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IL&FS पर सरकार का कब्जा, 6 सदस्यीय बोर्ड मेंबर के अध्यक्ष बने उदय कोटक

News18Hindi
Updated: October 1, 2018, 10:53 PM IST
IL&FS पर सरकार का कब्जा, 6 सदस्यीय बोर्ड मेंबर के अध्यक्ष बने उदय कोटक
कोटक महिंद्रा बैंक के हेड उदय कोटक

IL&FS कैश की परेशानी से जूझ रही है. पिछले कुछ महीनों से कंपनी ने तय समय पर अपनी किश्तों का पेमेंट नहीं किया है.

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  • Last Updated: October 1, 2018, 10:53 PM IST
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भारी लोन संकट से जूझ रही कंपनी इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज (IL&FS) के मैनेजमेंट पर अब सरकार का कब्जा हो गया है. सरकार ने कंपनी का मैनेजमेंट संभालने के लिए 6 सदस्यीय नए बोर्ड के गठन किया है. कोटक महिंद्रा बैंक के हेड उदय कोटक इस नए बोर्ड के अध्यक्ष बनाए गए हैं.

बोर्ड में उदय कोटक के अलावा पूर्व IAS ऑफिसर विनीत नैय्यर, पूर्व सेबी प्रमुख जीएन बाजपेयी, ICICI बैंक के पूर्व चेयरमैन जीसी चतुर्वेदी और पूर्व IAS ऑफिसर मालिनी शंकर और नंद किशोर होंगे. यह बोर्ड कंपनी को रिवाइव करने की दिशा में सरकार को सुझाव देगा.

बता दें कि IL&FS कैश की परेशानी से जूझ रही है. पिछले कुछ महीनों से कंपनी ने तय समय पर अपनी किश्तों का पेमेंट नहीं किया है. सिर्फ IL&FS पर 16,500 करोड़ रुपए का कर्ज है. उसकी सभी कंपनियों को मिलाकर कुल 91 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है. बैंक और इंश्योरेंस कंपनियों का इसमें बड़ा हिस्सा है. सरकार का कार्पोरेट अफेयर्स मंत्रालय ने IL&FS के खिलाफ NCLT में अर्जी दी थी. इस मामले की अगली सुनवाई 31 अक्टूबर को होगी.

भारत में ऐसा बहुत कम होता है कि सरकार अपने कंट्रोल में किसी कंपनी को लेती है. पिछली बार ऐसा 2009 में हुआ था जब फ्रॉड के बाद सत्यम को सरकार ने अपने कंट्रोल में लिया था. MCA ने उदय कोटक को कंपनी का नया चेयरमैन बनाने का प्रस्ताव दिया था. इसके अलावा 10 सदस्यों के नए बोर्ड के गठन का भी प्रस्ताव दिया गया है. IL&FS सरकार की अर्जी का समर्थन करेगी.


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क्या है IL & FS?
आईएल एंड एफएस एक पब्लिक सेक्टर कंपनी है जिसकी 40 सहायक कंपनियां हैं. यह एक नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी है जो बैंकों से लोन लेती है. इस कंपनी में दूसरी कंपनियां निवेश करती हैं और आम जनता इसके शेयर खरीदती है. इस कंपनी को कई रेटिंग एजेंसियों ने अति सुरक्षित रैंक दी हुई है. हाल ही में इस कंपनी ने 250 करोड़ रुपये के इंटरेस्ट पेमेंट का डिफॉल्ट कर दिया. यानी कंपनी अपनी कर्ज की किश्त नहीं चुका पाई.
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कंपनी के सबसे बड़े शेयरहोल्डर एलआईसी के चेयरमैन का कहना है कि कंपनी के बेल-आउट की हर कोशिश की जाएगी. एलआईसी चेयरमैन ने कहा है कि आईएलएंडएफएस को बचाने के लिए हर संभव कोशिश करेंगे हालांकि कंपनी में हिस्सा बढ़ाने पर अभी फैसला नहीं होगा. बता दें कि आईएलएंडएफएस में एलआईसी की 25.34 फीसदी हिस्सेदारी है. इधर आईएलएंडएफएस ने कहा है कि ज्यादातर शेयरधारक 4,500 करोड़ रुपये के राइट्स इश्यू में निवेश के लिए तैयार हैं.

सूत्रों के मुताबिक आईएलएंडएफएस में बड़ा निवेश रखनी वाले एचडीएफसी ने कंपनी के राइट्स इश्यू में हिस्सा नहीं लेने की बात कही है. साथ ही एचडीएफसी ने साफ किया है कि कंपनी ने आईएलएंडएफएस के बोर्ड में जगह की मांग नहीं की. हालांकि एचडीएफसी का मानना है कि आईएलएंडएफएस के पास अच्छे एसेट्स मौजूद हैं. आपको बता दें कि आईएलएंडएफएस में एचडीएफसी की 9.02 फीसदी हिस्सेदारी है.

जानकारी के मुताबिक आईएलएंडएफएस की 17 हजार करोड़ रुपये के रीपेमेंट के लिए 25 एसेट्स बेचने की योजना है. कंपनी इस महीने में अब तक 3 कमर्शियल पेपर पर डिफॉल्ट कर चुकी है. ग्रुप का कहना है कि निवेशकों ने 25 में से 14 एसेट्स में निवेश की इच्छा जताई है. कंपनी का कहना है कि 25 एसेट्स बेचने से 35 हजार करोड़ रुपये का कर्ज घटेगा.

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First published: October 1, 2018, 12:17 PM IST
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