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सार्स की तुलना कोरोना वायरस का ग्लोबल इकोनॉमी पर पड़ेगा व्यापक असर- IHS मार्किट

भाषा
Updated: February 7, 2020, 8:22 PM IST
सार्स की तुलना कोरोना वायरस का ग्लोबल इकोनॉमी पर पड़ेगा व्यापक असर- IHS मार्किट
वैश्विक स्तर पर पड़ेगा व्यापक प्रभाव

आईएचएस ने कोरोना वायरस (Coronavirus) पर अपनी रिपोर्ट में कहा, कोरोना वायरस का 2003 में फैले सार्स (SARS) के मुकाबले व्यापक नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. इसके कारण चीनी अर्थव्यवस्था में नरमी (Slowdown in Chinese Economy) का अन्य देशों पर व्यापक असर पड़ेगा

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नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Coronavirus) का वैश्विक अर्थव्यवस्था (Global Economy) पर बड़ा प्रभाव पड़ने की आशंका है. यह प्रभाव 2003 में फैले सार्स (SARS) (सेवियर एक्यूट रेसपिरेटरी सिन्ड्रोम) के मुकाबले अधिक है. इसके कारण चीनी अर्थव्यवस्था में नरमी (Slowdown in Chinese Economy) का अन्य देशों पर व्यापक असर पड़ेगा. सूचना और विश्लेषण उपलब्ध कराने वाली कंपनी आईएचएस मार्किट ने यह कहा. कोरोना वायरस से दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के बड़े हिस्से पर प्रभाव पड़ा है और सभी उद्योगों पर इसका असर दिख रहा है.

वैश्विक स्तर पर पड़ेगा व्यापक प्रभाव
आईएचएस ने कोरोना वायरस पर अपनी रिपोर्ट में कहा, कोरोना वायरस का 2003 में फैले सार्स के मुकाबले व्यापक नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. SARS के समय चीन छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश था और वैश्विक जीडीपी में उसका योगदान केवल 4.2 प्रतिशत था. चीन अब दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और वैश्विक जीडीपी में उसका योगदान 16.3 प्रतिशत है. इसीलिए चीनी अर्थव्यवस्था में किसी भी प्रकार की नरमी का केवल झटका नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा. ये भी पढ़ें: इधर कैश में लेन-देन किया उधर मैसेज पर आ जाएगा इनकम टैक्स का नोटिस, अब होगी रियल टाइम मॉनिटरिंग



ग्लोबल जीडीपी में आएगी गिरावट
इसमें कहा गया है कि कोरोना वायरस को काबू में करने के लिये अगर मौजूदा और अप्रत्याशित उपाय फरवरी तक रहता है और मार्च की शुरुआत से हटा लिया जाता है तब इसका आर्थिक प्रभाव 2020 की पहली छमाही तक सीमित होगा. इसके कारण वैश्विक जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में पहली तिमाही में 0.8 प्रतिशत और दूसरी तिमाही में 0.5 प्रतिशत की कमी आएगी. ऐसी स्थिति में कोरोना वायरस और उसके निपटने के उपायों से वास्तविक तौर पर वैश्विक जीडीपी वृद्धि में 2020 में 0.4 प्रतिशत की कमी आएगी.

वहीं दूसरी तरफ निपटने के उपायों को 10 फरवरी तक हटा लिया जाता है, तब वैश्विक जीडीपी पर प्रभाव सीमित होगा और इस साल वैश्विक जीडीपी वृद्धि में 0.1 प्रतिशत की कमी आएगी. वहीं चीन की सालाना वृद्धि में 0.4 प्रतिशत की कमी आएगी. ये भी पढ़ें: RBI का नया ऐलान! अब आपको बदलवानी होगी चेक बुक, ये है आखिरी तारीख

चीन की अर्थव्यवस्था 2003 के मुकाबले ज्यादा नाजुक
आईएचएस मार्किट के अनुसार, कोरोना वायरस का प्रभाव घरेलू खपत पर स्पष्ट है जबकि औद्योगिक क्षेत्र पर अपेक्षाकृत कम रहेगा. इसका कारण इस समय आम तौर पर उद्योग बंद रहते हैं. इसके बावजूद चीन की अर्थव्यवस्था 2003 के मुकाबले ज्यादा नाजुक स्थिति में है. उत्पादकता और कुल मिलाकर आर्थिक वृद्धि में नरमी अभी से देखी जा रही है. इसके अलावा अमेरिका-चीन व्यापार विवाद का भी प्रभाव दिख रहा है.

रिपोर्ट के अनुसार, चीन में आर्थिक सुस्ती का वैश्विक वृद्धि पर उल्लेखनीय असर होगा. वर्ष 2002 में चीन में वैश्विक जीडीपी वृद्धि में 23 प्रतिशत का योगदान दिया था जबकि 2019 में यह बढ़कर 38 प्रतिशत पर आ गया. चीन के जिन 11 प्रांतों ने कोरोना वायरस के कारण छुट्टी बढ़ायी है, उनका चीन में कुल वाहन उत्पादन में दो तिहाई से अधिक हिस्सेदारी है.

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First published: February 7, 2020, 8:22 PM IST
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