चीन के साथ सीमा पर तनाव के बीच छह महीने के हाई से फिसला रुपया, आम आदमी पर होगा ये असर

चीन के साथ सीमा पर तनाव के बीच छह महीने के हाई से फिसला रुपया, आम आदमी पर होगा ये असर
डॉलर के मुकाबले रुपये में बड़ी गिरावट

फॉरेक्स डीलरों ने कहा कि भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव से निवेशकों की धारणा कमजोर हुई. अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 73.26 प्रति डॉलर पर मजबूती के रुख के साथ खुला. लेकिन बेहद उतार-चढ़ाव भरे कारोबार के बीच अंत में यह 21 पैसे के नुकसान के साथ 73.60 प्रति डॉलर पर बंद हुआ.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 31, 2020, 5:17 PM IST
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नई दिल्ली. पूर्वी लद्दाख में भारत और चीनी सैनिकों के बीच फिर झड़प की खबर है. भारतीय सेना के अनुसार चीनी सैनिकों ने 29-30 अगस्‍त की दरम्‍यानी रात में लद्दाख में स्थित पैंगोंग झील के दक्षिणी छोर में घुसपैठ की कोशिश की. इसके बाद जब भारतीय सैनिकों ने उन्‍हें रोकने का प्रयास किया तो वह मानने को तैयार नहीं हुए. ऐसे में एक बार फिर दोनों देशों के सैनिकों के बीच झड़प हुई है. सीमा पर जारी तनाव के बीच सोमवार को डॉलर (Dollar) के मुकाबले रुपये में तेज गिरावट देखने को मिली. रुपया (Rupee) 21 पैसे के नुकसान के साथ 73.60 प्रति डॉलर पर बंद हुआ. इससे पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 73.40 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था.

बता दें कि शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले रुपया पिछले 6 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था. विदेशी निवेशकों द्वारा घरेलू इक्विटी मार्केट (Equity Market) में इनफ्लो बढ़ाने के बाद रुपये में तीन सत्रों से लगातार तेजी देखने को मिली थी. पिछले सत्र में डॉलर के मुकाबले रुपये में 73.28 का स्तर भी देख गया, जोकि 5 मार्च के बाद का उच्चतम स्तर है.

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रुपये में डॉलर के मुकाबले दिन के कारोबार में हुई उठापटक
फॉरेक्स डीलरों ने कहा कि भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव से निवेशकों की धारणा कमजोर हुई. अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 73.26 प्रति डॉलर पर मजबूती के रुख के साथ खुला. लेकिन बेहद उतार-चढ़ाव भरे कारोबार के बीच अंत में यह 21 पैसे के नुकसान के साथ 73.60 प्रति डॉलर पर बंद हुआ. कारोबार के दौरान रुपये ने 73.25 प्रति डॉलर का उच्च स्तर तथा 73.80 प्रति डॉलर का निचला स्तर भी छुआ.

रुपये में गिरावट का भारतीयों पर होगा सीधा असर
रुपये में गिरावट का सीधा असर देश की अर्थव्‍यवस्‍था पर पड़ता है. इससे आम आदमी की मुश्किलें भी बढ़ जाती हैं. दरअसल, भारत अपनी मांग का 80 फीसदी क्रूड ऑयल आयात करता है. वहीं, रोजमर्रा के जीवन में इस्‍तेमाल होने वाली काफी चीजें आयात की जाती हैं. ऐसे में अगर रुपया डॉलर के मुकाबले गिरता है तो आयात महंगा साबित होता है. इससे सरकार को विदेश से सामान मंगाने पर ज्यादा खर्च करना पड़ता है. वहीं, कच्चा तेल महंगा होने से पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ जाते हैं और देश के भीतर सामान के ट्रांसपोर्टेशन का खर्चा भी बढ़ जाता है. इसका असर बाजार में जरूरी सामानों की बढ़ती कीमतों यानी महंगाई के तौर पर नजर आता है.
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