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IMF ने कहा- कोरोना संकट का मुकाबला करने के लिए हेल्थ सिस्टम में सुधार जरूरी

आईएमएफ की चीफ इकोनॉमिस्ट गीता गोपीनाथ
आईएमएफ की चीफ इकोनॉमिस्ट गीता गोपीनाथ

आईएमएफ की चीफ इकोनॉमिस्ट गीता गोपीनाथ (Gita Gopinath) ने बताया कि कई विकासशील देश हैं, जिन्हें अपने हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर में अतिरिक्त निवेश की जरुरत है.

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वाशिंगटन. वैश्विक वित्तीय संस्थान इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (International Monetary Fund) की चीफ इकोनॉमिस्ट गीता गोपीनाथ (Gita Gopinath) ने कहा कि भविष्य में कोरोना वायरस महामारी जैसे संकट (Coronavirus Crisis) का अच्छी तरह मुकाबला करने के लिए देशों को अपनी हेल्थ सिस्टम को मजबूत बनाने पर काम करना चाहिए और समाज के प्रभावित क्षेत्रों में समय पर मदद देने के लिए तैयार रहना चाहिए और साथ ही वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देना चाहिए.

वैक्सीन के आने के बाद बढ़ेगी कारोबारी गतिविधियां
आईएमएफ का अनुमान है कि कोरोना के प्रकोप से उबरते हुए 2021 में वैश्विक अर्थव्यवस्था 5.5  की दर से और 2022 में 5.5 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी. ये आंकड़े वैक्सीन के आने के बाद कारोबारी गतिविधियों में बढ़ोतरी को दर्शाते हैं।

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हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर में अतिरिक्त निवेश की जरुरत 


गोपीनाथ ने बताया कि कोविड-19 संकट से तीन मुख्य सबक सीखे जा सकते हैं. उन्होंने कहा, ''सबसे पहले, देशों को ऐसे किसी भी हेल्थ संकट के लिए अपनी हेल्थ सिस्टम को तैयार करना चाहिए. कई विकासशील देश हैं, जिन्हें अपने हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर में अतिरिक्त निवेश की जरुरत है. यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण सबक है.''

गोपीनाथ ने आगे कहा, ‘‘दूसरा सबक संकटगस्त परिवारों, व्यवसायों को समय पर मदद पहुंचाने का है। हम जानते हैं कि जब सुधार की शुरुआत हुई, तो ये मजबूत तभी होगी जब सबसे अधिक संकटग्रस्त लोगों से इसे समर्थन मिली, यानी उनकी स्थिति में सुधार हो।’’

वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देने की जरुरत
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जोर देते हुए कहा, ''यह सुनिश्चित करना चाहिए कि स्वास्थ्य संकट को खत्म करने के लिए जरूरी टीकाकरण और उपचार विश्व स्तर पर उपलब्ध हों, क्योंकि इसके बिना हम इस संकट से नहीं निकल पाएंगे.''

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कई देशों ने दिया है नीतिगत समर्थन 
उन्होंने कहा कि इस संकट का मिलकर मुकाबला करने की जरूरत है. गोपीनाथ ने कहा कि कई देशों ने नीतिगत समर्थन दिया है और इसमें से ज्यादातर विकसित अर्थव्यवस्थाएं हैं. उन्होंने कहा कि विकसित अर्थव्यवस्थाओं ने 2020 में अपने जीडीपी का लगभग 24 फीसदी राजकोषीय समर्थन प्रदान किया है और उभरते बाजार और मध्यम आय वाले देशों में यह आंकड़ा लगभग छह प्रतिशत है, जबकि निम्न आय वाले देशों के लिए यह आंकड़ा दो फीसदी से कम है.

वैक्सीन के असमान वितरण से वित्तीय जोखिम बढ़ने की आशंका
इस बीच आईएमएफ ने एक रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि कोविड-19 वैक्सीन के असमान वितरण से वित्तीय जोखिम बढ़ने की आशंका है. आईएमएफ ने बुधवार को जारी वैश्विक वित्तीय स्थिरता सूचना में बताया कि जब तक कोरोना वायरस के टीके व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं होते, तब तक बाजार में तेजी राजकोषीय समर्थन टिकी रहेगी.
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