बीमा का पैसा लेना भूले तो होगा ये ‘बड़ा’ नुकसान

News18Hindi
Updated: August 13, 2017, 5:04 PM IST
बीमा का पैसा लेना भूले तो होगा ये ‘बड़ा’ नुकसान
अगर पॉलिसीधारक भुगतान की तारीख से 10 सालों तक अपना पैसा क्लेम नहीं करते हैं तो इंश्योरेंस कंपनियों का यह अनक्लेम्ड पैसा सरकार के सीनियर सिटीजन वेलेफेयर फंड में ट्रांसफर हो जाएगा.
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Updated: August 13, 2017, 5:04 PM IST
अगर आपने सालों पहले कोई बीमा पॉलिसी खरीदी थी, जो कि मैच्योर (जिसकी अवधि पूरी हो चुकी है) हो चुकी है. लेकिन, आपको बीमा का पैसा लेना याद नहीं रहा है तो जल्दी से पॉलिसी के पेपर्स निकालकर बीमा कंपनी से संपर्क करिए और अपना क्लेम ले लीजिए. अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो एक तय समय अवधि गुजरने के बाद आपको बड़ा नुकसान हो सकता है.

10 साल बाद सीनियर सिटीजन वेलेफेयर फंड में ट्रांसफर हो जाएगा पैसा
बीमा नियामक इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डिवेलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) ने 25 जुलाई को एक सर्कुलर जारी किया है, जिसके मुताबिक अगर पॉलिसीधारक भुगतान की तारीख से 10 सालों तक अपना पैसा क्लेम नहीं करते हैं तो इंश्योरेंस कंपनियों का यह अनक्लेम्ड पैसा (जिस पर कोई दावा न किया गया हो)  सरकार के सीनियर सिटीजन वेलेफेयर फंड में ट्रांसफर हो जाएगा.

25 साल बाद सरकार जब्त कर लेती है पैसा

पैसा सीनियर सिटीजन वेलेफेयर फंड में जाने के बाद भी पॉलिसीधारक 25 सालों तक इस पैसे पर दावा कर सकते हैं. लेकिन अगर वह 25 साल बाद भी पैसे के लिए दावा नहीं करते हैं तो सरकार इस पैसे को जब्त कर लेगी. फाइनेंशियल एक्सपर्ट अखिल महाजन ने बताया, ‘भुगतान की तारीख से अगले 10 सालों तक बीमा का पैसा इंश्योरेंस कंपनियों के पास रहता है. इस अवधि के बाद अब इसे सीनियर सिटीजन वेलेफेयर फंड में ट्रांसफर किया जाना है. इस फंड में पैसा जाने के बाद भी पॉलिसीधारक 25 साल तक इसके लिए क्लेम कर सकते हैं. हालांकि, 25 साल बाद पैसा सरकार का हो जाता है और वह इसे जब्त कर लेती है.’

बीमा फर्मों के पास 11,668 करोड़ रुपये का अनक्लेम अमाउंट
मौजूदा समय में प्राइवेट इंश्योरेंस कंपनियों और सरकारी बीमा कंपनी LIC के पास 11,668 करोड़ रुपये का अनक्लेम्ड अकाउंट है, जिस पर अभी तक किसी न दावा नहीं किया है. वहीं, बंद हो चुके EPFO अकाउंट्स में भी 43,000 करोड़ रुपये का अनक्लेम्ड अकाउंट है.

अनक्लेम्ड पैसे का ऐसे लगाएं पता
आप पॉलिसी खरीदकर उसका क्लेम लेना भूल तो नहीं गए हैं, यह जानना बेहद आसान है. आप इंश्योरेंस कंपनियों की वेबसाइट में जाकर ‘अनक्लेम्ड मनी ऑफ पॉलिसीहोल्डर’ के तहत इसे ट्रैक कर सकते हैं. इसमें आपको पॉलिसीधारक का नाम, पॉलिसी नंबर, पैन, जन्म की तारीख जैसे डिटेल्स डालने होंगे.
First published: August 13, 2017
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