IIT मंडी ने तैयार किया सेल्फ क्लीनिंग फेस मास्क, सिर्फ राेकेगा ही नहीं वायरस काे खत्म भी कर देगा

लीड रिसर्चर अमित जायसवाल (second from right) अपनी अन्य साथियाें के साथ

लीड रिसर्चर अमित जायसवाल (second from right) अपनी अन्य साथियाें के साथ

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नाेलॉजी मंडी (IIT Mandi) के रिरचर्स ने नाेवल वायरस फिल्टरिंग और सेल्फ क्लीनिंग एंटीबैक्टिरियल मटेरियल का इस्तेमाल करते हुए फेस मास्क तैयार किया है. यह नए मास्क माइक्राे बैक्टेरिया काे ताे खत्म करने में सक्षम हाेगे ही साथ साेलर लाइट से क्लीन भी हाेंगे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 19, 2021, 7:01 PM IST
  • Share this:

नई दिल्ली. पिछले साल काेविड 19 (Covid 19) के चलते इससे बचाव के लिए दुनियाभर में मास्क(Mask) लगाना लाेगाें काे अनिवार्य कर दिया गया. मार्केट में मास्क की डिमांड बढ़ी और एक बार इस्तेमाल करने वाले मास्क से बाजार पट गया. इसमें दिक्कत यह हुई कि इससे काेविड वेस्ट (Covid west )बढ़ता जा रहा है. क्याेंकि एक बार इस्तेमाल कर इन मास्क काे सिवाय फैकने के काेई दूसरा विकल्प नहीं है जिससे काेविड वेस्ट बढ़ता ही जा रहा है. इसी काे ध्यान में रखते हुए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नाेलॉजी मंडी (IIT Mandi) के रिरचर्स ने नाेवल वायरस फिल्टरिंग और सेल्फ क्लीनिंग एंटीबैक्टिरियल मटेरियल का इस्तेमाल करते हुए फेस मास्क तैयार किया है.  यह नए मास्क माइक्राे बैक्टेरिया काे ताे खत्म करने में सक्षम हाेगे ही साथ साेलर लाइट से क्लीन भी हाेंगे, यानि की धूप में खुद ब खुद साफ भी हाे जाएंगे जिससे इसका दाेबारा प्रयाेग किया जा सके.



एक अध्ययन के मुताबिक जिसे एक जर्नल में प्रकाशित किया है के अनुसार यह मास्क काेविड वायरस के साइज यानि 120 नैनाेमीटर लगभग के करीब 96 फीसदी कणाें काे फिल्टर करेंगे. वाे भी बिना सांस लेने में दिक्कत अनुभव किए हुए. यही नहीं यह काेराेना वायरस के साथ ही दूसरे माइक्राेबैक्टिया काे भी फैलने से राेकने में सक्षम हाेंगे. 



चार लेयर का हाेगा यह मास्क



रिसरर्च ने एक ऐसा प्राेटाेटाइप चार लेयर वाला फेस मास्क बनाया है जिसे माेलिब्डेनम सल्फाइड (MoS2) मॉडीफाइड फैब्रिक से तैयार किया गया है. टीम ने उस मटेरियल का इस्तेमाल किया है जाे इंसान के बाल की चाैड़ाई के मुकाबले भी एक हजार गुना छाेटा रहता है. यह इस तरह से काम करेंगे मसलन काे छाेटा चाकू हाे और जाे भी बैक्टिरिया या वायरस फेस मास्क में लगी इस लेयर काे छेदने की काेशिश करेंगे वाे वहीं मर जाएंगे.


ये भी पढ़ें -  नहीं है UAN नंबर, ताे न हो परेशान, ऐसे भी निकाल सकते हैं अपने PF अकाउंट से पैसा



60 बार धाेने के बाद भी उतना ही इफेक्टफुल 



लीड रिसर्चर अमित जायसवाल जाे कि वर्सिटी स्कूल ऑफ बेसिक साइंसेस में असिस्टेंट प्राेफेसर भी है कहते हैं कि महामारी की स्थिति और जल्द से जल्द इसे लाने की काेशिश वाे भी लागत काे ध्यान में रखते हुए हमें एक रणनीति तैयार की है जिसमें माैजूदा पीपीई किट काे दाेबारा इस्तेमाल करे खासताैर से फेस मास्क के लिए. जिसमें एंटी माइक्राे बैक्टिरिया काेटिंग हाेगी जिसका इस्तेमाल किया जाएगा. इसे 60 बार भी धाे लिया जाए तब भी यह उतना ही इफेक्टफुल हाेगा.  इसके साथ ही यह बेहतर तरीका हाेगा मास्क काे दाेबारा इस्तेमाल करने का जिससे  बायाे वेस्ट कम से कम हाे. इसे घर में तैयार किए जाने वाले मास्क में भी इस्तेमाल किया जा सकेगा. अध्ययन में शाेधकर्ताओं ने कहा कि सिर्फ पांच मिनट के अंदर ही साैर विकिरण से यह इसे रियूजेबल बना देगा.


अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज