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जनवरी में आम आदमी को और सताएगी महंगाई! 8% के ऊपर जाने पर RBI के लिए बनेगी चुनौती: रिपोर्ट

भाषा
Updated: January 14, 2020, 6:37 PM IST
जनवरी में आम आदमी को और सताएगी महंगाई! 8% के ऊपर जाने पर RBI के लिए बनेगी चुनौती: रिपोर्ट
एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मार्च तक खुदरा महंगाई दर 7 फीसदी से ऊपर बनी रह सकती है.

मंगलवार को जारी SBI की रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर में कमी नहीं आती है, हम गतिहीन मुद्रास्फीति (स्टैगफ्लेशन) की स्थिति में जा सकते है जहां आर्थिक वृद्धि कमजोर रहने के साथ महंगाई दर ऊंची होती है.

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नई दिल्ली. भारतीय स्टेट बैंक (SBI Research Report) एसबीआई रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार सब्जियों के दामों में हुई बढ़ोत्तरी को देखते  हुए जनवरी महीने के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित मुद्रास्फीति 8 प्रतिशत से ऊपर जा सकती है लेकिन उसके बाद इसके नरम पड़ने की उम्मीद है. एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मार्च तक खुदरा महंगाई दर 7 फीसदी से ऊपर बनी रह सकती है. इसे देखते हुए आरबीआई को मोनेट्री पॉलिसी में ब्याज दरें मौजूदा स्तर पर ही बरकरार रखनी पड़ सकती है.आपको बता दें कि सोमवार को जारी खुदरा महंगाई दर दिसंबर 2019 में उछलकर 94 महीनों के उच्च स्तर 7.35 प्रतिशत पहुंच गयी. यह इससे पिछले महीने नवंबर में 5.54 प्रतिशत थी.

सब्जियों के दाम बढ़ने से बढ़ रही हैं महंगाई- मंगलवार को जारी SBI की रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर में कमी नहीं आती है, हम गतिहीन मुद्रास्फीति (स्टैगफ्लेशन) की स्थिति में जा सकते है जहां आर्थिक वृद्धि कमजोर रहने के साथ महंगाई दर ऊंची होती है. रिपोर्ट के अनुसार महंगाई दर में वृद्धि का प्रमुख कारण प्याज, आलू और अदरक के दाम में जोरदार तेजी है. इसके अलावा दूरसंचार शुल्क में वृद्धि के कारण मुद्रास्फीति में 0.16 प्रतिशत का प्रभाव पड़ा है. इसे देखते हुए सीपीआई आधारित महंगाई दर इस महीने 8 प्रतिशत के ऊपर निकल सकती है. हालांकि उसके बाद स्थिति में सुधार की संभावना है.

महंगाई दर में वृद्धि को देखते हुए रिजर्व बैंक मुद्रास्फीति और वृद्धि के अनुमानों पर पुनर्विचार करने के लिये बाध्य हो सकता है. लेकिन हमारे विचार से रुख में बदलाव अवांछित होगा. इसका कारण खपत में उल्लेखनीय रूप से कमी है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि रिजर्व बैंक के पास दिसंबर में नीतिगत दर में कटौती का अच्छा मौका था. उस समय अक्टूबर में मुद्रास्फीति 4.62 प्रतिशत थी.

इसके अनुसार, ‘‘खाद्य वस्तुओं के दाम में अगर नरमी नहीं आती है, हम गतिहीन मुद्रास्फीति की स्थिति में जा सकते हैं.

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महंगाई दर में नरमी के बारे में SBI रिपोर्ट में कहा गया है, इसमें सितंबर 2020 के बाद नरमी की उम्मीद है. दिसंबर 2020 से जनवरी 2021 में सकल मुद्रास्फीति घटकर 3 प्रतिशत के नीचे जा सकती है. इसका मतलब है कि आरबीआई 2020 में यथास्थिति बनाये रख सकता है.

आरबीआई मौद्रिक नीति पर विचार करते समय मुख्य रूप से सीपीआई आधारित महंगाई दर पर विचार करता है. केंद्रीय बैंक छह फरवरी को मौद्रिक नीति समीक्षा पेश करेगा.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सब्जी के दाम में तेजी को देखते हुए आने वाले समय में अंडा, मांस, मछली जैसे प्रोटीन युक्त खाने के सामान की महंगाई दर बढ़ सकती है.

इसका कारण लोग महंगी सब्जी के बजाए दाल, अंडा, मांस के उपभोग को बढ़ा सकते हैं जिससे इनकी कीमतें बढ़ सकती हैं. SBI रिपोर्ट में सीपीआई की गड़ना के तरीके पर भी पुनर्विचार पर जोर दिया गया है.

इसमें कहा गया है, ‘‘केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) सीईएस (प्रतिस्थापन का स्थिर लोचशीलता) सर्वे का उपयोग करता है. इससे सीपीआई आधारित महंगाई दर में 2 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है. सीपीआई के अनुमान में इस तरीके पर विचार करने की जरूरत है.’’

रिपोर्ट के अनुसार महंगाई दर चालू वित्त वर्ष की शेष अवधि में लगभग 7 प्रतिशत की दर से ऊंची बनी रह सकती है. वित्त वर्ष 2019-20 में यह औसतन 5 प्रतिशत रहेगी.

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इसमें कहा गया है, ‘‘हमारा मानना है कि आरबीआई पूरे 2020 में मौद्रिक नीति के मोर्चे पर यथस्थिति बनाये रख सकता है क्योंकि जून-जुलाई 2020 तक मुद्रास्फीति 6 प्रतिशत के ऊपर बनी रह सकती है.’’

आर्थिक वृद्धि में नरमी और तथा उच्च मुद्रास्फीति को देखते हुए आरबीआई के लिये नीतिगत दर के मोर्चे पर कोई निर्णय करना आसान नहीं होगा. सीएसओ के अग्रिम अनुमान के अनुसार देश की आर्थिक वृद्धि दर 2019-20 में 5 प्रतिशत रह सकती है.

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First published: January 14, 2020, 6:32 PM IST
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