चीन को सबक सिखाने के लिए अब इन सेक्टर्स ने कैट का दिया साथ, भारत में चीनी सामानों के बहिष्कार अभियान को मिली मजबूती

चीन को सबक सिखाने के लिए अब इन सेक्टर्स ने कैट का दिया साथ, भारत में चीनी सामानों के बहिष्कार अभियान को मिली मजबूती
आत्मनिर्भर बनने के लिए जिलों में स्थापित करने होंगे उद्योग

कैट आक्रामक रूप से एक तरफ चीनी उत्पादों के बहिष्कार और दूसरी तरफ 'आत्मनिर्भर भारत' बनाने के लिए भारतीय सामानों के उत्पादन को प्रोत्साहित करने और देश के उपभोक्ताओं को चीनी सामानों के बजाय भारतीय सामानों का उपयोग करने के लिए जागरूकता अभियान चला रहा है.

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नई दिल्ली. ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के परिसंघ ने अपने प्रमुख कार्यक्रम 'भारतीय सामान-हमारा अभिमान' (Bhartiya Saamaan-Hamara Abhiman) के तहत 'बॉयकॉट चाइनीज प्रोडक्ट्स' (Boycott Chinese Products) के अभियान को मजबूत करने के लिए आज विभिन्न क्षेत्रों के राष्ट्रीय संगठनों को एक साथ लाने के लिए एक नई शुरुआत की है. कैट आक्रामक रूप से एक तरफ चीनी उत्पादों के बहिष्कार और दूसरी तरफ 'आत्मनिर्भर भारत' बनाने के लिए भारतीय सामानों के उत्पादन को प्रोत्साहित करने और देश के उपभोक्ताओं को चीनी सामानों के बजाय भारतीय सामानों का उपयोग करने के लिए जागरूकता अभियान चला रहा है.

इन संगठनों ने मिलाया हाथ
CAIT के साथ हाथ मिलाने वाले महत्वपूर्ण संगठनों में इंडियन सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन, (ICEA) राष्ट्रीय किसान मंच, (RKM) कंज्यूमर ऑनलाइन फाउंडेशन, (COF) ऑल इंडिया ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन (AITWA), इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (ISSME), MSME डेवलपमेंट फोरम (MDF) ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन (AIMRA), ऑल इंडिया कंज्यूमर प्रोडक्ट डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन (AICPDF), ऑल इंडिया कॉस्मेटिक्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (AICMA), नॉर्थ ईस्ट डेवलपमेंट फ़ोरम (NEDF), वूमन एंट्रोपर्स एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया (WEAI) आदि शामिल हैं. इन सभी संगठनों ने अपने स्वयं के क्षेत्रों में एक मंच के रूप में और व्यक्तिगत रूप से चीनी सामानों के बहिष्कार के राष्ट्रीय अभियान का समर्थन करने और नेतृत्व करने का निर्णय लिया है. विभिन्न क्षेत्रों के नेताओं ने सर्वसम्मति से कहा कि चीन को जवाब देने के लिए स्थानीय संसाधनों के विकास को बढ़ावा देने के लिए सभी प्रयास किए जाएंगे. इन नेताओं ने एक स्वर में कहा, हम इसे करने और भारत में इस बदलाव को लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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CAIT के राष्ट्रीय अध्यक्ष  बीसी भरतिया और महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने संयुक्त पहल के गठन की घोषणा करते हुए कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था के विभिन्न सेक्टर्स ने मिलकर यह सुनिश्चित किया है कि भारत चीन पर किसी भी तरह से निर्भर न रहे और प्रतिस्पर्धी मूल्य पर क्वालिटी सामान का उत्पादन में स्वयं निर्भर बने. देश में पर्याप्त भूमि और कामगार संसाधन और प्रौद्योगिकी है, जिसका उपयोग अल्पावधि, मध्यावधि और दीर्घकालिक रणनीतिक नीति के तहत किया जाना चाहिए.



ICEA के अध्यक्ष पंकज मोहिन्द्रू ने कहा भारत ने एक मिथक को तोड़ा है कि मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के लिए चीन पर बहुत अधिक निर्भर करता है. उन्होंने कहा, पिछले 6 वर्षों के दौरान मोबाइल हैंडसेट निर्माण इको-सिस्टम में देखी गई. इस सेक्टर में सेमिनल ग्रोथ लगभग दर्ज की गई है. 2014-19 के दौरान वैल्यू टर्म में 1100% की बढ़ोतरी और 2016-19 के दौरान निर्यात में 3000% की बढ़ोतरी दर्ज की गई. केवल मोबाइल फोन ही नही, यहां तक ​​कि इको-सिस्टम बनाने वाले घटकों ने अच्छा प्रदर्शन किया है. 2014 में मात्र 2 विनिर्माण इकाइयों से, आज इस खंड में 200 से अधिक विनिर्माण इकाइयां चल रही हैं और प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 7 लाख से अधिक रोजगार पैदा कर रही हैं. 2014-15 में कुल घरेलू खपत में इम्पोर्टेड हैंडसेट का योदगान 78 फीसदी था जो 2019-20 में गिरकर 3 फीसदी से कम हो गया. इसी तरह, निकट भविष्य में इलेक्ट्रॉनिक वर्टिकल्स जैसे आईटी हार्डवेयर, कम्पोनेंट्स और इलेक्ट्रॉनिक्स गुड्स का कोर कम्पोनेंट्स, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, फाइबर ऑप्टिक्स, IoT प्रोडक्ट्स आदि  में सफलता दिखेगी.

