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ग्लोबल इकॉनमी में होगा भारत का दबदबा, 25 फीसदी हिस्से को करेगा नियंत्रित, बोले करण अडानी

करण अडानी ने कहा है कि ग्लोबल इकॉनमी में भारत का दबदबा होगा और यह 25 फीसदी हिस्से को नियंत्रित करेगा.

करण अडानी ने कहा है कि ग्लोबल इकॉनमी में भारत का दबदबा होगा और यह 25 फीसदी हिस्से को नियंत्रित करेगा.

मौजूदा समय में भारत जिस तरह से विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है और दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को चुनौती दे रहा है, उसे देखते हुए अडानी पोर्ट्स एवं सेज के सीईओ करण अडानी ने कहा है कि भारत विश्व की एक चौथाई अर्थव्यवस्था को नियंत्रित करने के युग में वापस आ रहा है.

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नई दिल्ली. एक वक्त था जब आर्थिक रूप से समृद्ध होने की वजह से भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था. उस समय दुनिया की एक चौथाई अर्थव्यवस्था को भारत नियंत्रित करता था. मौजूदा समय में भारत जिस तरह से विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है और दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को चुनौती दे रहा है. ऐसा कहना है अडानी पोर्ट्स एवं सेज के सीईओ करण अडानी का. उन्होंने कहा है कि भारत विश्व की एक चौथाई अर्थव्यवस्था को नियंत्रित करने के युग में वापस आ रहा है.

एशिया के सबसे अमीर शख्स और अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी के बेटे करण अडानी ने ‘अमेजन संभव-2022’ कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए यह बात कही है. उन्होंने कहा कि ग्रामीण भारत और टियर-2 या टियर-3 शहरों के सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यमों (एमएसएमई) में अच्छा करने का दम है.

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तकनीकी सुधार की जरूरत
करण अडानी ने कहा कि इन क्षेत्रों में तकनीकी सुधार की आवश्यकता है ताकि देश की विकास क्षमता बढ़ाई जा सके. उन्होंने कहा, “भारत को पहले लोग ‘सोने की चिड़िया’ कहते थे. मुझे निजी तौर पर लगता है कि अपने जीवन में हम फिर से ऐसी स्थिति देखेंगे, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था का एक-चौथाई भारत के नियंत्रण में होगा… मुझे लगता है कि देश के लोग, उद्यमी और खासतौर पर युवा जब तक इस मिशन का हिस्सा नहीं बनेंगे, भारत इस लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकता है. मुझे लगता है कि हमें केवल भारत में विश्वास करने की ही जरूरत नहीं है, बल्कि हमें विश्वास करना होगा कि हम वहां पहुंच सकते हैं.”

छोटे कारोबारों को सशक्त बनाना जरूरी
अडानी पोर्ट्स के सीईओ ने कहा कि देश को ग्रामीण भारत की क्षमता का दोहन करने और छोटे कारोबारों को और ज्यादा सशक्त बनाने की जरूरत है. उन्होंने कहा, “मैं व्यक्तिगत रूप से यह महसूस करता हूं कि भारत की शक्ति वास्तव में ग्रामीण भारत और टियर-2 या टियर-3 शहरों में है. मुझे लगता है कि जिस तरह की महत्वाकांक्षा, सोच, समाधान, इन शहरों में जो उद्यमिता मिलेगी, वह अविश्वसनीय है. मैं कहूंगा कि इनके पेट में आग है.” उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी ने सूचना के बाजार और ज्ञान तक लोगों की पहुंच की बाधाओं को दूर कर दिया है.

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पिता गौतम अडानी के बारे में पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि वे बहुत उत्सुक हैं. वास्तव में यह समझने में वे हम सभी की तुलना में अधिक उत्सुक हैं कि दुनिया किस दिशा में जा रही है, युवा दिमाग क्या सोच रहा है. वे कैसे सोच रहे हैं? वे क्यों सोच रहे हैं कि वे क्या सोच रहे हैं? मेरा मानना है कि एक दूसरे को आगे बढ़ाने और ऊपर खींचने के माहौल में हम हैं.

Tags: Adani Group, India economy, Indian economy, Rural economy

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