Gold में निवेश से होने वाले मुनाफे पर लगता है टैक्‍स, सिर्फ एक तरह से नहीं बनती कर देनदारी, जानें सबकुछ

सोने में निवेश के तीन तरीकों में होने वाले लाभ पर टैक्‍स देनदारी बनती है.

सोने में निवेश के तीन तरीकों में होने वाले लाभ पर टैक्‍स देनदारी बनती है.

गोल्‍ड की कीमतें (Gold Prices) अपने सर्वोच्‍च स्‍तर से काफी गिर चुकी हैं. अगर आप सोने में निवेश (Gold Investment) के जरिये मोटा मुनाफा कमाना चाहते हैं तो जान लें कि कीमती पीली धातु में कैसे निवेश किया जा सकता है और उससे मिलने वाले मुनाफे पर कितनी टैक्‍स देनदारी (Tax on Return) बनती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 26, 2021, 11:06 AM IST
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नई दिल्ली. गोल्‍ड के दाम 7 अगस्‍त 2020 के सर्वोच्‍च स्‍तर से करीब 10 हजार रुपये तक गिर चुके हैं. वहीं, अनुमान लगाया जा रहा है कि 2021 में सोने क कीमतें 63 हजार प्रति 10 ग्राम के स्‍तर तक पहुंच सकती हैं. इसके अलावा गोल्‍ड को निवेश का सबसे सुरक्षित विकल्‍प भी माना जाता है. इन सभी बातों को ध्‍यान में रखकर अगर आप सोने में पैसा लगाकर मोटा मुनाफा कमाने की योजना बना रहे हैं तो आपके लिए कुछ अहम बातें जानना बहुत जरूरी है. सबसे पहली बात ये कि सोने में किस-किस तरह से निवेश किया जाता सकता है और दूसरी इससे मिलने वाले मुनाफे पर कितना टैक्‍स लगता है.

भारत में लोग छोटी-छोटी बचत करके सोने के आभूषण खरीदते रहते हैं ताकि संकट के समय गहनों को बेचकर रकम जुटाई जा सके. हालांकि, सोना बेचना अब आसान नहीं रह गया है. दरअसल, आयकर विभाग के नियमों के मुताबिक अगर कोई व्‍यक्ति सोना बेचता है तो मिलने वाले मुनाफे पर टैक्स चुकाना होगा. अभी सोने में चार मुख्‍य तरीकों से निवेश किया जा सकता है. इनमें फिजिकल गोल्ड, गोल्ड म्यूचुअल फंड या ईटीएफ, डिजिटल गोल्ड और सॉवरेन गोल्ड बांड शामिल हैा. आइए जानते हैं कि सोने में निवेश से मिलने वाले मुनाफे पर कितना टैक्स देना होता है.

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फिजिकल गोल्ड बेचने से मिले लाभ पर टैक्स
भारत में सबसे ज्‍यादा ज्‍वेलरी या सिक्‍के खरीदकर लोग निवेश करते हैं. अगर फिजिकल गोल्‍ड बेचकर आप मुनाफा कमाते हैं तो दो तरह से टैक्स देनदारी बनती है. पहली, अगर गोल्‍ड खरीदने के 3 साल के भीतर बेचकर मुनाफा लेते हैं तो इसे शॉर्ट टर्म गेन माना जाएगा. इनकम टैक्स नियमों के मुताबिक, ऐसे मुनाफे को आपकी इनकम मानते हुए इस पर नियमों के मुताबिक टैक्स देना होगा. वहीं, अगर आप निवेश के तीन साल बाद फिजिकल गोल्‍ड बेचते हैं तो इसे लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गेन मानते हुए 20 फीसदी टैक्स चुकाना होगा.

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म्यूचुअल फंड्स, ETF से मुनाफे पर टैक्स
गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेट फंड (Gold EFT) निवेशक की लगाई रकम को फिजिकल गोल्ड में निवेश करता है. गोल्ड ईटीएफ की कीमत बाजार के हिसाब से घटती-बढ़ती रहती है. वहीं, गोल्ड म्यूचुअल फंड्स गोल्ड ईटीएफ में निवेश करता है. गोल्ड ईटीएफ और गोल्ड म्यूचुअल फंड्स पर फिजिकल गोल्ड की तरह ही टैक्स देनदारी बनती है. इसके अलावा कई बैंक, मोबाइल वॉलेट और ब्रोकरेज कंपनियां एमएमटीसी-पीएएमपी या सेफगोल्ड के साथ मिलकर गोल्ड की बिक्री करती हैं. इनसे हुए कैपिटल गेन पर फिजिकल गोल्ड या गोल्ड म्यूचुअल फंड्स या गोल्ड ईटीएफ की तरह ही टैक्स चुकाना होता है.

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सॉवरेन गोल्ड बांड से लाभ पर टैक्स नहीं
सॉवरेन गोल्ड बांड गवर्नमेंट सिक्योरिटीज होते हैं, जिन्हें रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) सरकार की तरफ से जारी करता है. इनकी कीमत एक ग्राम गोल्ड के हिसाब से तय की जाती है. निवेशकों को ऑनलाइन या कैश में इसकी खरीदारी करनी होती है. फिर निवेशक को उसके बराबर मूल्य का सॉवरेन गोल्ड बांड जारी किया जाता है. मैच्योरिटी के समय इसे रिडीम किया जाता है. इसका मैच्योरिटी पीरियड 8 साल होता है. इस अवधि पर रिडीम करने से हुए मुनाफे पर कोई टैक्स नहीं लगता है. इसमें निवेश के पांच साल बाद ही एग्जिट ऑप्शन मिल जाता है. ऐसे में अगर मैच्योरिटी पीरियड से पहले रिडीम कराते हैं तो फिजिकल गोल्ड की तरह टैक्स देना होता है. इसके अलावा 2.5 फीसदी सालाना ब्याज भी मिलता है, जो टैक्सेबल इनकम माना जाता है.
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