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भारत की अपील पर वोडाफोन मध्यस्थता फैसले के खिलाफ सितंबर में होगी सिंगापुर की उच्च अदालत में सुनवाई

 वोडाफोन मध्यस्थता फैसले के खिलाफ सितंबर में होगी सिंगापुर में सुनवाई

वोडाफोन मध्यस्थता फैसले के खिलाफ सितंबर में होगी सिंगापुर में सुनवाई

भारत सरकार की वोडाफोन मामले में अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण के फैसले को चुनौती देने वाली अपील को सिंगापुर की उच्च अदालत (सीनियर कोर्ट) में स्थानांतरित कर दिया गया है. सूत्रों ने यह जानकारी देते हुए कहा कि भारत सरकार की अपील पर सुनवाई सितंबर में होगी.

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    नई दिल्ली . भारत सरकार की वोडाफोन मामले में अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण के फैसले को चुनौती देने वाली अपील को सिंगापुर की उच्च अदालत (सीनियर कोर्ट) में स्थानांतरित कर दिया गया है. सूत्रों ने यह जानकारी देते हुए कहा कि भारत सरकार की अपील पर सुनवाई सितंबर में होगी.

    अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने भारत सरकार के वोडाफोन समूह पर पिछली तारीख से 22,100 करोड़ रुपये की कर की मांग को खारिज कर दिया था, जिसके खिलाफ भारत सरकार ने अपील की है.

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    अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने पिछले साल 25 सितंबर को कर विभाग की ब्रिटेन की दूरसंचार कंपनी पर 22,100 करोड़ रुपये की कर और जुर्माने की मांग को खारिज कर दिया था. विभाग ने ब्रिटिश कंपनी द्वारा 2007 में भारतीय ऑपरेटर के अधिग्रहण के मामले में यह कर मांग की थी. सरकार ने पिछले साल दिसंबर में अधिकार क्षेत्र के आधार पर इस फैसले के खिलाफ अपील की थी.

     सुनवाई सितंबर में होगी

    इस मामले की जानकारी रखने वाले दो सूत्रों ने कहा कि अब भारत सरकार की अपील को उच्च अदालत को स्थानांतरित कर दिया गया है और इस पर सुनवाई सितंबर में होगी. यह अपील सिंगापुर की अदालत में इसलिए दायर की गई क्योंकि दक्षिण-पूर्व एशियाई देश पंचाट की पीठ है.

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    सरकार ने इसी तरह द हेग की स्थायी मध्यस्थता अदालत के तीन सदस्यीय न्यायाधिकरण के फैसले को भी चुनौती दी है. इस फैसले में भारत सरकार को ब्रिटेन की केयर्न एनर्जी पीएलसी को 1.2 अरब डॉलर के साथ ब्याज और लागत लौटाने को कहा गया है.

     साल 2012 के कानून का इस्तेमाल

    सरकार ने 2012 के कानून का इस्तेमाल करते हुए वोडाफोन और केयर्न से कई साल पहले हुए कथित पूंजीगत लाभ पर कर का भुगतान करने को कहा था. यह कानून कर विभाग को पुराने मामलों को खोलने की अनुमति देता है.

    वोडाफोन और केयर्न दोनों ने द्विपक्षीय निवेश संरक्षण संधि के तहत मध्यस्थता मामला दायर किया था. भारत दोनों ही मध्यस्थता मामले हार गया.

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