'भारत के पास विकसित देश बनने के लिए सिर्फ 10 साल का वक्‍त'

देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई की रिपोर्ट में चेताया गया है कि देश अगर व्यवस्थित ढंग से कार्य नहीं करता है तो यह विकसित देशों की कतार में कभी शामिल नहीं हो सकेगा.

भाषा
Updated: June 14, 2018, 1:38 PM IST
'भारत के पास विकसित देश बनने के लिए सिर्फ 10 साल का वक्‍त'
सांकेतिक तस्‍वीर (Image Source: PTI)
भाषा
Updated: June 14, 2018, 1:38 PM IST
भारत के पास अपनी स्थिति को बदलकर विकसित देशों की कतार में शामिल होने के लिए सिर्फ एक दशक का वक्त है. इसके लिए भारत को शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता होगी. अगर वह इस मोर्चे पर विफल हुआ तो देश की युवा आबादी का लाभ नुकसान में बदल जाएगा. भारतीय स्टेट बैंक की रिसर्च भाषा ने अपनी रिपोर्ट में यह बात कही.

देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई की रिपोर्ट में चेताया गया है कि देश अगर व्यवस्थित ढंग से कार्य नहीं करता है तो यह विकसित देशों की कतार में कभी शामिल नहीं हो सकेगा. रपट के अनुसार नीति-निर्माताओं को इस बात का अंदाजा होना चाहिए भारत के पास विकसित देश का सेहरा पहनने के लिए बहुत थोड़ा समय है जिसमें यह अपना दर्जा बढ़ा सकता है या फिर हमेशा के लिए उभरती अर्थव्यवस्थाओं की श्रेणी में अटका रहेगा.

रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार और नीति-निर्माताओं को युवा पीढ़ी पर ध्यान केंद्रित करना सुनिश्चित करना होगा ताकि वे अच्छे नागरिक बन सके. साथ ही जनसांख्यिकीय लाभांश को समझने और अपने उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए शिक्षा में निवेश करना चाहिए. बैंक ने चेताया, "देश का जनसांख्यिकी लाभांश, जो कि उसकी ताकत है वास्तव में 2030 तक उसके लिए नुकसानदायक हो सकती है.'

जनसंख्या वृद्धि की प्रवृत्ति दर्शाती है कि पिछले दो दशकों में वृद्धिशील जनसंख्या वृद्धि स्थिर बनी हुई है और लगभग 18 करोड़ है और राज्यों में प्रजनन दर में काफी विधितता है. रिपोर्ट में कहा गया है कर्नाटक, जहां जन्म दर में पिछले कुछ वर्षों में गिरावट रही है वहां पर 60 वर्ष से अधिक लोगों की हिस्सेदारी 2011 में हढ़कर 9.5 प्रतिशत हो गयी, जो कि 1971 में 6.1 प्रतिशत थी. कर्नाटक शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता का सबसे अच्छा प्रतिनिधि है.

धीमी जनसंख्या वृद्धि के परिणामस्वरूप लोग अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों के बदले निजी स्कूलों में पढ़ाना पसंद कर रहे हैं. हालांकि अभी भी बड़ी आबादी सरकारी स्कूलों पर निर्भर है. इस स्थिति में राज्यों के सभी सरकारी स्कूलों की स्थिति में सुधार करने का समय है
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