कोरोना संकट के बीच दुनिया में सबसे ज्‍यादा पाकिस्‍तान पर पड़ी महंगाई की मार

कोरोना संकट के बीच दुनिया में सबसे ज्‍यादा पाकिस्‍तान पर पड़ी महंगाई की मार
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान

स्‍टेट बैंक ऑफ पाकिस्‍तान (SBP) की ओर से जारी अप्रैल के आंकड़ों के मुताबिक, पाक में महंगाई (Inflation) के कारण हालात न सिर्फ विकसित अर्थव्‍यवस्‍थाओं बल्‍कि उभरती हुई अर्थव्‍यवस्‍थाओं के मुकाबले भी खराब हैं.

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कोरोना संकट के बीच पाकिस्‍तान (Pakistan) में लोग महंगाई की मार भी झेल रहे हैं. स्‍टेट बैंक ऑफ पाकिस्‍तान (SBP) के मुताबिक, वित्‍त वर्ष 2020 के दौरान दुनिया में सबसे ज्‍यादा महंगाई (Inflation) की मार पाक पर पड़ी है. पाकिस्तानी रुपये में 2020 के दौरान अन्य देशों की मुद्राओं के मुकाबले सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई है. ऐसे में हालात को काबू करने के लिए पाकिस्‍तान को ब्याज दरें (Interest rates) बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ा है.

एसबीपी की अप्रैल 2020 के लिए जारी मुद्रास्फीति रिपोर्ट (Inflation Report) के मुताबिक, पाकिस्तान में विकसित अर्थव्यवस्थाओं ही नहीं बल्कि भारत, चीन, बांग्लादेश और नेपाल जैसी उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले भी सबसे ज्‍यादा मुद्रास्फीति दर्ज की गई है. एसबीपी ने मुद्रास्फीति के दबाव को कम करने के लिए ब्याज दरों को बढ़ा दिया था. इसका नतीजा एकदम उलटा मिला. इससे देश में महंगाई बढ़ गई. दरअसल, ब्‍याज दरें बढ़ने के कारण निजी कंपनियों ने महंगा कर्ज लेना बंद कर दिया. इससे देश की औद्योगिक विकास दर घट गई.

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पाकिस्‍तान के अखबार 'द डॉन' के मुताबिक, पाक में जनवरी में 12 साल की सबसे ज्‍यादा महंगाई दर दर्ज की गई, जो 14.6 फीसदी तक पहुंच गई थी. बढ़ती महंगाई को थामने के लिए एसबीपी ने ब्याज दरों को 13.25 फीसदी तक कर दिया था. इस दौरान कोरोना वायरस महामारी के कारण मांग में कमी होने से महंगाई कम हो गई थी. इसके बाद ब्याज दरों में 5.25 फीसदी की कटौती कर दी गई. पाकिस्‍तान के व्यापार और औद्योगिक क्षेत्र ने ब्याज दर में कटौती की मांग की है.
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उद्योग संगठनों ने कहा है कि पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था को अतिरिक्‍त 3-4 खरब रुपये के निवेश की जरूरत है. अनुमान जताया जा रहा है कि इस साल मंदी के कारण राजस्व भी कम जुटाया जा सका है. लिहाजा, सरकार के लिए इतनी बड़ी राशि निवेश करना भी संभव नहीं है. मई में मुद्रास्फीति दर 8.2 फीसदी पर आ गई है. इसमें जून में और गिरावट दर्ज की जा सकती है. चालू वित्त वर्ष के लिए जुलाई-मई की मुद्रास्फीति एसबीपी के पहले के 11 फीसदी के अनुमान से घटकर 10.94 फीसदी हो गया है.

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