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Budget 2021: वर्क फ्रॉम होम बेनिफिट्स से लेकर इनकम टैक्स छूट तक, ये हैं बजट से आम आदमी की 5 बड़ी उम्मीदें

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (File Photo)
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (File Photo)

Union Budget 2021: कोरोना वायरस महामारी ने देश की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ आम आदमी के लिए भी कई बड़ी चुनौतियां खड़ी कर दी हैं. ऐसे में इस बार के बजट से आम आदमी को ही सबसे ज्यादा उम्मीद होगी. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के लिए भी इस उम्मीद पर खरा उतरना एक चुनौती होगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 28, 2021, 5:10 PM IST
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नई दिल्ली. वित्त वर्ष 2021-22 के लिए बजट पेश करने से पहले इस बार वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) के लिए कई बड़ी चुनौतियां हैं. कोरोना वायरस महामारी की वजह से अर्थव्यवस्था अब भी सुस्ती के दौर से उबर रही है. लंबे समय के लिए कारोबार बंद रहे, लोगों की नौकरियां गईं और इनकम भी कम हुई. ऐसे में सरकार से कुछ उन उपायों की उम्मीद की जा रही है, जिससे आर्थिक वृद्धि का पहिया तेजी से घूम सके, ज्यादा नौकरियां मिलें, लोगों की इनकम बढ़े और निवेश व मांग बढ़े. आइए जानते हैं कि देश के मिडिल क्लास की नज़र इस बार किन बातों पर रहेगी.

1. घर से काम कर रहे कर्मचारियों को घर पर ही ऑफिस जैसी व्यवस्था करने के लिए खर्च करना पड़ा है. ऐसे में इस बार नज़र रहेगी कि सरकार इस खर्च पर कुछ राहत देने का ऐलान करती है या नहीं. क्या सरकार मांग बढ़ाने के लिए कुल डिडक्शन की घोषणा करेगी?

2. वैश्विक महामारी के बीच सैलरी पाने वाले मिडिल क्लास को टैक्स के मोर्चे पर भी सरकार से उम्मीद है. देखना होगा कि क्या आने वाले बजट में सरकार स्टैंडर्ड डिडक्शन (Standard Deduction) की लिमिट बढ़ाने का ऐलान करती है या नहीं. स्टैंडर्ड डिडक्शन वह रकम होती है, जो किसी व्यक्ति की टैक्सेबल इनकम में से घटाने के बाद टैक्स कैलकुलेट किया जाता है. इस प्रकार वो इनकम घट जाती है, जिस पर टैक्स देना होता है. स्टैंडर्ड डिडक्शन को 2018-19 के बजट में मेडिकल व ट्रांसपोर्ट अलाउंस को खत्म कर लाया गया था. उस समय स्टैंडर्ड डिडक्शन की लिमिट 40,000 रुपये थी, जिसे बढ़ाकर अब 50,000 रुपये कर दिया गया है.



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3. होम लोन के प्रिंसिपल रिपेमेंट (Home Loan Principal Repayment) पर 1.5 लाख रुपये की छूट की उम्मीद है. यह इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C (Section 80C) के दायरे से बाहर रखने की मांग है. अधिकतर मामलों में पहले ही 80C के तहत 1.5 लाख की लिमिट पूरी हो जा रही है. यह भी मांग ही है कि इस छूट को घर के पजेशन मिलने की तारीख से नहीं बल्कि लोन लेने की तारीख से हो.

4. सेक्शन 80सी के तहत लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम, होम लोन के प्रिंसिपल रिपेमेंट, एफडी, पीएफ आदि पर 1.5 लाख रुपये तक की छूट मिलती है. पिछले कुछ समय से बढ़ती महंगाई को देखते हुए सरकार इस लिमिट को 2.5 से 3 लाख रुपये तक बढ़ाने का ऐलान कर सकती है. इनकम टैक्स छूट की इस लिमिट के बढ़ने का मतलब होगा कि लोग टैक्स बचाने वाले इंस्ट्रूमेंट्स पर ज्यादा खर्च करेंगे.

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5. इस वैश्विक महामारी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि हेल्थ इंश्योरेंस प्रोडक्ट अब एक जरूरत बन चुकी है. अब यह केवल विकल्प नहीं रहा है. जीवन बचाने में हेल्थ इंश्योरेंस की भूमिका अब बहुत बढ़ चुकी है. कई कंपनियों ने अपने कर्मचारियों के लिए हेल्थ इंश्योरेंस अनिवार्य कर दिया है. इसे देखते हुए उम्मीद है कि अब सरकार भी इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80डी की अधिकतम लिमिट को बढ़ाने का ऐलान करे.
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