Delhi-NCR में बंद हुआ सिंथेटिक दूध, कोरोना महामारी में भी रोज पीने को मिल रहा है ताजा दूध, जानिए कैसे

Delhi-NCR में बंद हुआ सिंथेटिक दूध

Delhi-NCR में बंद हुआ सिंथेटिक दूध

सरकारी सर्वे के मुताबिक दिल्ली-एनसीआर में हर रोज प्रति व्यक्ति 600 एमएल दूध की जरूरत होती है. इस जरूरत को पूरा करने में अमूल और मदर डेयरी बड़ा रोल निभाती है.

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नई दिल्ली: देश में फैले कोरोना संकट के बीच राजधानी दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) में रहने वालों को हर रोज ताजा दूध पीने को मिल रहा है. गर्मियों में होने वाली दूध की किल्लत भी नहीं हो रही है. यहां तक की मक्खन और दूध पाउडर से भी दूध बनाने की नौबत नहीं आ रही है. दिल्ली में भरपूर दूध है. वहीं, इन दिनों सिंथेटिक दूध (Synthetic Milk) बनाकर बेचने वाले भी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं.

दिल्ली-एनसीआर में चाहिए 600 एमएल प्रति व्यक्ति दूध

एक सरकारी सर्वे के मुताबिक दिल्ली-एनसीआर में हर रोज प्रति व्यक्ति 600 एमएल दूध की जरूरत होती है. इस जरूरत को पूरा करने में अमूल और मदर डेयरी बड़ा रोल निभाती हैं. एक आंकड़े के मुताबिक अमूल दिल्ली-एनसीआर में बने 12 डेयरी प्लांट के जरिए दिल्ली-एनसीआर में हर रोज़ तकरीबन 45 लाख लीटर दूध की सप्लाई करती है.

वहीं, मदर डेयरी सिर्फ दिल्ली में ही 25 लाख लीटर दूध की सप्लाई रोज़ाना करती है. इसके अलावा हरियाणा की सरकारी कंपनी वीटा भी एनसीआर की जरूरत को पूरा करने में अपना योगदान देती है.
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दिल्ली को रोजाना चाहिए 75 से 80 लाख लीटर दूध

आंकड़े बताते हैं कि अकेले दिल्ली की 75 से 80 लाख लीटर दूध की जरूरत है. इसमे घर-परिवार के अलावा आइसक्रीम, मिठाई की दुकान, चाय की दुकान, होटल और रेस्टोरेंट की जरूरत के साथ हर रोज होने वाली शादियों और पार्टी में भी दूध की डिमांड होती है, लेकिन कोरोना महामारी के चलते आजकल यह डिमांड न के बराबर रह गई है. हालांकि कोरोना से पहले डिमांड की आड़ में सिंथेटिक दूध बनाने वाले भी अपना बनाया दूध भी दिल्ली-एनसीआर में सप्लाई कर रहे थे. लेकिन अब हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं.



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अब मक्खन-पाउडर से भी नहीं न रहा दूध

यूपी के डेयरी संचालक एमडी सिंह की मानें तो गर्मियों के मुकाबले सर्दियों में दूध खूब आता है. पशुओं को हरा चारा ज़्यादा मिलने के चलते वो भी दूध ज़्यादा देने लगते हैं. ऐसे में सप्लाई होने के बाद भी डेयरी में दूध बचता है. ऐसे में इस बचे हुए दूध का पाउडर बना लिया जाता है. साथ ही उसमे से मक्खन भी अलग कर लिया जाता है.

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स्टोरेज क्वालिटी और कैपेसिटी अच्छी होने के चलते मक्खन और दूध पाउडर 18 महीने तक चल जाता है. जब दूध सप्लाई पर कोई संकट आता है या गर्मियों में दूध की सप्लाई कम होने लगती है तो ऐसे में स्टोरेज में पहले से रखे दूध पाउडर और मक्खन को मिलाकर फिर से दूध बना दिया जाता है. यही वजह है कि आजकल दिल्ली-एनसीआर वालों को हर रोज ताजा दूध पीने को मिल रहा है.

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