क्या अगले साल 5% GDP हासिल करने की हालत में है भारतीय अर्थव्यवस्था?

क्या अगले साल 5% GDP हासिल करने की हालत में है भारतीय अर्थव्यवस्था?
न्यूज18 क्रिएटिव

सरकार ने मंगलवार को 2019-20 के लिए पहला एडवांस इस्टिमेट जारी किया, जहां जीडीपी की वृद्धि 5 प्रतिशत थी. इसका मतलब है कि 2008-09 के संकट के बाद से भारतीय अर्थव्यवस्था सबसे धीमी गति से बढ़ रही है. हालांकि, पूरे वर्ष के लिए 5 प्रतिशत की दर से, अनुमान अक्टूबर 2019-मार्च 2020 की अवधि में बहुत कम रिवकरी है क्योंकि पहले छह महीनों में वृद्धि 4.8 प्रतिशत औसत थी.

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  • Last Updated: January 9, 2020, 10:55 AM IST
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सिंधु भट्टाचार्य

नई दिल्ली. भारत गहरी आर्थिक सुस्ती की चपेट में है और जब तक सरकार नए राजकोषीय प्रोत्साहन सहित विकास को बढ़ावा देने के लिए और कदम नहीं उठाती, तब तक अर्थव्यवस्था के अगले वित्तीय वर्ष में भी धीमी गति से चलती रहने की संभावना है.

सरकार ने मंगलवार को 2019-20 के लिए पहला एडवांस इस्टिमेट जारी किया, जहां जीडीपी की वृद्धि 5 प्रतिशत थी. इसका मतलब है कि 2008-09 के संकट के बाद से भारतीय अर्थव्यवस्था सबसे धीमी गति से बढ़ रही है. हालांकि, पूरे वर्ष के लिए 5 प्रतिशत की दर से, अनुमान अक्टूबर 2019-मार्च 2020 की अवधि में बहुत कम रिवकरी है क्योंकि पहले छह महीनों में वृद्धि 4.8 प्रतिशत औसत थी.



यह अनुमान केवल 12 महीनों के भीतर अर्थव्यवस्था में मंदी की सीमा को दर्शाता है, क्योंकि 2018-19 में जीडीपी विकास दर 6.8 प्रतिशत थी.
यह बात दीगर है कि वित्तीय वर्ष 2015 के लिए विकास का अनुमान पिछले साल के आर्थिक सर्वेक्षण में दिए गए अनुमान से कम है (इसमें 7 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया गया था) और उस अनुमान से भी कम है जिसका दावा भारतीय रिजर्व बैंक ने किया था. (आरबीआई ने 7.4 प्रतिशत की वृद्धि का  पूर्वानुमान लगाया था बाद में कम करके 5 प्रतिशत तक कर दिया गया.)

वास्तविक विकास के लिए यह 5% संख्या भी कितनी करीब?
अब यह देखना होगा कि वास्तविक विकास के लिए यह 5% संख्या भी कितनी करीब है. पिछले पांच वित्तीय वर्षों में कम से कम दो में, बजट से पहले सरकार द्वारा पेश किए गए एडवांस जीडीपी रेट के अनुमान को कम किया आंका गया था. एक अर्थशास्त्री ने 5 प्रतिशत विकास संख्या को सरकार का 'पहला अनुमान' कहा.

इसकी मंदी में क्या भूमिका है? भारत के कारखाने बेकार बैठे हैं. केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) ने इस वित्तीय वर्ष में विनिर्माण विकास दर महज 2 फीसदी के हिसाब से दर्ज की है, जो कि एक साल पहले की अवधि में 6.2 फीसदी थी. यह बात सार्वजनिक है कि विनिर्माण धीमा रहा है लेकिन मंदी की मात्रा चौंकाने वाली है.

