छूट के बाद भी 75 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्गों को भरना चाहिए इनकम टैक्स, जानिए क्या है वजह

वरिष्ठ नागरिकों को डीसीबी बैंक 3 साल के एफडी पर 7.25 फीसदी ब्याज दे रही है.

बजट में वित्त मंत्री ने 75 साल से ज्यादा उम्र के वरिष्ठ नागरिकों को इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने से छूट का ऐलान किया है. अब टैक्स जानकारों का कहना है कि आयकर विभाग से इस ऐलान को लेकर और स्पष्टीकरण की जरूरत है. सरकार ने इस ऐलान को कई शर्तों के साथ जोड़ रखा है.

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    नई दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2021 में टैक्स को लेकर एक ही बड़ा ऐलान किया था, वो ये कि 75 साल या इससे अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों को इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने से छूट मिलेगी. वित्त मंत्री (Finance Minister) द्वारा ऐलान के बाद इसकी खूब चर्चाएं भी हुई है. यह ऐलान कागज़ पर अच्छा लगता है कि लेकिन इसके साथ तमाम शर्तें लगी हुई हैं. आइए देखते हैं कि क्या ये पूरी प्रक्रिया वैसी हैं, जैसी सुनने में लगती हैं.

    बजट भाषण में बोलते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि हम 75 साल या उससे ज्यादा उम्र के बुजुर्गों पर से कानूनी पचड़ों का बोझ कम करने जा रहे हैं. हम ऐसे सीनियर सिटीजन जिनको सिर्फ पेंशन और ब्याज से आय होती है, इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने से छूट देने जा रहे हैं. उनका पेईंग बैंक उनके आय पर लागू होने वाले टैक्स स्वतः काट लेंगे. इससे आप समझ सकते हैं कि पेंशन और ब्याज आय से कमाई हासिल करने वाले 75 साल या उससे ज्यादा आय की उम्र वाले बुजुर्गों को इनकम टैक्स चुकाने की जरूरत नहीं है.

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    सरकार ने दी सशर्त स्वतंत्रता
    पहली शर्तः यह छूट वास्तव में टैक्स चुकाने से नहीं मिली है, बल्कि यह सिर्फ रिटर्न फाइल करने के लिए मिली है और उसके साथ भी तमाम शर्तें जुड़ी हैं. सबसे पहली शर्त यही है कि सीनियर सिटीजन की कमाई का जरिया सिर्फ पेंशन और ब्याज होना चाहिए. कमाई का कोई और दूसरा जरिया नहीं होना चाहिए.

    दूसरी शर्तः दूसरी शर्त यह है कि यह छूट पाने के लिए पेंशन अकाउंट और फिक्सड डिपॉजिट एक ही बैंक में होना चाहिए जिससे की बैंक सोर्स पर लागू टैक्स की कटौती कर सकें. जिससे की करदाता (Assessee) को अलग से टैक्स का भुगतान ना करना पड़े.

    तीसरी शर्तः तीसरी शर्त यह है कि दो या दो से ज्यादा बैंकों में फिक्सड डिपॉजिट रखने वाले सीनियर सिटीजन को आईटीआर फाइल करने से छूट नहीं होगी. अगर किसी सीनियर सिटीजन को पोस्ट ऑफिस जमाओं और दूसरी फिकस्ड इनकम स्कीमों से आय होती है तो उसको भी आईटीआर फाइल करना होगा.

    चौथी शर्तः चौथी शर्त यह है कि ऐसे सीनियर सिटीजन जो म्यूचुअल फंडड, शेयर, इंश्योरेंस स्कीम, डेट इंस्टूमेंट से आय हासिल करते है उनको रिटर्न फाइलिंग से छूट नहीं होगी.

    पांचवीं शर्तः पांचवी और आखिरी शर्त यह है कि राजकोष में ज्यादा टैक्स जमा होने की स्थिति में रिफंड हेतु सीनियर सिटीजन को आईटी रिटर्न फाइल करना होगा. इसके पीछे की सोच यह है कि अगर कोई सीनियर सिटीजन एक से ज्यादा बैंक अकाउंट मैनेज कर सकता है और एक से ज्यादा जरिए से कमाई कर सकता है तो वह इनकम टैक्स रिटर्न भी फाइल कर सकता है.

    आयकर विभाग से इस ऐलान पर स्पष्टीकरण की जरूरत
    क्लीयरटैक्स के अर्जित गुप्ता का कहना है कि इस मुद्दे पर टैक्स डिपॉर्टमेंट से अभी और स्पष्टीकरण की जरुरत है. अभी तक तो यह लगता है कि किसी सीनियर सिटीजन को रिटर्न फाइल से छूट हासिल करने के लिए उसका बैंक अकाउंट, बैंक डिपॉजिट और पेंशन इनकम एक ही स्पेशिफाइड बैंक में होना चाहिए. अलग-अलग बैंकों में अकाउंट रखने वाले सीनियर सिटीजन के लिए आईटीआर फाइल छूट के सुविधा के लिए हमें सभी बैंकों के इंटरकनेक्टिविटी की जरुरत होगी जिससे की ये बैंक आपस में सीनियर सिटीजन कर दाता के करदायित्वों से संबंधित सूचनाओं का अदान-प्रदान कर सकें.

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    टैक्स विषयों से जुड़े जानकारों का कहना है कि अभी इस मुद्दे पर आयकर विभाग से और स्पष्टीकरण की जरुरत है. ऐसी स्थिति में 75 साल या उससे अधिक आयु के बुजुर्गों के लिए यहीं बेहतर होगा कि वह अपना रिटर्न फाइल करें क्योंकि आपको इनकम टैक्स से छूट तो मिली नहीं है. ऐसे में अगर आपके पास आईटीआर फाइल करने के लिए सीए है तो आपके लिए आईटीआर फाइल करने में वैसे भी कोई बड़ी मुश्किल नहीं होने वाली है.

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