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Income Tax Rules: फ्रीलांसर भी कर सकते हैं 50 हजार रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन क्‍लेम, भरना होगा अलग फॉर्म

Income Tax Rules: फ्रीलांसर भी कर सकते हैं 50 हजार रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन क्‍लेम, भरना होगा अलग फॉर्म

Income Tax Rules के मुताबिक, फ्रीलांसर को वित्‍त वर्ष में एक महीने भी की गई नौकरी की जानकारी देनी होगी.

Income Tax Rules के मुताबिक, फ्रीलांसर को वित्‍त वर्ष में एक महीने भी की गई नौकरी की जानकारी देनी होगी.

आयकर नियमों (Income Tax Rules) के मुताबिक फ्रीलांसर्स (Freelancers) ने अगर किसी वित्‍त वर्ष के दौरान एक महीने के लिए भी नौकरी की है तो वह स्टैंडर्ड डिडक्शन (Standard Deduction) क्लेम कर सकता है.

    नई दिल्‍ली. आयकर के नियम (Income Tax Rules) वेतनभोगी कर्मचारियों और फ्रीलांसर्स (Freelancers) के लिए काफी अलग हैं. हालांकि, अगर किसी वित्‍त वर्ष में फ्रीलांसर ने एक महीने भी फुल टाइम नौकरी की है तो वो वेतनभोगी करदाताओं (Salaried Taxpayers) की तरह 50 हजार रुपये के स्‍टैंडर्ड डिडक्‍शन के लिए क्‍लेम कर सकते हैं. इसके लिए फ्रीलांसर को इनकम टैक्स रिटर्न भरते समय (ITR Filing) नौकरी करने की जानकारी देनी होगी. इसके लिए उन्‍हें इनकम टैक्‍स रिटर्न अलग फॉर्म के जरिये दाखिल करना होगा. बता दें कि वेतनभोगी करदाता आईटीआर फॉर्म -1 या 2 भरते हैं.

    कौन-सा फॉर्म भरना होगा?
    इनकम टैक्‍स रिटर्न फॉर्म-1 (ITR-1) में फ्रीलांसिंग के जरिये होने वाली आमदनी की जानकारी नहीं दी जा सकती है. अगर फ्रीलांसिंग के जरिये 1 रुपये की भी आमदनी हुई है तो करदाता को आईटीआर फॉर्म-3 या 4 भरना होगा. सामान्‍य तौर पर सैलरीड टैक्सपेयर्स के लिए उपलब्ध 50,000 रुपये के स्टैंडर्ड डिडक्शन को फ्रीलांसर्स क्लेम नहीं कर सकते हैं. हालांकि, अगर उसने कुछ समय के लिए भी फुल टाइम जॉब की है तो सैलरी से आमदनी पर स्टैंडर्ड डिडक्शन को क्लेम कर सकते हैं. आईटीआर-3 और 4 में सैलरी व फ्रीलांसिंग से आय की जानकारी देने के लिए दो अलग कॉलम होते हैं. फ्रीलांसर टैक्स कम करने के लिए फ्रीलांसिंग के दौरान हुए खर्च के लिए भी दावा कर सकते हैं.

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    क्‍या है स्टैंडर्ड डिडक्शन?
    स्टैंडर्ड डिडक्शन वह छूट है जो टैक्‍सपेयर्स के निवेश और खर्च पर व्‍यक्तिगत तौर पर होती है. यह वो रकम है, जिसे आपकी आमदनी से सीधे-सीधे काटकर अलग कर दिया जाता है. इसके बाद बची हुई आमदनी पर ही टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स कैलकुलेशन की जाती है. पहले इसका लाभ कर्मचारियों को मिलता रहा था, लेकिन 2005 के बजट में इसे खत्म कर दिया गया. इसे 2018 में केंद्र की मोदी सरकार ने फिर शुरू कर दिया.

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    बदलता रहा डिडक्‍शन?
    साल 2005 में तत्‍कालीन सरकार ने स्टैंडर्ड डिडक्शन को खत्म कर कुछ विशेष मदों में छूट का प्रावधान किया. फिर वर्ष 2018 के बजट में इसका प्रावधान किया गया. उस समय परिवहन भत्ते के रूप में मिलने वाले 19,200 रुपये के डिडक्शन और चिकित्सा भत्ता के तौर पर मिलने वाले 15,000 रुपये के डिडक्शन को खत्म कर 40,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन दिया गया. इसे बाद में बढ़ाकर 50,000 रुपये कर दिया गया.

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    किसे मिलता है फायदा?
    स्टैंडर्ड डिडक्शन का फायदा काम करने के बदले सैलरी पाने वाले कर्मचारियों को मिलता है. आयकर कानून के मुताबिक, पेंशनभोगियों की आमदनी को भी सैलरी की तरह ही ट्रीट किया जाता है. इसलिए पेंशनर्स को भी स्टैंडर्ड डिडक्शन का फायदा मिलता है.

    Tags: CBDT, Filing income tax return, Income tax department, Income tax exemption, Income tax law, ITR filing, Personal finance

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