चीन पर पलटवार के लिए तैयार भारत! इस फैसले से हो सकता है करोड़ों का नुकसान

भारत के कुल निर्यात का सिर्फ 3.2 फीसदी हिस्सा चीन का है.
भारत के कुल निर्यात का सिर्फ 3.2 फीसदी हिस्सा चीन का है.

चीन समेत कई अन्य देशों से आयात होने वाली वस्तुओं पर केंद्र सरकार आयात शुल्क (Import Duty) और उच्च टैरिफ बैरियर लगाने की तैयारी में है. सूत्रों से प्राप्त जानकारी में कहा गया है कि आयात होने वाले 300 वस्तुओं के लिए यह फैसला लिया जा सकता है.

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नई दिल्ली. चीन और भारत में तनाव के बीच अब केंद्र सरकार चीन व अन्य देशों से आयात होने वाली 300 वस्तुओं पर हाई बैरियर टैरिफ (High Barrier Tariff) लगाने की तैयारी में है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने सरकारी सूत्रों के हवाले से अपनी एक रिपोर्ट में इस बारे में जानकारी दी है. भारत यह कदम इसलिए उठा रहा है ताकि घरेलू कारोबार को बल मिल सके. सूत्रों ने बताया कि केंद्र सरकार अप्रैल से ही इस योजना पर काम कर रही थी. हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने घरेलू उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए 'अत्मनिर्भर कैंपेन' का ऐलान किया था.

सीमा शुल्क (Import Duty) पर अंतिम फैसला आने वाले कुछ महीनों में लिया जा सकता है. सूत्रों ने बताया कि इस पर काम अभी भी जारी है और अगले 3 महीनों में इसका ऐलान हो सकता है. वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) और व्यापार मंत्रालय ने इस बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं दी है.

घरेलू उत्पादों को बढ़ावा देना चाहती है सरकार
केंद्र सरकार 160 से 200 उत्पादों पर आयात शुल्क और अन्य ट्रेड बैरियर लगाने की तैयारी में है. अन्य 100 उत्पादों पर लाइसेंस की जरूरत और ​कठिन क्वॉलिटी चेक्स जैसे उपाय होंगे. इस फैसले का टार्गेट 8 से 10 अरब डॉलर के आयात पर होगा. सरकार चाहती है गैर-जरूरी और कम क्वॉलिटी वाले आयात पर को घटाया जाए और इसकी जगह घरेलू उत्पादों को प्रतिस्पर्धा में शामिल किया जाए.
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व्यापार घाटा कम करने में मिलेगी मदद
एक अन्य अधिकारी के हवाले से इस रिपोर्ट में लिखा गया है कि सरकार किसी एक देश को टार्गेट नहीं कर रही है. लेकिन यह व्यापार घाटा (Trade Deficit) कम करने का एक तरीका है, जोकि चीन जैसे देशों से एकतरफ व्यापार करने की वजह से यह बढ़ गया है.

मार्च 2019 में खत्म हुए वित्तीय वर्ष तक भारत और चीन के बीच द्वीपक्षीय व्यापार (India-China Bilateral Trade) करीब 88 अरब डॉलर का था. इस दौरान चीन के पक्ष में कुल व्यापार घाटा (Trade Deficit Due to China) करीब 53.3 अरब डॉलर का था. किसी भी अन्य देशों की तुलना में भारत के लिए यह सबसे बड़ा व्यापार घाटा है. अप्रैल 2019 से फरवरी 2020 के बीच चीन के प्रति भारत का व्यापार घाटा 46.8 अरब डॉलर का था.

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इन वस्तुओं पर लग सकता है आयात शुल्क
एक अन्य इंडस्ट्री सूत्र से पता चलता है कि सरकार के प्लान में इं​जीनियरिंग वस्तुएं, इलेक्ट्रॉनिक्स और मेडिकल इक्विपमेंट्स शामिल हैं. वहीं, एक तीसरे सूत्र से पता चलता है कि एयर कंडीशनर्स (AC- Air Conditioners) जैसी वस्तुओं पर क्वॉलिटी कंट्रोल सर्टिफिकेशन जैसी नॉन-ट्रेड बैरियर्स लगाये जा सकते हैं.

इसी साल फरवरी में ही सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम्स, खिलौने और फर्नीचर के आयात पर टैक्स को बढ़ाया था. इसके बाद सरकार पर आरोप भी लगे थे कि वह विदेशी बिजनेस को लेकर संरक्षणवाद को बढ़ावा दे रही है. स्वीडन की IKEA ने उस समय कहा था कि उच्च टैरिफ से वह निराश है.

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6 साल में 3,600 वस्तुओं पर बढ़ाया शुल्क
कई मंत्रालयों को भेजे गए सरकारी डॉक्युमेंट्स के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि इस लिस्ट में 300 उत्पाद हैं. साल 2014 के बाद से अब तक भारत ने करीब 3,600 वस्तुओं पर टैरिफ बढ़ाया है जिसमें टेक्सटाइल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे आइटम्स शामिल हैं.
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