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लॉकडाउन का असर: इन दो राज्यों में आलू की मांग बढ़ी, कीमतों में 38 फीसदी तक इजाफा

News18Hindi
Updated: April 6, 2020, 9:41 PM IST
लॉकडाउन का असर: इन दो राज्यों में आलू की मांग बढ़ी, कीमतों में 38 फीसदी तक इजाफा
मार्च में लॉकडाउन की वजह से आलू की मांग बढ़ी है.

इस साल बेमौसम बारिश की वजह से आलू की फसल में देरी हुई. वहीं, दूसरी तरफ लॉकाडाउन की वजह से मांग बढ़ी है, लिहाजा कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है.

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नई दिल्ली. देश के दो राज्यों में आलू की कीमतों (Potato Price) में 28-38 फीसदी तक का इजाफा हो चुका है. लॉकडाउन (Lockdown) की वजह से आलू की मांग बढ़ी है, जिसके बाद उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में भाव में बढ़ोतरी हुई है. इसके अलावा महराष्ट्र, बिहार, झारखंड और असम में भी प्रति किलोग्राम आलू का भाव 18 रुपये से बढ़कर 23-25 रुपये के करीब हो गया है.

लॉकडाउन ने बिगाड़ा खेल
व्यापारियों का कहना है कि साल के शुरुआती से ही आलू का भाव स्थिर था और उन्हें उम्मीद थी कि मार्च में इसमें गिरावट आएगी. लेकन कोरोना वायरस (Coronavirus) की वजह से लॉकडाउन का ऐलान हो गया है और लोग अधिक से अधिक मात्रा में आलू खरीदने लगे. मांग में इस इजाफे के बाद कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है.

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सभी राज्यों में आलू की डिमांड


एक मीडिया रिपोर्ट में व्यापारी के हवाले से लिखा गया है कि इस साल बेमौसम बा​रिश की वजह से आलू की खुदाई थोड़ी देर से हुई है. ऐसे में उन्हें उम्मीद थी कि मार्च में भाव कम होगा. लेकिन, लॉकडाउन की वजह से मांग में अचानक तेजी देखने को मिल रही है. व्यापारियों का कहना है कि ट्रांसपोर्ट सिस्टम में बंद होने की वजह से भी कीमतों में पर असर पड़ा है. चूंकि, आलू जल्दी खराब नहीं होता और इसे अधिक समय के लिए स्टोर किया जा सकता है, इसलिए सभी राज्यों में इसकी मांग बढ़ गई है.

UP में सबसे अधिक आलू का उत्पाादन
कई स्थानों पर आलू का खुदरा मूल्य 14-15 रुपये प्रति किलो भी है. लेकिन इसका होलसेल भाव 18-20 रुपये प्रति किलो के स्तर पर है. बता दें कि उत्तर प्रदेश में आलू का उत्पादन सबसे अधिक होता है. औसतन, हर साल यहां करीब 1.5-1.6 करोड़ टन आलू का उत्पादन किया जाता है.

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मजदूर नहीं मिलने से कोल्ड स्टोरेज नहीं पहुंच रहा आलू
पश्चिम बंगाल में हर साल मार्च तक कोल्ड स्टोरेज में आलू पहुंच चुका होता है लेकिन इस साल अब तक इसमें 10 फीसदी जगह अभी खाली है. कोरोना वायरस की वजह से मजदूर नहीं मिल रहे, जिसकी वजह से कोल्ड स्टोरेज में आलू पहुंचाना मुश्किल हो गया है.

पश्चिम बंगाल में इस साल उत्पादन घटा
पश्चिम बंगाल में भी बेमौसम बारिश की वजह से इस साल आलू की बुवाई और खुदाई में देरी हुई है. अनुमान के मुताबिक, इस साल यहां करीब 90 लाख टन आलू का उत्पादन हुआ है. हालांकि, यहां हर साल औसतरन 1.1-1.2 करोड़ टन आलू का उत्पादन होता है. पड़ोसी राज्यों के साथ-साथ दक्षिण भारत से भी आलू की मांग में बढ़ी है. ऐसे में हाल कीमतों में तेजी जारी रही सकती है.

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First published: April 6, 2020, 9:41 PM IST
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