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किसान कर्जमाफी से नहीं होगा फायदा, कैश सब्सिडी बेहतरः IMF की चीफ इकोनॉमिस्ट गीता गोपीनाथ

इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (IMF) की चीफ इकोनॉमिस्ट गीता गोपीनाथ (फाइल फोटो)

इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (IMF) की चीफ इकोनॉमिस्ट गीता गोपीनाथ (फाइल फोटो)

दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मौके पर सीएनबीसी-टीवी18 से बातचीत में गीता गोपीनाथ ने बताया, 'मेरा मामना है कि कृषि क्षेत्र पर भारी संकट है और कृषि ऋण माफी स्थाई समाधान नहीं है.' उन्होंने कहा कि कैश सब्सिडी ऋण माफी के मुकाबले बेहतर होगा.

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    भारतीय मूल की मशहूर अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (IMF) की चीफ इकोनॉमिस्ट का पद संभालने के बाद वैश्विक विकास की पहली रिपोर्ट पेश करते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था पर बड़ी भविष्यवाणी की है. उन्होंने कृषि ऋण माफी को लेकर कहा कि ऐसे लोकलुभावन उपायों से किसानों की समस्याओं का स्थाई समाधान नहीं होगा. इसके बजाय कैश सब्सिडी बेहतर रहेगा.

    दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मौके पर सीएनबीसी-टीवी18 से बातचीत में गीता गोपीनाथ ने बताया, 'मेरा मामना है कि कृषि क्षेत्र पर भारी संकट है और कृषि ऋण माफी स्थाई समाधान नहीं है.' उन्होंने कहा कि कैश सब्सिडी ऋण माफी के मुकाबले बेहतर होगा.

    गोपीनाथ ने कहा कि कैश सब्सिडी, ऋण माफी से बेहतर और व्यापक होगा. उन्होंने कहा कि सरकारों को किसानों को पैदावार बढ़ाने के लिए बेहतर तकनीक और बीज जैसी सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए. आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए कई राज्य सरकारों ने कृषि ऋण माफी की घोषणा की है.

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    उत्तर भारत के तीन हिंदी भाषी राज्य मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में कांग्रेस ने सत्ता में आने के बाद तुरंत कृषि ऋण माफी की घोषणा करते हुए किसानों से किए गए वादे को निभाया. इसको देखते हुए बीजेपी शासित राज्य गुजरात और असम ने भी इसको अपनाया.

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    कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि उनकी पार्टी और अन्य लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आराम नहीं करने देंगे, जब तक पूरे भारत में ऋण माफी योजना को लागू नहीं की जाती है.

    वहीं आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने भी कृषि ऋण माफी पर विरोध जताया था. साथ ही चुनाव आयोग से राजनीतिक दलों को इसे चुनावी वादों का मुद्दा बनाने से रोकने की मांग की थी.

    गोपीनाथ ने कहा कि कृषि क्षेत्र और रोजगार सृजन एनडीए सरकार के लिए प्रमुख मुद्दा है. यह इस साल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए प्रमुख चिंता का विषय भी रहेगा. लेकिन यह विकास दर मदृेनजर सकारात्मक भी रहेगा. वर्ल्ड इकोनॅामिक आउटलुक अपडेट में कहा गया है कि 2019-20 के दौरान भारत की अर्थव्यवस्था सबसे तेजी से आगे बढ़ेगी.

    जबकि इस दौरान वैश्विक स्तर पर मंदी रहने के आसार रहेंगे. वहीं भारत 7.5 फीसद की विकास दर से आगे बढ़ेगा. 2020-21 के दौरान भारत की विकास दर 7.7 फीसदी तक पहुंचने की उम्मीद है. इस दौरान चीन की विकास दर 6.2 फीसदी रहने का अनुमान है.

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