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Income Tax Saving: अपने घाटे को एडजस्ट करके आप टैक्स देनदारी कैसे कम कर सकते हैं, एक्सपर्ट्स से समझिए

Income Tax Saving: अपने घाटे को एडजस्ट करके आप टैक्स देनदारी कैसे कम कर सकते हैं, एक्सपर्ट्स से समझिए

 हाउस प्रॉपर्टी से होने वाला नुकसान का नियम एडजस्ट करने के लिहाज से ज्यादा उदार है.

हाउस प्रॉपर्टी से होने वाला नुकसान का नियम एडजस्ट करने के लिहाज से ज्यादा उदार है.

इनकम टैक्स को आप कई तरह के कम कर सकते हैं. इसी नियम के तहत घाटे को फायदे के साथ एडजस्ट करने का भी तरीका है. एक बिजनेस या निवेश में हुए घाटे को सेट करके अपनी टैक्स देनदारी कम कर सकते हैं. आइए समझते हैं कैसे...

Income Tax Saving: देश का टैक्स लॉ इनकम टैक्स देने वालों को ऐसे बहुत सारे रास्ते या सुविधाएं देता है जिससे आप अपनी टैक्स देनदारी कम कर सकते हैं. इसी में से एक बिजनेस या निवेश में हुए घाटे को सेट करके अपनी टैक्स देनदारी कम करने का है. इनकम टैक्स एक्ट के तहत, टैक्सपेयर्स द्वारा अर्जित आय को पांच प्रमुख कैटेगरी के अन्दर रखा गया है. जिसमें सैलरी, हाउस प्रॉपर्टी, कैपिटल गेन्स, बिजनेस या प्रोफशनल और दूसरे अन्य सोर्स प्रमुख हैं.

घाटे को एडजस्ट करके अपनी टैक्स देनदारी कैसे कम करें ये समझने के लिए यहां हम लॉस एडजस्टमेंट के दो मैकेनिज्म को समझते हैं. एक है इंट्रा हेड और दूसरा इंटर हेड. टैक्सपेयर्स को एक खास हेड के अन्दर एक आय के सोर्स से हुए घाटे को उसी हेड के अन्दर आने वाले दूसरे आय के सोर्स से हुए घाटे को एडजस्ट किया जा सकता है. उदाहरण के लिए आप X बिजनेस से हुए घाटे को  Y बिजनेस से हुए प्रॉफिट से एडजस्ट कर सकते हैं.

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कैसे एडजस्ट होता है घाटा
दूसरी तरफ, इंटर हेड एडजस्टमेंट में टैक्सपेयर को एक हेड के आय सोर्स से होने वाले घाटे को दूसरे हेड के अन्दर होने वाले आय के साथ एडजस्ट किया जा सकता है. जैसे मान लीजिए हाउस प्रॉपर्टी हेड को सैलरी इनकम के साथ एडजस्ट कर सकते हैं. टैक्स एक्सपर्ट्स कहते हैं कि टैक्सपेयर्स को इंटरहेड एडजस्टमेंट के पहले इंट्रा हेड एडजस्टमेंट करना चाहिए.

कैपिटल लॉस
कैपिटल लॉस को आप किसी दूसरे हेड के अन्दर आने वाली आय से एडजस्ट नहीं कर सकते हैं. मतलब कैपिटल लॉस को आप सिर्फ कैपिटल गेन्स के साथ एडजस्ट कर सकते हैं. साथ ही लॉन्ग टर्म कैपिटल लॉस को आप लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स के साथ एडजस्ट कर सकते हैं. वहीं,शार्ट टर्म कैपिटल लॉस को आप दोनों लॉन्ग टर्म और शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स के साथ एडजस्ट कर सकते हैं.

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हाउस प्रॉपर्टी
हाउस प्रॉपर्टी से होने वाला नुकसान का नियम एडजस्ट करने के लिहाज से ज्यादा उदार है. इसे किसी अन्य मद से आय के साथ एडजस्ट जा सकता है, लेकिन किसी विशेष साल में  केवल ₹2 लाख की सीमा तक. अगर समय सीमा तक आयकर रिटर्न दाखिल नहीं किया जाता है तो भी करदाता अगले आठ वर्षों तक इसको एडजस्ट कर सकता है. हालांकि, बाद के वर्षों में, इसे केवल गृह संपत्ति से होने वाली आय से ही समायोजित किया जा सकता है. ये नियम कॉमर्शियल प्रॉपर्टी पर भी लागू होंगे.

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