....तो क्या चीन के इस प्रोडक्ट को इस्तेमाल करना भारतीयों की मजबूरी है? जानिए राज़ की बात

....तो क्या चीन के इस प्रोडक्ट को इस्तेमाल करना भारतीयों की मजबूरी है? जानिए राज़ की बात
....तो क्या चीन के इस प्रोडक्ट को इस्तेमाल करना भारतीयों की है मजबूरी?

भारत और चीन के बीच छिड़े विवाद के बाद भारतीयों ने चीनी सामान का बहिष्कार (boycott chinese products) शुरू कर दिया है. अब भारत चीन से अपनी आयात निर्भरता कम करने तैयारी कर रहा है. लेकिन भारत को बैंकिंग और पेमेंट्स सेक्टर से जुड़ी इस चीज के लिए चीन पर ही निर्भर रहना होगा. आइए बताते हैं क्या है ये चीज..

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नई दिल्ली. भारत और चीन के बीच छिड़े विवाद के बाद भारतीयों ने चीनी सामान का बहिष्कार (boycott chinese products) शुरू कर दिया है. अब भारत चीन से अपनी आयात निर्भरता कम करने तैयारी कर रहा है. लेकिन भारत को बैंकिंग और पेमेंट्स सेक्टर से जुड़ी इस चीज के लिए चीन पर ही निर्भर रहना होगा. ये चीज है पेमेंट टर्मिनल यानी पॉइंट ऑफ सेल (पीओएस) मशीन है. Point Of Sale के लिए चीन पर निर्भर रहने की वजह यह है कि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसका किफायती विकल्प मौजूद नहीं है. देश में डिजिटल पेमेंट की मांग लगातार बढ़ रही है और मॉल तथा रिटेल स्टोरों में क्रेडिट और डेबिट कार्ड (Debit-Credit Card Transaction) से लेनदेन के लिए इन स्वाइप मशीनों की भूमिका बढ़ गई है.

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सरकार ने चीन से आयात कम करने की पहल की है जिसके बाद पेमेंट्स प्रोवाइडर चीन में बने पीओएस का विकल्प खोज रहे हैं. लेकिन इंडस्ट्री के सूत्रों ने ET को बताया कि कीमत और लीगेसी चुनौतियों के कारण तुरंत किसी विकल्प को अपनाना मुश्किल होगा.



चीन में होती है POS मशीन की मैन्युफैक्चरिंग इसलिए वहां से मिलती है सस्ती
ET में छपी खबर के मुताबिक इन कंपनियों की चीन में निर्माण इकाई है. इनकी कुछ इकाइयां ताइवान और दक्षिण कोरिया में भी है. ताइवान, दक्षिण कोरिया और वियतनाम भी इन मशीनों का निर्यात करते हैं लेकिन उनकी कीमत चीन की तुलना में कम से कम 20 से 30 फीसदी अधिक है. इसकी वजह यह है कि इन देशों में उत्पादन कम है.

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अब गांवों और शहरों में जरूरी हो गयी है पीओएस मशीन
डिजिटल इंडिया पहल के तहत गांवों और कस्बों में बड़े पैमाने पर पीओएस की इस्तेमाल हो रहा है. आरबीआई ने ग्रामीण इलाकों में पीओएस को बढ़ावा देने के लिए मई में 250 करोड़ रुपए का प्रावधान किया था. इसमें खासतौर पर पूर्वोत्तर के राज्यों में इनका इस्तेमाल बढ़ाने पर जोर दिया गया है. अभी देश में 95 फीसदी से अधिक पीओएस चीन से आयात होते हैं.
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