Google के दो दशक पुराने इस केस में फैसला सुनाएंगे भारतीय मूल के अमित मेहता, जानिए इसके बारे में

न्यायाधीश अमित मेहता
न्यायाधीश अमित मेहता

न्यायाधीश अमित मेहता को 22 दिसंबर 2014 को कोलंबिया जिले के लिए अमेरिका के जिला न्यायालय (American District Court) में नियुक्त किया गया था. गूगल के खिलाफ अमेरिकी सरकार का यह केस तकनीकी क्षेत्र में सबसे आक्रामक और विरोधी केस साबित हुआ है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 22, 2020, 5:57 PM IST
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नई दिल्ली. अमेरिका (America) में भारतीय मूल के जिला न्यायाधीश अमित मेहता (Amit Mehta) को गूगल कंपनी (Google) के खिलाफ न्याय विभाग का ऐतिहासिक अविश्वास उल्लंघन (Antitrust Lawsuit) का मुकदमा सौंपा गया. यह मुकदमा दो दशक से भी अधिक पुराना है. यह तकनीकी क्षेत्र में अमेरिका सरकार का सबसे आक्रामक और विरोधी केस साबित हुआ है. न्यायाधीश मेहता को 22 दिसंबर 2014 को कोलंबिया जिले (Colombia Disitrict) के लिए अमेरिका के जिला न्यायालय (American District Court) में नियुक्त किया गया था.

सुप्रीम कोर्ट में भी नहीं निकला कोई हल
गौरतलब है कि अमिता मेहता ने हाल ही में फैसला सुनाया था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) अपनी अकाउंट फर्म से वित्तीय रिकॉर्ड मांग करने वाली एक सदन समिति से एक उप-व्यक्ति को ब्लॉक नहीं कर सकते. वहीं, अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में जाने के बाद भी इस मामले का कोई हल नहीं निकल पाया है.

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गूगल के खिलाफ 64 पन्नों की फाइल


बता दें कि 64 पन्नों की इस शिकायत में अमेरिकी न्याय विभाग और 11 राज्यों ने गूगल कंपनी को अविश्वास उल्लंघन मामले में 20 अक्टूबर को केस दर्ज कराया था. इसमें गूगल कंपनी पर वैश्विक स्तर पर विज्ञापन और ऑनलाइन सर्च में अपना प्रभुत्व बनाए रखने का आरोप लगाया गया है. साथ ही दुनियाभर के यूजर्स को नुकसान पहुंचाने के लिए तरह-तरह के विज्ञापन करने और मार्किट से प्रतिस्पर्धा को खत्म करने का भी आरोप लगा है.

गूगल ने जारी किया बयान
वहीं, गूगल कंपनी की ओर से ट्विटर पर जारी बयान में कहा गया है कि न्याय विभाग द्वारा थोपा गया यह मुकदमा न्यायपूर्ण नहीं है, यूजर्स गूगल को चुनते हैं इसलिए वे उसका इस्तेमाल करते हैं, वे इसका उपयोग करने के लिए मजबूर नहीं किए जाते क्योंकि उनके पास कोई और विकल्प भी नहीं है.

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कौन हैं अमित मेहता
अमित मेहता की बात करें तो बता दें कि उन्होंने साल 1993 में जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी से स्नातक किया है. इसके बाद उन्होंने वर्जीनिया यूनिवर्सिटी में स्कूल ऑफ लॉ में कानून की पढ़ाई की. उन्होंने सैन फ्रांसिस्को की एक कानूनी फर्म से अपने करियर की शुरुआत की थी. वहीं, वह सर्किट कोर्ट में बतौर क्लर्क भी काम कर चुके हैं.
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