Moody's ने घटाया भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान, FY2022 में 9.3 फीसदी रह सकती है आर्थिक वृद्धि की रफ्तार

सरकारी घाटा GDP का 11.8 फीसदी रहने का अनुमान जताया है.

सरकारी घाटा GDP का 11.8 फीसदी रहने का अनुमान जताया है.

कमजोर इकोनॉमिक ग्रोथ की सबसे अहम वजह कर्ज का बोझ और कमजोर फाइनेंशियल सिस्टम है. वहीं, मूडीज ने हालिया कटौती इसलिए की है क्योंकि पूरा देश कोरोना वायरस संक्रमण की मुश्किल से जूझ रहा है. कोरोना वायरस की दूसरी लहर से देश की स्‍वास्‍थ्‍य व्यवस्था लाचार हो गई है.

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नई दिल्ली. रेटिंग एजेंसी मूडीज (Moody's) ने कुछ समय पहले भारत की जीडीपी ग्रोथ (GDP Growth) के 13.7 प्रतिशत रहने का आकलन किया था. अब मूडीज ने वित्‍त वर्ष 2021-22 में भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान घटा दिया है. मूडीज ने अब इसे 9.3 फीसदी कर दिया है. मूडीज ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि निकट भविष्य में इसमें बदलाव की कोई संभावना नहीं है. रेटिंग एजेंसी का मानना है कि हाल के वर्षों में इकोनॉमी की ग्रोथ कमजोर रहेगी, जिससे भारत की ग्रोथ की गुणवत्ता में भी गिरावट आएगी. मूडीज ने यह भी कहा है कि इकोनॉमिक ग्रोथ की मुश्किलों की वजह से भारत की क्रेडिट प्रोफाइल पर लगातार दबाव बना हुआ है.


ये रही अनुमान घटाने की बड़ी वजह

कमजोर इकोनॉमिक ग्रोथ की सबसे अहम वजह कर्ज का बोझ और कमजोर फाइनेंशियल सिस्टम है. मूडीज ने कहा कि भारत के पॉलिसीमेकर्स इस मुश्किल से निकलने की कोशिश में लगे हैं. मूडीज ने हालिया कटौती इसलिए की है क्योंकि पूरा देश कोरोना वायरस संक्रमण की मुश्किल से जूझ रहा है. कोरोना वायरस की दूसरी लहर से देश की स्‍वास्‍‍‍‍थ्‍य व्यवस्था लाचार हो गई है. देश में पिछले 17 दिनों से लगातार हर दिनलाख के आसपास संक्रमण के नए मामले सामने रहे हैं. 


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सरकारी कर्ज का बोझ GDP का 90 फीसदी रह सकता है

मूडीज ने फिस्कल ईयर 2023 के लिए ग्रोथ का पूर्वानुमान बढ़ाकर 7.9 फीसदी कर दिया है, जबकि पहले 6.2 फीसदी रहने का अनुमान जताया था. लॉन्ग टर्म रियल जीडीपी ग्रोथ 6 फीसदी रह सकती है. सुस्त ग्रोथ और महंगाई दर बढ़ने के कारण मूडीज ने अनुमान जताया है कि फिस्कल ईयर 2022 में सरकारी कर्ज का बोझ जीडीपी का 90 फीसदी रह सकता है. फिस्कल ईयर 2023 में यह 90.8 फीसदी रह सकता है.


सरकारी घाटा GDP का 11.8 फीसदी रहने का अनुमान



फिस्कल ईयर 2022 में सरकारी घाटा जीडीपी का 11.8 फीसदी रहने का अनुमान जताया है. पहले इसके 10.8 फीसदी रहने का अनुमान था. फिस्कल ईयर 2022 में महंगाई दर 4.8 फीसदी रहने का अनुमान जताया था. वहीं, फिस्कल ईयर 2023 में यह 4 फीसदी रह सकती है.

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