Cairn Energy को 1.2 अरब डॉलर लौटाने के फैसले को भारत की चुनौती, कहा- टैक्स विवाद में मध्यस्थता स्वीकार नहीं

अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत में पिछले साल दिसंबर में केयर्न के पक्ष में फैसला आया

अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत में पिछले साल दिसंबर में केयर्न के पक्ष में फैसला आया

Cairn Energy Dispute: वित्त मंत्रालय ने कहा कि सरकार ने 22 मार्च को मध्यस्थता फैसले को हेग स्थित शीर्ष मध्यस्थता अदालत में चुनौती दी है.

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नई दिल्ली. भारत ने ब्रिटेन की कंपनी केयर्न एनर्जी पीएलसी (Cairn Energy Plc) को 1.2 अरब डॉलर लौटाने के अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण (International Arbitration Tribunal) के फैसले को चुनौती दी है. सरकार ने कहा है कि उसने 'राष्ट्रीय टैक्स विवाद' में कभी अंतराष्ट्रीय मध्यस्थता को स्वीकार नहीं किया है.

वित्त मंत्रालय ने उन रिपोर्टों को भी खारिज किया है जिसमें कहा गया कि कंपनी की ओर से विदेशों में भारत की सरकारी संपत्ति कुर्क कराने की कार्रवाई की आशंका से सरकारी बैंकों को विदेशों में अपने विदेशी मुद्रा खातों (Foreign Currency Accounts) से धन निकाल लेने को कहा गया है.

भारत का आरोप- न्यायाधिकरण ने अधिकार क्षेत्र का अनुचित प्रयोग किया

सरकार ने हालांकि तीन सदस्यीय मध्यस्थता अदालत में अपनी तरफ से न्यायधीश की नियुक्ति की और केर्यन से 10,247 करोड़ रुपये के पुराने टैक्स की वसूली के इस मामले में जारी प्रक्रिया में पूरी तरह भाग लिया. लेकिन मंत्रालय का कहना है कि न्यायाधिकरण ने एक राष्ट्रीय स्तर के टैक्स विवाद मामले में निर्णय देकर अपने अधिकार क्षेत्र का अनुचित प्रयोग किया है. भारत इस तरह के मामलों में कभी भी मध्यस्थता की पेशकश या उस पर सहमति नहीं जताता है.
सरकार ने केयर्न एनर्जी से टैक्स की वसूली के लिए उसकी पूर्व में भारत स्थित इकाई के शेयरों को जब्त किया और फिर उन्हें बेच दिया. लाभांश को भी अपने कब्जे में ले लिया साथ ही टैक्स रिफंड को भी रोक लिया. यह सब केयर्न से उसके द्वारा भारतीय इकाई में किए गए फेरबदल पर कमाए गए मुनाफे पर टैक्स वसूली के लिए किया गया।.सरकार ने 2012 में इस संबंध में एक कानून संशोधन पारित कर पिछली तिथि से टैक्स लगाने का अधिकार हासिल करने के बाद यह कदम उठाया.

पिछले साल दिसंबर में केयर्न के पक्ष में आया था फैसला 

उधर, केयर्न ने भारत-ब्रिटेन द्विपक्षीय निवेश संधि (India-UK Bilateral Investment Treaty) के तहत उपलब्ध प्रावधानों का इस्तेमाल करते हुए मामले को मध्यस्थता अदालत में ले गई. अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत में पिछले साल दिसंबर में केयर्न के पक्ष में फैसला आया जिसमें मध्यस्थता अदालत ने 2012 के कानून संशोधन का इस्तेमाल करते हुए केयर्न पर टैक्स लगाने को अनुचित करार दिया. इसके साथ ही न्यायाधिकरण ने भारत सरकार से केयर्न के शेयरों और लाभांश के जरिए वसूले गए 1.2 अरब डॉलर की राशि उसे लागत और ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया.



वित्त मंत्रालय ने बयान में केयर्न की भारतीय इकाई केयर्न इंडिया को स्थानीय शेयर बाजार में लिस्टेड कराने के लिए 2006 में उसके कारोबार को पुनर्गठित के कदम को अनुचित योजना करार दिया और उसे भारतीय टैक्स कानूनों का बड़ा उल्लंघन बताया. इसकी वजह से केयर्न उसके कथित निवेश के लिये भारत-ब्रिटेन द्विपक्षीय निवेश संधि के तहत सुरक्षा से वंचित हो जाता हे.

वित्त मंत्रालय ने इसके साथ ही कहा कि सरकार ने 22 मार्च को मध्यस्थता फैसले को हेग स्थित शीर्ष मध्यस्थता अदालत में चुनौती दी है. वहीं, भारत सरकार के इस राशि का भुगतान करने से इनकार करने पर केयर्न ने फैसले को लेकर अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और सिंगापुर सहित छह देशों में मामला दर्ज किया है और सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियों से राशि वसूलने की प्रक्रिया शुरू की है.

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