडक्शन का भी दावा करना होगा. आपको वेतन से हुई आय, बैंक अकाउंट पर मिले ब्‍याज, शेयरों से मिला डिविडेंड आदि पर टैक्‍स चुकाना होगा. यह भी ध्‍यान रखें कि अगर आपने पुराने टैक्‍स सिस्टम को अपनाया है, तभी आप इन डिडक्‍शन का दावा कर सकते हैं.

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    ऐसे करें टैक्‍स लायबिलिटी की गणना

    टैक्‍स योग्‍य कुल आय की गणना करने के बाद आपको टैक्‍स देयता को कैलकुलेट करना होगा. उन सभी टैक्स को डिडक्ट कर दीजिए, जो पहले ही डिडक्ट करने के बाद आपके पैन के साथ डिपॉजिट कर दिए गए हैं. TDS अमाउंट आपको फॉर्म 16 के पार्ट-ए में मिल जाएगा. अगर किसी करदाता को कंपनी से फॉर्म 16 नहीं मिला है तो भी वह इनकम टैक्स रिटर्न फाइल कर सकता है. इसके लिए उसे अपनी सैलरी स्लिप की जरूरत पड़ेगी.

    Tags: Income tax, ITR, ITR filing

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