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इंडिया रेटिंग्स ने भारत को दिया झटका, दूसरी तिमाही में GDP ग्रोथ 4.7% रहने का अनुमान

पीटीआई
Updated: November 26, 2019, 7:22 PM IST
इंडिया रेटिंग्स ने भारत को दिया झटका, दूसरी तिमाही में GDP ग्रोथ 4.7% रहने का अनुमान
इंडिया रेटिंग्स ने चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर 4.7 फीसदी रह सकती है. अगर ऐसा होता है तो यह 2012 के बाद लगातार छठी तिमाही होगी जब जीडीपी वृद्धि दर घटेगी.

इंडिया रेटिंग्स ने चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर 4.7 फीसदी रह सकती है. अगर ऐसा होता है तो यह 2012 के बाद लगातार छठी तिमाही होगी जब जीडीपी वृद्धि दर घटेगी.

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नई दिल्ली. देश की आर्थिक वृद्धि (Indian Economy) दर में चल रही गिरावट का सिलसिला लगातार छठवीं तिमाही जुलाई-सितंबर, 2019 में भी जारी रहने का अनुमान है. इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च (India Ratings and Research) ने अपनी रिपोर्ट में चालू वित्त वर्ष के लिये चौथी बार GDP ग्रोथ रेट के अनुमान को घटा दिया है और इस बार जुलाई-सितंबर की तिमाही में इसके 4.7 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है.

सरकरी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019-20 की पहली तिमाही में वृद्धि 5 फीसदी थी. यह 2013 के बाद किसी तिमाही में न्यूनतम आर्थिक वृद्धि दर थी. इंडिया रेटिंग्स ने चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर 4.7 फीसदी रह सकती है. अगर ऐसा होता है तो यह 2012 के बाद लगातार छठी तिमाही होगी जब जीडीपी वृद्धि दर घटेगी. यह अनुमान तब आया है जब सरकार ने कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती के साथ राजकोषीय प्रोत्साहन के कई कदम उठाये हैं.

वित्त वर्ष 2019-20 के लिये GDP 5.6% रहने का अनुमान- रेटिंग्स एजेंसी ने एक बयान में कहा कि इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च ने 2019-20 के लिये जीडीपी वृद्धि दर अनुमान को संशोधित कर 5.6 फीसदी कर दिया है. यह लगतार चौथा मौका है जब रेटिंग्स एजेंसी ने चालू वित्त वर्ष के लिये आर्थिक वृद्धि के अनुमान को कम किया है. एक महीने पहले ही एजेंसी ने इसके 6.1 फीसदी रहने का अनुमान जताया था.

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नये अनुमान के अनुसार चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में यह 4.7 फीसदी रह सकती है. दूसरी तिमाही के आंकड़े शुक्रवार को जारी किये जाने की संभावना है. इंडिया रेटिंग्स ने कहा कि अनुकूल तुलनात्मक प्रभाव के बावजूद वृद्धि की गति में गिरावट यह संकेत देता है कि 2019-20 की दूसरी छमाही में आर्थिक वृद्धि दर पूर्व के अनुमान से कमजोर रह सकती है और इसके 6.2 फीसदी रहने की संभावना है. बयान के अनुसार देश का आर्थिक परिदृश्य इस साल और कमजोर हुआ है. समस्या गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों से शुरू हुई और धीरे-धीरे खुदरा कंपनियों, वाहन कंपनियों, मकान बिक्री और भारी उद्योग पर इसका असर हुआ.

सरकार ने अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए कई कदम उठाए- इंडिया रेटिंग्स का वृद्धि अनुमान मूडीज के संशोधित परिदृश्य 5.8 फीसदी से कम है. यह स्थिति तब है जब मोदी सरकार ने आर्थिक वृद्धि को थामने के लिये कदम उठाया है. सितंबर में सरकार ने कॉर्पोरेट टैक्स की दर 30 फीसदी से घटाकर 22 फीसदी कर दिया. साथ ही विनिर्माण कार्य में लगी नई कंपनियों के लिये कंपनी आयकर की दर घटाकर 15 फीसदी कर दिया. इसके अलावा बैंकों में पूंजी डालना, 10 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का चार में विलय, बुनियादी ढांचा क्षेत्र में व्यय के साथ स्टार्टअप के लिये टैक्स लाभ भी दिये गये.

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First published: November 26, 2019, 7:18 PM IST
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