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चीन को लगेगा तगड़ा झटका! 2021 में बढ़ सकती है डिफॉल्ट कंपनियों की संख्या, निवेशकों की भी बढ़ेगी चिंता

दिग्गज कंपनियों के डिफॉल्ट होने के कारण चीन की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा जोखिम
दिग्गज कंपनियों के डिफॉल्ट होने के कारण चीन की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा जोखिम

मंडे रिपोर्ट में छपी एक खबर में रिसर्च फर्म क्रेडिट साइट के मुताबिक, चीन (China) में 2021 में डिफॉल्ट कंपनियों की संख्या बढ़ सकती है. हो सकता है कि निवेशक इन कंपनियों में पैसा निवेश करने से पीछे हट जाएं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 27, 2020, 4:14 PM IST
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नई दिल्ली. चीन (China) में राज्य के स्वामित्व वाली कई कंपनियां (SOEs) बॉन्ड भरने और कर्ज चुकाने में नाकामयाब रही हैं. इसमें खनन कंपनी यॉन्गचेंग कोल एंड इलेक्ट्रिसिटी, चिपमेकर कंपनी शिंगुआ यूनीग्रुप और हुआचेन ऑटोमेटिव ग्रुप के साथ और भी बड़ी कंपनियां शामिल हैं. इन कंपनियों के डिफॉल्ट (Default) होने के कारण कई बैंक (Bank) और निवेशकों (Investors) को चिंता सता रही है. मंडे रिपोर्ट में छपी एक खबर में रिसर्च फर्म क्रेडिट साइट के मुताबिक, इस समस्या के चलते अन्य बाजार सहभागियों को विश्वास में लिया गया है. गौरतलब है कि निवेशक सरकार द्वारा समर्थित इन कंपनियों में सुरक्षा महसूस कर पैसा निवेश करते हैं.

अन्य कंपनियों को मिल सकता है फायदा
अब इन कंपनियों से जुड़े निवेशक आगामी वर्ष 2021 के लिए चितिंत हो रहे हैं. क्योंकि ऐसा माना जा रहा है कि डिफॉल्ट कंपनियों की हालात साल 2021 में सुधरते नहीं दिख रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इन कंपनियों के डिफॉल्ट से मार्किट में अन्य छोटी-बड़ी कंपनियों के लिए एक अच्छी बात हो सकती है क्योंकि योंगचेंग कोल एंड इलेक्ट्रिसिटी के डिफॉल्ट ने कई निवेशकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है. इसलिए हो सकता है कि निवेशक इन कंपनियों में अब पैसा निवेश करने से पीछे हट जाएंगे.

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इन तीन कारणों से हुई ये समस्या


वहीं, पीपुल बैंक ऑफ चाइना ने अपनी रिपोर्ट में चेताया है कि दिग्गज कंपनियों के डिफॉल्ट के कारण पूरे देश की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा जोखिम पैदा हो सकता है. पीबीसी ने इन कंपनियों के डिफॉल्ट होने के तीन कारण बताए हैं. इसमें पहला कर्ज चुकाने के लिए उधारी पर निर्भर होना. दूसरा कॉरपोरेट प्रशासन के मुद्दे जैसे कि कंपनियों के एक समूह में उधार लेने की एक कठोर श्रृंखला और इंटर-ग्रुप का गुपचुप रूप से ट्रांजेक्शन करना, तीसरा विभिन्न इंडस्ट्री और क्षेत्रों में तेजी से विस्तार करना जो कंपनियों की लोन चुकाने की क्षमता को कमजोर करती है.

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साल 2021 में भी नहीं कोई उम्मीद
रेटिंग एजेंसी फिच ने अपनी पिछले हफ्ते की रिपोर्ट में कहा था कि राज्य के स्वामित्व वाली इन डिफॉल्ट कंपनियों (SOEs) की संख्या साल 2021 में और भी ज्यादा बढ़ सकती है. एजेंसी ने आगे बताया था कि चीन के सेंट्रल बैंक ने इन कंपनियों को फंडिंग के लिए एक तटस्थ रुख अपनाया लिया है. इसका एक कारण यह भी है कि कोरोना वायरस के कारण अर्थव्यवस्था पहले से ही कमजोर है. एजेंसी के मुताबिक, साल 2021 में सरकार फंडिंग को लेकर और भी सख्त हो सकती है जिससे निवेशक की चिंता और भी बढ़ सकती है. वहीं, एसओई कंपनियों का डिफॉल्ट जोखिम निजी कंपनियों की तुलना में कम है. एजेंसी ने बताया कि 20 निजी कंपनियां ने इस साल जनवरी से अक्टूबर तक अपने ऑनशोर बॉन्ड में बड़ी चूक की है जो पांच एसओई कंपनियों की तुलना में बहुत ज्यादा है.
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