कोरोना संकट में भी ​ऑल-वैदर हीरोज़ बनकर उभरे डिलीवरी एग्‍ज़ीक्‍युटिव्‍स, फेस्टिव सीजन भी होगा खास

डिलीवरी एग्‍ज़ीक्‍युटिव्‍स ने लॉकडाउन के चुनौतीपूर्ण दौर में भी लोगों की मांगे पूरी करने में अहम भूमिका निभायी
डिलीवरी एग्‍ज़ीक्‍युटिव्‍स ने लॉकडाउन के चुनौतीपूर्ण दौर में भी लोगों की मांगे पूरी करने में अहम भूमिका निभायी

ई-कॉमर्स मार्केटप्‍लेस के ये डिलीवरी एग्‍ज़ीक्‍युटिव्‍स देशभर में उन सभी कारोबारों की जीवनरेखा बनकर उभरे हैं जो महामारी के चलते देशव्‍यापी लॉकडाउन की मार से झुलसने लगे थे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 17, 2020, 5:09 PM IST
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नई दिल्ली. कोरोना वायरस महामारी ने पिछले कुछ महीनों के दौरान दुनिया के तौर-तरीकों को अभूतपूर्व रूप से बदल दिया है. भारत में भी वायरस का प्रसार रोकने के लिए मार्च में देशभर में लॉकडाउन की घोषणा की गई थी. इन नए हालातों ने हमें नए हीरो दिए, ये अग्रिम मोर्चे पर तैनात कर्मचारी हैं जिन्‍हें प्रधानमंत्री ने 'बिना वर्दीधारी सैनिक' बताया है. इनमें डॉक्‍टरों, नर्सों, फार्मासिस्‍टों और पुलिस के अलावा आशा और आंगनवाड़ी कर्मचारी, गार्ड तथा डिलीवरी एग्‍ज़ीक्‍युटिव्‍स भी शामिल हैं. इन डिलीवरी एग्‍ज़ीक्‍युटिव्‍स ने लॉकडाउन के चुनौतीपूर्ण दौर में भी लोगों की मांगे पूरी करने में अहम भूमिका निभायी और देश को महामारी से निपटने में मदद दी. अब जबकि महामारी त्‍योहारों को मनाने के तौर-तरीकों में भी बदलाव ला रही है, ये डिलीवरी एग्‍ज़ीक्‍युटिव्‍स नई दुनिया के नए समीकरणों की बारीकियों को तेजी से सीख रहे हैं. वो उपभोक्‍ताओं को इस बात का पूरा भरोसा दे रहे हैं कि वे सुरक्षित बने रहें. यही वजह है कि उनकी भूमिका को हर तरफ से सराहना मिल रही है.

इकोनॉमी के लिए भी बेहतर
मास्‍क और सैनीटाइज़र का इस्‍तेमाल करने के अलावा ये डिलीवरी एग्‍ज़ीक्‍युटिव्‍स सोशल डिस्‍टेंसिंग मानकों का पूरा पालन करते हुए कस्‍टमर के दरवाज़े पर पहुंचने से पहले सभी आवश्‍यक सावधानियां सुनिश्चित करते हैं. ऐसा करना इन दिनों और भी महत्‍वपूर्ण है जबकि लाखों भारतीय सुरक्षित तरीके से त्‍योहारों को मनाने के लिए उत्‍सुक हैं. ये देश की उस अर्थव्‍यवस्‍था में दोबारा जान फूंकने के लिए भी प्रयासरत हैं जो मार्च-अप्रैल में पहली बार लॉकडाउन की घोषणा के बाद पूरी तरह से थम गई थी. डिलीवरी एग्‍ज़ीक्‍युटिव्‍स द्वारा खुद को नए हालातों के अनुसार ढालने का ही नतीजा है कि ई-कॉमर्स कंपनियां ‘जिंदगियों और आजीविकाओं’ को बचाने में कामयाब रही हैं.

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लॉकडाउन के दौर में जीवनरेखा बनकर उभरे डिलीवरी एग्जीक्युटिव्स


ई-कॉमर्स मार्केटप्‍लेस के ये डिलीवरी एग्‍ज़ीक्‍युटिव्‍स देशभर में उन सभी कारोबारों की जीवनरेखा बनकर उभरे हैं जो महामारी के चलते देशव्‍यापी लॉकडाउन की मार से झुलसने लगे थे. ई-कॉमर्स सेवाओं की उपलब्‍धता ने कई कारोबारों को इन ऑल वैदर हीरोज़ की मदद से, जो कि आर्थिक गतिविधियों के इंजन को ताकत देने की भारी जिम्‍मेदारी अपने कंधों पर उठाए हैं, परिचालन सुगम तरीके से जारी रखने में मदद पहुंचायी है. फूड और ग्रॉसरी डिलीवरी से लेकर जनरल मर्चेंडाइज़ तक को घर-घर पहुंचाने वाले इन डिलीवरी एग्‍ज़ीटिव्‍स ने अधिकांश कारोबारों के पहियों को गतिमान बनाए रखा है.

