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सरकार आज शाम को जारी करेगी जुलाई-सितंबर तिमाही के GDP आंकड़े , एक्सपर्ट्स ने कहा-सुधार के मिलने लगे संकेत

News18Hindi
Updated: November 29, 2019, 8:39 AM IST
सरकार आज शाम को जारी करेगी जुलाई-सितंबर तिमाही के GDP आंकड़े , एक्सपर्ट्स ने कहा-सुधार के मिलने लगे संकेत
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की ओर से अर्थशास्त्रियों के बीच कराए गए पोल में बताया जा रहा है कि 2019 की जुलाई-सितंबर में भारत की जीडीपी विकास दर 26 तिमाहियों के निचले स्तर पर आ सकती है.

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की ओर से अर्थशास्त्रियों के बीच कराए गए पोल में बताया जा रहा है कि 2019 की जुलाई-सितंबर में भारत की जीडीपी विकास दर 26 तिमाहियों के निचले स्तर पर आ सकती है.

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  • Last Updated: November 29, 2019, 8:39 AM IST
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नई दिल्ली. देश की आर्थिक ग्रोथ की रफ्तार और धीमी हो सकती है. उपभोक्ता मांग और निजी निवेश में कमी के चलते जुलाई-सितंबर तिमाही में भारत की (India's GDP Growth Rate) विकास दर छह साल के निचले स्तर तक गिर सकती है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स (Reuters) की ओर से अर्थशास्त्रियों (Economist Poll) के बीच कराए गए पोल में बताया जा रहा है कि 2019 की जुलाई-सितंबर में भारत की जीडीपी (India GDP Data) विकास दर 26 तिमाहियों के निचले स्तर पर आ सकती है. हालांकि, अर्थशास्त्रियों का कहना है कि आर्थिक ग्रोथ के पटरी पर लौटने के कुछ संकेत मिलने लगे है. पिछले दिनों आए कई आर्थिक आंकड़ों में सुधार देखा गया है.

आपको बता दें कि सरकार की ओर से शुक्रवार 29 नवंबर को जुलाई-सितंबर तिमाही के आर्थिक विकास आंकड़े जारी किए जाएंगे

आज आएंगे GDP के आंकड़े- रॉयटर्स के एक पोल में बताया गया है कि जुलाई-सितंबर तिमाही भारत की विकास दर 4.7% तक गिर सकती है, जो अप्रैल-जून में 5% रही थी. अप्रैल-जून में रही 5% विकास दर 6 सालों में सबसे कम थी. आपको बता दें कि 2018 की जुलाई-सितंबर तिमाही में भारत की विकास दर 7% रही थी. अगर विकास दर 4.7% तक फिसली तो पिछले साढ़े 6 साल में सबसे कम होगी.

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मिलने लगे सुधार के संकेत-ग्लोबल कंज्यूमर रिसर्च फर्म कैंटार वर्ल्डपैनल के मुताबिक, इस साल जुलाई-सितंबर के बीच रूरल मार्केट में वॉल्यूम पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 4.4 फीसदी अधिक रहा. पिछले साल सितंबर तिमाही में ग्रामीण क्षेत्रों में वॉल्यूम में 2.4 फीसदी की गिरावट आई थी. इस पर एक्सपर्ट्स का कहना है कि सितंबर तिमाही में जीडीपी ग्रोथ जून तिमाही के 5 प्रतिशत से कम रह सकती है.

एक्सपर्ट्स ने बताया है कि पिछले साल की सितंबर तिमाही के लो बेस (ग्रोथ में गिरावट) के कारण इस साल दूसरी तिमाही में हाउसहोल्ड प्रॉडक्ट्स और ग्रॉसरी की ग्रोथ अच्छी दिख रही है. इसी वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में इन सामानों की बिक्री में बढ़ोतरी और जीडीपी ग्रोथ में अगली कुछ तिमाही में सुधार की उम्मीद लगाई जा रही है.

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अब क्या होगा- न्यूज एजेंसी रॉयटर्स का कहना है कि रिजर्व बैंक एक बार फिर रेपो रेट में 0.25 फीसदी की कटौती कर सकता है. तीन से पांच दिसंबर चलने वाली एमपीसी बैठक में रेपो रेट को घटाकर 4.90 फीसदी पर की जा सकती है. सर्वे में शामिल अधिकतर अर्थशास्त्रियों का कहना है कि घरेलू कर्ज की धीमी रफ्तार और कंपनियों के घटते मुनाफे की वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था को रफ्तार पकड़ने में समय लगेगा.

क्या होती है GDP- जीडीपी किसी ख़ास अवधि के दौरान वस्तु और सेवाओं के उत्पादन की कुल क़ीमत है. भारत में जीडीपी की गणना हर तीसरे महीने यानी तिमाही आधार पर होती है. ध्यान देने वाली बात ये है कि ये उत्पादन या सेवाएं देश के भीतर ही होनी चाहिए.

भारत में कृषि, उद्योग और सर्विसेज़ यानी सेवा तीन प्रमुख घटक हैं जिनमें उत्पादन बढ़ने या घटने के औसत के आधार पर जीडीपी दर होती है. ये आंकड़ा देश की आर्थिक तरक्की का संकेत देता है. आसान शब्दों में, अगर जीडीपी का आंकड़ा बढ़ा है तो आर्थिक विकास दर बढ़ी है और अगर ये पिछले तिमाही के मुक़ाबले कम है तो देश की माली हालत में गिरावट का रुख़ है.

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First published: November 29, 2019, 8:32 AM IST
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