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आरबीआई के बुलेटिन में सरकारी बैंकों के तेजी से निजीकरण को बताया गया नुकसान की बात, अब बैंक ने दी सफाई

आरबीआई के बुलेटिन में सरकारी बैंकों के तेजी से निजीकरण को बताया गया नुकसान की बात, अब बैंक ने दी सफाई

सरकारी बैंकों का धीरे-धीरे निजीकरण बेहतर तरीका: आरबीआई.

सरकारी बैंकों का धीरे-धीरे निजीकरण बेहतर तरीका: आरबीआई.

आरबीआई ने अपने अगस्त के बुलेटिन में छपे एक लेख को लेकर सफाई दी है. इस लेख में सरकारी बैंकों के तेजी से निजीकरण को नुकसान की बात कहा गया है. हालांकि, अब आरबीआई ने कहा है कि यह लेखकों के अपने विचार हैं.

हाइलाइट्स

आरबीआई ने सरकारी बैंकों के निजीकरण वाले विचार पर दी सफाई.
आरबीआई के बुलेटिन में बताया गया था नुकसान की बात.
केंद्रीय बैंक ने कहा कि यह लेखकों के अपने विचार हैं.

नई दिल्ली. आरबीआई के बुलेटिन में ‘सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का निजीकरण: एक वैकल्पिक नजरिया’ शीर्षक के तहत प्रकाशित सरकारी बैंकों के निजीकरण संबंधी विचार पर आरबीआई ने सफाई दी है. रिजर्व बैंक का कहना है कि धीरे-धीरे निजीकरण वाले विचार आरबीआई के नहीं हैं बल्कि यह लेखकों की अपनी सोच है. बकौल आरबीआई यह विचार आरबीआई की सोच से कतई मेल नहीं खाते हैं.

आरबीआई बुलेटिन के अगस्त अंक में प्रकाशित इस लेख में कहा गया है, ‘‘सरकार के निजीकरण की ओर धीरे-धीरे बढ़ने से यह सुनिश्चित हो सकता है कि वित्तीय समावेश (अधिक से अधिक लोगों के वित्तीय सेवाओं से जोड़ना) के सामाजिक उद्देश्य को पूरा करने में एक खालीपन न पैदा हो.” लेख के अनुसार, अगर बैंकों का बहुत तेजी से निजी हाथों में सौंपा जाता है तो इससे फायदे की जगह नुकसान होगा. इसके बाद आरबीआई ने सफाई जारी की है. गौरतलब है कि सरकार पहले ही 2 सरकारी बैंकों के निजीकरण की घोषणा कर चुकी है. आरबीआई की सफाई में कहा गया है कि लेखकों के अनुसार, तेजी से निजीकरण के बजाय सरकार की धीरे-धीरे सरकारी बैंकों की निजीकरण की योजना अधिक बेहतर है.

ये भी पढ़ें- RBI ने चेताया, हड़बड़ी में सरकारी बैंकों के निजीकरण से फायदे की बजाय होगा नुकसान

बड़े स्तर पर विलय से मिली मजबूती
लेख में यह भी कहा गया है कि हाल में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के बड़े स्तर पर विलय से क्षेत्र में मजबूती आई है. इससे मजबूत और प्रतिस्पर्धी बैंक सामने आए हैं. गौरतलब है कि सरकार ने 2020 में 10 राष्ट्रीयकृत बैंकों का चार बड़े बैंकों में विलय कर दिया था। इससे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की संख्या घटकर 12 रह गई है, जो 2017 में 27 थी.

मुनाफा कमाना नहीं मकसद
आरबीआई ने अपने बुलेटिन में लिखा था कि पब्लिक सेक्टर बैंक सिर्फ अधिकतम मुनाफा कमाने के मकसद से काम नहीं करते. इन्‍होंने ज्यादा से ज्यादा लोगों तक वित्तीय सेवाएं पहुंचाने के जरूरी लक्ष्य को भी अपने कामकाज में जिस तरह से समाहित किया है, वैसा निजी क्षेत्र के बैंक नहीं कर पाए हैं. रिजर्व बैंक का मानना है कि अब देश इस आर्थिक सोच से काफी आगे निकल आया है कि निजीकरण ही हर मर्ज की दवा है. अब हम इस बात को मानने लगे हैं कि इस दिशा में आगे बढ़ते समय ज्यादा सावधानी और सोच-विचार से काम लेना जरूरी है.

Tags: Bank Privatisation, Business news, Government bank, RBI

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