चीन से तीन-चौथाई आयात घटाने के लिए विकल्‍प तलाश रहा है भारत, इन चीजों को मंगाने पर लग सकती है रोक

चीन से तीन-चौथाई आयात घटाने के लिए विकल्‍प तलाश रहा है भारत, इन चीजों को मंगाने पर लग सकती है रोक
भारत चीन के साथ कारोबारी संबंध घटाने को दूसरे देशों से आयात की संभावनाएं तलाश रहा है.

भारत (India) मोबाइल, सोलर पैनल, कैमरा, पेंसलीन समेत 327 चीजों के चीन (China) से आयात पर रोक लगाने के लिए दूसरे देशों में संभावनाएं तलाश रहा है. भारत चीन से 4,044 उत्‍पादों का आयात (Import) करता है. लद्दाख सीमा पर तनाव के बाद से भारत लगातार चीन के खिलाफ सख्‍त (India-China Rift) कदम उठा रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 10, 2020, 2:51 PM IST
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नई दिल्‍ली. लद्दाख की गलवान घाटी (Galwan Valley) में हुई हिंसक झड़प में भारतीय सैनिकों के शहीद होने के बाद से भारत-चीन के रिश्‍ते लगातार तल्‍ख (India-China Rift) होते जा रहे हैं. भारत लगातार चीन के खिलाफ सख्‍त कदम उठा रहा है. इसी के तहत केंद्र सरकार चीन के ऐप्‍स से लेकर कई चीजों के आयात (Import) पर पाबंदी लगा चुकी है. भारत की कई परियोजनाओं में चीन की हिस्‍सेदारी खत्‍म कर दी गई है. आसान शब्‍दों में समझें तो भारत की ओर से चीन के साथ कारोबारी संबंध धीरे-धीरे खत्‍म किए जा रहे हैं. आम भारतीय भी चीनी सामानों का बहिष्कार (Boycott Chinese products) कर रहे हैं. इसी क्रम में भारत मोबाइल, पेंसलिन, सोलर पैनल, कैमरा समेत 327 चीजों के चीन से आयात पर रोक लगाने के लिए विकल्‍प की तलाश कर रहा है. ये 327 चीजें चीन से कुल आयात की तीन-चौथाई हैं.

आयात के लिए चीन का विकल्‍प खोजना भारत के लिए बड़ी चुनौती
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने चीन से लगातार खराब हो रहे संबंधों के बीच आत्मनिर्भर भारत (Atmanirbhar Bharat) बनाने का नारा भी दिया है. इस सब के बीच चीन से आयात पर बहुत ज्‍यादा निर्भर भारत के सामने विकल्प खोजना बड़ी चुनौती है. थिंक टैंक आरआईएस (RIS) के अध्‍ययन में कहा गया है कि भारत चीन से आने वाले उत्‍पादों के आयात के लिए किसी दूसरे देश की खोज कर रहा है. काफी समय से भारत और चीन के बीच व्‍यापार संतुलन की खाई गहरी होती जा रहा है यानी भारत में चीन से आयात बढ़ता चला गया है, जबकि निर्यात बहुत कम है. इससे भारत का व्‍यापार घाटा काफी बढ़ गया है.

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3.7 अरब डॉलर के सामान का दूसरे देशों से हो सकता है आयात


भारत चीन से 4,044 उत्‍पादों का आयात करता है, जिनमें 3,326 उत्‍पादों में प्रतिस्‍पर्धा ज्‍यादा नहीं है. लेकिन, 327 उत्‍पाद काफी संवेदनशील माने जाते हैं. दूसरे शब्‍दों में समझें तो कुल आयात में सेंसिटिव प्रोडक्ट सिर्फ 10 फीसदी ही हैं. इसमें से 76 फीसदी सेंसिटिव प्रोडक्ट मशीनें या कैमिकल हैं. वहीं, कुल आयात का 86 फीसदी मशीनों, कैमिकल, बेस मेटल और ऑटो की वजह से हैं. अध्‍ययन के मुताबिक, 3.7 अरब डॉलर के सेंसिटिव प्रोडक्ट का 100 फीसदी आयात दूसरे देशों से हो सकता है. वहीं, 3.8 अरब डॉलर के सामान का 72.6 फीसदी आयात ही दूसरे देशों से हो सकता है.

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2.8 अरब डॉलर के प्रोडक्‍ट्स का दुनिया में कोई विकल्‍प नहीं
अध्‍ययन में कहा गया है कि 4.2 अरब डॉलर का ऐसा सामान चीन से आता है, जो दूसरे देशों से आयात करें तो सिर्फ 35.9 फीसदी ही उपलब्‍ध हो पाएगा. ऐसे ही 10.7 अरब डॉलर के ऐसे सामान हैं, जिनका सिर्फ 14.2 फीसदी ही दूसरे देशों से आयात किया जा सकता है. टाइम्‍स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, 28.2 अरब डॉलर का ऐसा सामान है, जिसका सिर्फ 1.2 फीसदी ही दूसरे देशों से आयात किया जा सकता है. वहीं, 2.8 अरब डॉलर के ऐसे सेंसिटिव प्रोडक्ट चीन से आयात किए जाते हैं, जिनका कोई दूसरा विकल्प अभी तक दुनिया में मौजूद नहीं है.

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इन देशों को बनाया जा सकता है आयात के लिए नया विकल्‍प
भारत चीन से मोबाइल फोन और दूसरे वॉइस डिवाइस का 11 फीसदी आयात करता है. इस समय बाजार में फ्रांस, जर्मनी, फिनलैंड, थाईलैंड और मॉरिशस जैसे देश अच्छे विकल्प के तौर पर मौजूद हैं. वहीं अमेरिका, हंग्री, चेक रिपब्लिक, बेलारूस और कोलंबिया भी इसके संभावित विकल्‍प बन सकते हैं. इलेक्ट्रिकल सामान, एलईडी, फोटोसेंसिटिव प्रोडक्ट के 3.4 फीसदी आयात के लिए भारत अभी चीन पर निर्भर है. ये आयात कोरिया और इटली से भी हो सकता है. जापान, बेलारूस और अमेरिका भी इसके स्रोत हो सकते हैं. ऑटोमेटिक डेटा प्रोसेसिंग मशीन के लिए भारत 3.2 फीसदी आयात चीन से करता है, जिसकी जरूरत नीदरलैंड और कनाडा से पूरी हो सकती है.
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