भारत से लड़ाई चीन पर पड़ेगी भारी! त्योहारी सीजन में China को होगा 40 हजार करोड़ रुपये का नुकसान

भारत से लड़ाई चीन पर पड़ेगी भारी! China को होगा 40000 करोड़ का नुकसान
भारत से लड़ाई चीन पर पड़ेगी भारी! China को होगा 40000 करोड़ का नुकसान

अप्रैल से अगस्त के बीच चीन से होने वाले आयात में 27.63 फीसदी की कमी आई है. असली झलक तो दिवाली के आसपास दिखेगी. यह कहना है छोटे व्यापारियों के संगठन कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) का है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 22, 2020, 7:39 PM IST
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नई दिल्ली. भारत और चीन के बीच तनाव शुरू होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने लोगों से अपील की थी भारतीय चीनी वस्तुओं का बहिष्कार कर दें. उसे पूरा करने की दिशा में काम शुरू हो गया है. तभी तो इस साल अप्रैल से अगस्त के बीच चीन से होने वाले आयात में 27.63 फीसदी की कमी आई है. असली झलक तो दिवाली के आसपास दिखेगी. यह कहना है छोटे व्यापारियों के संगठन कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) का है.

कैट का कहना है कि भारत ने चीन और चीनी सरकार के मुख पत्र ग्लोबल टाइम्स को आइना दिखा दिया है. उनके लंबे चौड़े दावों के बावजूद, अप्रैल से अगस्त तक की अवधि में चीन से आयात में उल्लेखनीय कमी आई है. यह कमी चीनी अख़बार ग्लोबल टाइम्स के मुंह पर ज़ोरदार तमाचा है. क्योंकि, इसी ग्लोबल टाइम्स ने लिखा था कि चीन के सामान के आयात कम करने की भारत की हैसियत नहीं है. बीते 10 जून से ही कैट भारत में चीनी वस्तुओं के बहिष्कार का एक बड़ा अभियान चला रहा है, जिसकी सफलता इस कमी से दिखाई देती है.

त्योहारी मौसम में झटका
कल ही संसद में यह जानकारी दी गई कि अप्रैल से अगस्त के दौरान चीन से भारत का आयात 27.63 प्रतिशत घट गया है. कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया और राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने इसे चीन के दुष्चक्र से भारतीय व्यापार को मुक्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि चीन को एक और झटका मिलने वाला है. यह झटका होगा त्योहार के सामान का आयात रूकना. दरअसल, अभी तक भारत में दिवाली सहित आसपास के कई त्योहारों के अवसर पर हर वर्ष चीन से करीब 40 हजार करोड़ रुपये का सामान आता रहा है. इस साल यह नहीं आएगा.
कुछ मशहूर हस्तियां अभी भी नहीं समझ रही


खंडेलवाल का कहना है कि चीन से आयात में इतनी बड़ी कमी चीन के खिलाफ भारत के लोगों की मनोदशा और भावनाओं को दर्शाती है. लेकिन, दुर्भाग्य से कुछ मशहूर हस्तियों के समूह हैं, जो चीनी ब्रांडों का समर्थन करके या चीन के निवेश वाली कंपनियों के मुखपत्र बनने के लिए चीन को बढ़ावा दे रहे हैं. वे पैसे कमाने के लिए अधिक परेशान हैं और भारत के लोगों की भावनाओं की परवाह नहीं करते हैं.
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