कैपिसिटी यूटिलाइजेशन घटकर 68.9 प्रतिशत रह गया
इस महीने की शुरुआत में आरबीआई के नीतिगत बयान में कहा गया था कि जुलाई-सितंबर की तिमाही में कैपिसिटी यूटिलाइजेशन घटकर 68.9 प्रतिशत रह गया, जो इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 73.6 प्रतिशत था. दूसरे शब्दों में, भारत की फैक्ट्री की लगभग एक तिहाई क्षमता सितंबर तिमाही में निष्क्रिय रही, अप्रैल-जून की अवधि में लगभग चौथे से खपत में कमी के कारण संयंत्रों में क्षमता का कम उपयोग हुआ.

अगले वित्त वर्ष में 8.7 प्रतिशत के मुकाबले इस वित्त वर्ष में महज 3.2 प्रतिशत की दर से विकास करने के अनुमान के साथ निर्माण क्षेत्र बड़े स्तर पर पिछड़ता दिख रहा है और कृषि क्षेत्र बहुत बेहतर नहीं है, जिसमें वृद्धि 2.8 प्रतिशत होने की उम्मीद है, जो पिछले वित्त वर्ष के बराबर ही है.

क्या सरकार विकास को प्रोत्साहित करने के लिए और अधिक कर सकती है? राजस्व में गंभीर कमी का सामना कर रही सरकार ने पहले ही सभी विभागों और मंत्रालयों को वित्तीय वर्ष की अंतिम तिमाही के लिए खर्च घटाने के लिए कहा है. राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग के पूर्व अध्यक्ष सुदीप्तो मुंडले ने कहा कि भारत के विकास दर को चोट पहुंचाने वाले बड़े झटकों में से एक सार्वजनिक व्यय में कमी है.

उन्होंने सरकार को खर्च पर अंकुश लगाने की सलाह दी और इसके बजाय सुझाव दिया कि टैक्स कलेक्शन में खामियों को ठीक किया जाए और समग्र विकास को बनाए रखने के लिए छूट दी जाए.

अगले साल भी जीडीपी की वृद्धि दर कम रहेगी!
मुंडले ने CNBC-TV18 को यह भी बताया कि अगले साल भी जीडीपी की वृद्धि दर कम रहेगी. उन्होंने कहा, 'अगले साल कम वृद्धि दर हो सकती है. मैं कहूंगा कि अगर हम 5 फीसदी विकास दर हासिल करेंगे तो हम भाग्यशाली होंगे.'

ब्रोकरेज एडलवाइस के विश्लेषक मुंडले की गंभीर भविष्यवाणी से सहमत हैं. कई ऐसे संकेत हैं जिनसे पता चलता है कि आर्थिक बहाव बहुत लंबे समय तक चला. क्रेडिट ग्रोथ को बढ़ाना, कॉरपोरेट रिटर्न ऑन इक्विटीज और एग्रीगेट टैक्स रेवेन्यू मल्टी-दशक के चढ़ाव पर हैं. इस दशक में निर्यात और ग्रामीण मजदूरी वृद्धि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है. ये संकेतक अर्थव्यवस्था में मांग की कमजोरी दिखाते हैं, जबकि दुर्भाग्य से सरकार द्वारा घोषित सभी डेवलपमेंट मेजर्स सप्लाई साइड के लिए है.'

विश्लेषकों ने बताया कि सरकार का कुल  टैक्स रेवेन्यू इस दशक में सबसे कम है. कैपिटल साइकिल साल 2012 में सर्वोच्च पर था और वित्तीय वर्ष 2011 और वित्तीय वर्ष 2020 के बीच निर्यात की वार्षिक औसत वृद्धि दर लगभग 3 प्रतिशत रही है.

तो क्या सरकार आगामी केंद्रीय बजट में नए वित्तीय प्रोत्साहन की घोषणा करेगी? आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं लेकिन इनमें से अधिकतर सप्लाई साइड में हैं और इससे बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ा. विशेषज्ञों का कहना है कि किसी तरह का राजकोषीय प्रोत्साहन जरूरत है.

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