अब बैंक में फंसे कर्ज से आपको नहीं होगी कोई चिंता! जानिए क्या है 'बैड बैंक'

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इंडियन बैंक एसोसिएशन (IBA) और उसके सदस्यों के स्तर पर बैड बैंक (Bad Bank) के स्ट्रक्चरिंग की बात चल रही है, ताकि देश में बढ़ते फंसे कर्ज (NPA) की समस्या से निपटा जा सके. इससे बैंकों के क्रेडिट और आर्थिक ग्रोथ पर साकारात्मक असर देखने को मिल सकता है.

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नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Coronavirus) महामारी के बीच फंसे कर्ज से निपटने के ​लिए भारतीय बैंक (Indian Banks) अब 'बैड बैंक' बनाने की तैयारी में हैं. CNBC-TV18 से खास बातचीत में देश के सबसे बड़े बैंक के प्रमुख ने इस बारे में जानकारी दी. भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के चेयरमैन रजनीश कुमार (Rajneesh Kumar) ने कहा, 'यह इंडियन बैंक एसोसिएशन और उसके अधिकतर सदस्यों के स्तर पर एक शुरुआती विचार है'

रजनीश कुमार ने कहा, 'हमारा मानना है कि बैड बैंक के स्ट्रक्चरिंग के लिए यह उचित समय है. मौजूदा समय में बड़े स्तर पर फंसा कर्ज है. कुछ बैंकों के पास इसका सबसे बड़ा हिस्सा है.'

कोरोना संकट में फंसे कर्ज से निपटने के लिए RBI उठा रहा कदम
कुमार का यह बयान एक ऐसे समय में आया है, जब कोरोना वायरस महामारी (Coronavirus Pandemic) की वजह से देश में फंसे कर्ज (NPA- Non-Performing Assets) में इजाफा होने की आशंका है. हालांकि, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने इसे ध्यान में रखते हुए कई तरह के कदम उठाने का प्रयास किया है. मौजूदा लोन पर 90 दिनों का मोरेटोरियम सुविधा देना भी इन्हीं में से एक है.
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लंबे समय से है बैड बैंक की मांग
बैड बैंक स्ट्रक्चरिंग (Bad Bank Structuring) को लेकर लंबे समय से मांग की जा रही है. लगातार कई वर्षों से बैंकों में बढ़ते फंसे कर्ज ने उनके क्रेडिट से लेकर देश के आर्थिक ग्रोथ तक पर असर डाला है. रजनीश कुमार के कमेंट्स से संकेत मिलते हैं कि यह इंडस्ट्री स्तर का प्रयास होगा. इसे एसेट रिकन्स्ट्रक्शन कंपनी (ARC) और एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) के तौर पर स्ट्रक्चर किया जा सकता है. सरकार द्वारा इस दिशा में कोई कदम उठाने की संभावना कम नजर आ रही है.

सरकार की भी चाहिए होगी मदद
हालांकि, रजनीश कुमार ने कहा कि यह अभी बेहद ही शुरुआती स्तर पर है. जब एक बार सभी बैंकों में इसे लेकर कोई सहमति बनती है तभी आगे के कदम उठाए जाएंगे. यह भी देखना होगा कि क्या इसके लिए कोई एक्सटर्नल रेग्युलेटरी या सरकार के सपोर्ट की जरूरत होगी. हालांकि, इस बीच इकोनॉमिक टाइम्स की एक ​अन्य रिपोर्ट में कहा गया है कि बैंक इसके लिए केंद्र सरकार से 10,000-15,000 करोड़ रुपये के योगदान का अनुरोध कर रहे हैं.

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क्या होता है बैड बैंक?
बैड बैंक एक तरह की संस्था या सेटअप होती है जो अन्य बैंकों व वित्तीय संस्थानों से उनके फंसे कर्ज को खरीदती है. जिस भी बैंक या वित्तीय संस्थान के बाद एक तय स्तर से अधिक फंसा कर्ज है तो वो इसे बैड बैंक को मार्केट प्राइस पर बेच देगा. इससे बैंकों व वित्तीय संस्थानों को अपने बैलेंसशीट क्लियर करने में आसानी होती है. इससे बैंक डिपॉजिटर्स के लिए खतरा कम हो जाता है कि उन्होंने जिस बैंक में पैसे जमा किए हैं, वो बंद या दिवालिया हो सकता है.

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