वैश्विक मैन्युफैक्चरर्स को लुभाने के लिए 1.68 लाख करोड़ रुपये के पैकेज पर काम कर रही सरकार

वैश्विक मैन्युफैक्चरर्स को लुभाने के लिए 1.68 लाख करोड़ रुपये के पैकेज पर काम कर रही सरकार
जल्द ही कैबिनेट से मंजूरी ली जाएगी.

केंद्र सरकार ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स, सोलर पैनल मेकर्स और स्टील से लेकर कंज्यूमर अप्लाएंसेज कंपनियों को पीएलआई योजना पर काम कर रही है. इस प्लान के लिए टेक्सटाइल यूनिट्स, फूड प्रोसेसिंग प्लांट्स और विशेष फार्मा कंपनियों को भी शामिल किया जा सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 10, 2020, 10:52 PM IST
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नई दिल्ली. भारत अब 1.68 लाख करोड़ रुपये के इनसेन्टिव्स पर काम कर रहा है ताकि ​कंपनियां मैन्युफैक्चरिंग यूनिट सेटअप कर सकें. एक मीडिया रिपोर्ट में इस बारे में जानकारी दी गई है. मोदी सरकार ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स, सोलर पैनल मेकर्स और कंज्यूमर अप्लायंस कंपनियों को प्रोडक्शन लिंक्ड इन्सेन्टिव्स ऑफर करेगी. इस प्लान के लिए टेक्सटाइल यूनिट्स, फूड प्रोसेसिंग प्लांट्स और कुछ खास फार्मा प्रोडक्ट्स मेकर्स पर भी विचार किया जा रहा है.

इस साल की शुरुआत में ही सरकार ने पीएलआई स्कीम का ऐलान किया था. हालांकि, पीएलआई स्कीम पर अभी भी काम कर रही है. सैमसंग इले​क्ट्रॉनिक्स, फॉक्सकॉन और विस्ट्रॉन कॉरपोरेशन ने भारत में 1.5 अरब डॉलर निवेश के जरिए मोबाइल फोन फैक्ट्रीज बनाने का ऐलान किया है. सरकार ने इस बारे में जानकारी दी है.

नियमों में ढील के बाद भी नहीं हो रहा भारत को लाभ
चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में आर्थिक विकास दर 23.9 फीसदी तक लुढ़कने के बाद केंद्र सरकार निवेश बढ़ाने की कई योजनाओं पर काम कर रही है. भारत में पहले ही अन्य ​एशियाई देशों की तुलना में कॉरपोरेटे टैक्स बेहद कम है. वहीं, कारोबारी सहूलियत को देखते हुए इन्सॉल्वेंसी नियमों में ढील दी गई है. ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन से निकलने वाली कंपनियां भारत में अपने ​​कारोबार के​ विस्तार पर कोई खास ध्यान नहीं दे रही है.
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चीन से निकलने वाली कंपनियां अभी भी वियतनाम में अपने कारोबारी विस्तार के लिए आकर्षित हो रहीं है. वियतनाम के बाद इन कंपनियों के लिए कम्बोडिया, म्यांमार, बांग्लादेश और थाईलैंड.



विशेष मैन्युफैक्चरिंग प्रोग्राम पर भी काम कर रही है सरकार
अन्य सेक्टर्स के लिए सरकार चरणबद्ध तरीके से मैन्युफैक्चरिंग प्रोग्राम पर भी काम कर रही है. इसके तहत कंपनियों को लोकल वैल्यू एडिशन में भी मदद मिलेगी. फिलहाल यह प्रोग्राम मोबाइल फोन्स के कंपोनेन्ट्स और एक्सेसरीज के लिये है. अब इसे फर्नीचर, प्लास्टिक्स, खिलौने और अन्य कंज्यूमर ड्यूरेबल्स के लिए भी बढ़ाया जाएगा. वर्तमान में इसमें अधिकतर आइटम्स को चीन से आयात किया जाता है.

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इन दोनों प्रोग्राम पर केंद्र सरकार काम कर रही है और बहुत जल्द ही इसके लिए कैबिनेट से मंजूरी प्राप्त की जाएगी. बता दें कि 31 मार्च को खत्म हुये वित्त वर्ष में चीन से 65 अरब डॉलर का सामान भारत में आयात किया गया है. इसकी दूसरी तरफ भारत से पड़ोसी देश में 17 अरब डॉलर की वस्तुओं का ही निर्यात किया गया है.
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