• Home
  • »
  • News
  • »
  • business
  • »
  • IF YOU WANT TO BUY 24 CARAT GOLD THEN INVEST IN THIS GOLD BOND DEMAND IS INCREASING KULD

24 कैरेट सोना खरीदना चाहते हैं तो गोल्ड बॉन्ड में करें निवेश, बढ़ रही है मांग

गोल्ड का पेपर रूप यानी सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड (SGB) और एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों (ईटीएफ) की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है.

पिछले पांच वर्षों में इस साल न सिर्फ सर्वाधिक गोल्ड बॉन्ड्स (Gold Bond) की बिक्री हुई, बल्कि पिछले पांच साल में दर्ज कुल बिक्री से भी ज्यादा है.

  • Share this:
    नई दिल्ली. सोने (Gold) में निवेश हमेशा से निवेश का सुरक्षित तरीका माना गया है. बीते साल सोने की रिटर्न की वजह से इसकी चमक और बढ़ गई है. लेकिन इसे मिलावट और गहनों के मेकिंग चार्ज की वजह से अब इसके पेपर रूप यानी सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड (Sovereign Gold Bond, SGB) और एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों (ईटीएफ, ETF) की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है.
    वित्त वर्ष, 2021 में आरबीआई ने 32.4 टन एसजीबी की बिक्री के जरिए 16,049 करोड़ रुपरये की पूंजी जुटाई. एसजीबी का अगला निर्गम अगले वित्त वर्ष लाए जाने की संभावना है. ईटीएफ के जरिये स्वर्ण बिक्री के अनुमानों पर विचार किया जाए तो संकेत मिलता है कि पेपर गोल्ड में कुल निवेश वित्त वर्ष में 46 टन से ऊपर पहुंच गया है. वित्त वर्ष में अप्रैल से दिसंबर के आंकड़ों के मुताबिक देश में पारंपरिक स्वर्ण मांग करीब 135 टन रही है. जबकि इसी दरमियान एक-चौथाई एसजीबी से जुड़ी रही है. पेपर गोल्ड के पुराने स्वरूप गोल्ड ईटीएफ में भी वित्त वर्ष 2021 में फरवरी तक 6,062 करोड़ रुपए का शुद्घ प्रवाह दर्ज किया गया. बिजनेस स्टैंडर्ड में प्रकाशित खबर के मुताबिक वित्त वर्ष 2021 स्वर्ण ईटीएफ में निवेश वृद्घि दर्ज करने वाला लगातार दूसरा वर्ष है. बाजार विश्लेषकों का अनुमान है कि चालू वर्ष का समापन ईटीएफ में 14 टन के प्रवाह के साथ हो सकता है.
    यह भी पढें :  Health Insurance: आरोग्य संजीवनी पॉलिसी में ज्यादा मिलेगा बीमा कवर, जानें नए बदलाव से मिलने वाले फायदे

    गोल्ड बॉन्ड अब निवेश का मुख्य हिस्सा
    मेटल फोकस मेंप्रिंसीपल कंसल्टेंट (भारत और दक्षिण एशिया) चिराग शेठ का कहना है कि एसजीबी अब मुख्य स्वर्ण निवेश का हिस्सा है. महामारी ने निश्चित तौर पर सोने को चर्चा में ला दिया है और लॉकडाउन की वजह से कई लोग ऑनलाइन स्वर्ण निवेश के लिए बाध्य हुए. इसलिए आगे भी एसजीबी के लिए मांग मजबूत बनी रहेगी. वहीं, विश्व स्वर्ण परिषद द्वारा जारी आंकड़े के अनुसार, ईटीएफ निवेश पारंपरिक स्वर्ण मांग का हिस्सा है. हालांकि निवेशक ईटीएफ में निवेश करते वक्त प्रतिभूतियों को खरीदते हैं और इसलिए ईटीएफ भी पेपर गोल्ड का एक स्वरूप है.
    यह भी पढें :  टैक्स बचत के लिए 31 मार्च तक बीमा पॉलिसी लेनी है तो यह बात जरूर जान लें, मिलेगा बड़ा फायदा 

    अगस्त में हुई सर्वाधिक खरीदारी
    अगस्त में गोल्ड बॉन्डों में सर्वाधिक खरीदारी 6.35 टन दर्ज की गई थी. जबकि वित्त वर्ष में एसजीबी के लिए खरीदारी 32.4 टन पर रही. यह इन योजनाओं की पेशकश (नवंबर 2015) के बाद से पिछले पांच वर्षों में न सिर्फ सर्वाधिक थी, बल्कि पिछले पांच साल में दर्ज संयुक्त बिक्री से भी ज्यादा थी. वित्त वर्ष 2016 और वित्त वर्ष 2020 के बीच 30.9 के स्वर्ण बॉन्डों की बिक्री हुई थी.
    यह भी पढें :  50 हजार रुपए का तत्काल लोन मिलेगा, बस यह प्रक्रिया करनी होगी
    इसलिए गोल्ड बॉन्ड निवेशकों को लुभा रहे
    कई विश्लेषकों का मानना है कि मार्च में एसजीबी के लिए बेहतर दिलचस्पी सोने की कीमतों में आई कमजोरी की वजह से भी देखी गई थी. उतार-चढ़ाव वाले शेयर बाजार की वजह से भी सोने की मांग को मजबूती मिली. कम कीमतों ने निवेशकों को स्वर्ण बॉन्डों की ओर आकर्षित किया. जबकि आभूषण और स्वर्ण बिस्कुट एवं सिक्कों के लिए संयुक्त घरेलू मांग वित्त वर्ष 2020 में पूर्ववर्ती वर्ष के 768 टन से घटकर 633 टन रह गई. वित्त वर्ष 2021 के पहले 9 महीनों में यह आंकड़ा 344 टन पर था.