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भारत भूमि और कृषि संसाधनों से समृद्ध
चीनी उत्पादों के बहिष्कार के आह्वान का समर्थन करते हुए राष्ट्रीय किसान मंच के अध्यक्ष नरेश सिरोही ने आत्मनिर्भर भारत के लिए भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संवर्धित करने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि भारत भूमि और कृषि संसाधनों से समृद्ध है क्योंकि भारत के कुल 32.87 करोड़ हेक्टेयर भौगोलिक में से लगभग 56% भूमि खेती के लिए है जो विश्व में सबसे ज्यादा है. पूरे विश्व में 64 प्रकार की मिट्टी हैं और भारत में 46 प्रकार की मिट्टी है, जबकि दूसरी ओर भारत में बारिश हर साल लगभग 4000 बिलियन क्यूबिक मीटर दर्ज की जाती है और भारत में 445 नदियाँ हैं जिनकी संचयी लंबाई लगभग 2 लाख किलोमीटर है. सभी छह मौसम भारत में मौजूद हैं और इसलिए भारत में अन्य कृषि संसाधन प्रचुर मात्रा में हैं. लेकिन विभिन्न प्रकार के सामानों के उत्पादन के लिए ऐसे संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने की अधिक आवश्यकता है और जिससे चीन पर काफी हद तक निर्भरता कम हो सकती है.

चीन ने फिर दिया धोखा
AITWA अध्यक्ष प्रदीप सिंघल ने कहा कि चीन ने एक बार फिर भारत को धोखा दिया है. चीन न तो एक अच्छा पड़ोसी है और न ही एक अच्छा व्यापारिक देश है. उसने भारतीय आर्थिक प्रणाली में कोरोनो वायरस जैसी एंट्री है. समय आ गया है कि उन्हें हमारे सिस्टम से पूरी तरह से बाहर निकाल दें. इस आंदोलन को ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री का समर्थन मिलेगा और ट्रकों को चलाने में उपयोग किए जाने वाले सभी चीनी घटकों का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है. हम यह सुनिश्चित करेंगे कि ट्रकों के निर्माता भी स्वदेशी स्रोतों से आगे बढ़ें. कंज्यूमर ऑनलाइन फाउंडेशन के फाउंडर बेजोन मिश्रा और भारत में उपभोक्ता आंदोलन के एक अग्रणी नेता ने कहा कि भारतीय उपभोक्ता अब चीनी उत्पादों और सेवाओं की खरीद नहीं करेंगे. वे न केवल सब-स्टैंडर्ड हैं, बल्कि असुरक्षित भी हैं. हम उपभोक्ताओं के रूप में गुणवत्ता वाले उत्पादों और सेवाओं को हमेशा भारतीयों द्वारा निर्मित और वितरित करना चाहते हैं, भले ही ज्यादा कीमत हो. हमें विश्वास है कि हमारा व्यावसायिक समुदाय इसे हमारे द्वारा खड़ा करने के अवसर के रूप में देखेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि उपभोक्ताओं को सभी उत्पादों और सेवाओं तक पहुंच योग्य बनाया जाए जो उच्च गुणवत्ता, सुरक्षित और सस्ती हों. भारतीय उत्पाद और सेवाएं न केवल भारत में बल्कि विश्व स्तर पर भी लोकप्रिय हो जाएंगी.

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जिलों में स्थापित करने होंगे उद्योग
स्वदेशी जागरण मंच के दीपक शर्मा 'प्रदीप' ने कहा कि हमें ग्रामीण विकास और कृषि विकास को एक महत्वपूर्ण कारक के रूप में देखते हुए भारत में उपलब्ध प्रचुर संसाधनों को पहचानना होगा. जिलों के आस-पास के क्षेत्रों में और अधिक उद्योग स्थापित किए जाने चाहिए जो न केवल ग्रामीण रोजगार पैदा करेंगे बल्कि गांवों के विकास में भी बहुत योगदान देंगे. इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर स्माल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज के महासचिव सुनील शर्मा ने कहा कि चीन पर हमारी आयात निर्भरता को कम करने के लिए कुछ छोटी-लंबी योजनाओं को लागू करने की आवश्यकता है. जब तक भारत आत्मनिर्भर नहीं हो जाता है, तब तक हांगकांग, वियतनाम, जापान, कोरिया, मैक्सिको, अमेरिका और कुछ यूरोपीय देशों जैसे देशों को कच्चे माल और कुछ महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक, वाहनों और औषधीय घटकों के लिए वैकल्पिक आयात स्रोतों के रूप में टैप किया जा सकता है. घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने और बिक्री मूल्य को नियंत्रित करने के लिए तैयार माल के आयात पर ज्यादा टैक्स और कच्चे माल पर कम टैक्स लगाया जाना चाहिए. साथ ही, पटाखे जैसे लेबर इन्सेंटिव इंडस्ट्रीज को बढ़ावा देने के लिए मौजूदा जीएसटी दरों को कम किया जाना चाहिए. इसके अलावा, सरकार को सार्वजनिक खरीद (ऑर्डर में मेक इन इंडिया) आदेश, 2017 का उचित कार्यान्वयन सुनिश्चित करना चाहिए.

MSME डेवलपमेंट फोरम के रजनीश गोयनका और ईस्टर्न इंडिया इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट काउंसिल के अध्यक्ष सुभाष अग्रवाल ने कहा कि एक मजबूत और टिकाऊ भारतीय अर्थव्यवस्था बनाने के लिए MSME क्षेत्र को सरकार द्वारा बढ़ावा देना होगा. यह क्षेत्र अकेले रोजगार पैदा कर सकता है और वह भी जिलों और गांवों में.
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