ई-कॉमर्स कंपनियां दें इनपर ध्यान
ई-कॉमर्स कंपनियों को अपने इन फ्रंटलाइन वर्कफोर्स का पेशेवर विकास सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाने चाहिए. उन्‍हें अतिरिक्‍त जिम्‍मेदारियों के लिए टैलेंट डेवलपमेंट प्रोग्राम तथा इन्‍सेंटिव दिए जाने चाहिए, ताकि वे बड़ी और महत्‍वपूर्ण भूमिकाओं के लिए तैयार हो सकें, जिससे कॅरियर में आगे बढ़ने के अवसर उन्‍हें मिलते रहें. इसी तरह, ई-कॉमर्स बिज़नेस को अपने कार्यबल के लिए देखभाल की संस्‍कृति (कल्‍चर ऑफ केयर) भी बनानी चाहिए जिससे इन डिलीवरी और सप्‍लाई चेन एग्‍ज़ीक्‍युटिव्‍स की खुशहाली सुनिश्चित की जा सके. उनके तथा उनके परिवारों के लिए समुचित इंश्‍योरेंस कवर के अलावा डॉक्‍टर के साथ कंसल्‍टेशन और इम्‍प्‍लाई एंगेजमेंट इनीशिएटिव्‍स भी हों और कुल-मिलाकर पूरी इंडस्ट्री को अपने इन ऑल-वैदर हीरोज़ की सुरक्षा तथा व्‍यक्तिगत विकास को सुनिश्चित करने वाला तंत्र जुटाना चाहिए.

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फ्लिपकार्ट के सीनियर वाइस प्रेसीडेंट अमितेष झा का कहना है कि ये प्रयास इस वर्कफोर्स की दीर्घकालिक सुरक्षा में योगदान करने के साथ-साथ उन्‍हें आत्‍मविश्‍वास प्रदान करेंगे और जीवन का लक्ष्‍य भी देंगे. उन्होंने कहा, 'इंडस्‍ट्री में हमारे लिए जरूरी है कि हम इन डिलीवरी कर्मियों के योगदान को समझें और उनके साथ नियमित रूप से बातचीत करें ताकि सभी स्‍तरों एवं प्रक्रियाओं से जुड़े हरेक व्‍यक्ति तक कंपनी के नज़रिए और नीति को बखूबी पहुंचाया जा सके.'

सप्लाई चेन में बढ़े महिलाओं की भागीदारी
यह लास्‍ट माइल या डिलीवरी के मोर्चे पर कंज्‍यूमर तक पहुंचने की राह में विविधिता भरने का भी अच्‍छा अवसर है. भारत की सप्‍लाई चेन में महिलाओं की मौजूदा भागीदारी काफी कम है और इस तरफ प्राथमिकता देने की जरूरत है. इससे पूरे माहौल को महिलाओं के अनुरूप बनाने और वर्कफोर्स को भी उनके लिहाज़ से संवेदी बनाने में मदद मिलेगी. साथ ही, सप्‍लाई चेन में उनकी भागीदारी के नए क्षेत्रों की पहचान की जा सकेगी.

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सप्‍लाई चेन में महिलाओं की अधिक हिस्‍सेदारी से इस धारणा को भी तोड़ने में मदद मिलेगी कि यह काफी श्रम-साध्‍य और पुरुष प्रधान सैक्‍टर है. इससे इंडस्‍ट्री को अधिक कुशल बनाने तथा ग्राहकों के स्‍तर पर भी संतुष्टि बढ़ाने में मदद मिलेगी. एक और महत्‍वपूर्ण बात यह है कि कोविड-19 के चलते डिलीवरी एग्‍ज़ीक्‍युटिव्‍स के जीवन में भी काफी बदलाव आए हैं और ये सभी हितधारकों – ई-कॉमर्स कंपनियों, विक्रेताओं, उपभोक्ताओं और सरकार के स्‍तर पर हुए बदलावों/पहल का नतीजा है.
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