कोरोना वायरस की मार से उबर रही है अर्थव्यवस्था? जानिए क्या कहते हैं आंकड़े

प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर

जुलाई-सितंबर तिमाही में बढ़ती आर्थिक गतिविधियों के आधार पर अर्थव्यवस्था के पटरी पर आने की उम्मीद जताई जा रही है, क्योंकि लॉकडाउन हटने के बाद विनिर्माण क्षेत्र में फिर से तेजी देखी गई है और इस कारण वस्तु और सेवा कर (GST) का मोटा कलेक्शन भी हुआ है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 4, 2020, 1:06 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Coronavirus) के चलते लगे लंबी अवधि के लॉकडाउन (Lockdown) से देश की अर्थव्यवस्था थम सी गई थी. साल की पहली तिमाही अप्रैल-जून में जीडीपी में 23.9 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जिसके कारण देशभर के सुक्ष्म और लघु उद्योगों को बड़ा झटका लगा था. निर्माण क्षेत्र की गतिविधियों में 50 फीसदी, विनिर्माण क्षेत्र में 39 फीसदी, सेवाओं (होटल और हॉस्पिटैलिटी) में 47 फीसदी की गिरावट आई थी. अब कई अर्थशास्त्रियों का मानना है कि साल 2022-23 में ही जीडीपी में सुधार देखने को मिलेगा.

जुलाई-सितंबर तिमाही में बढ़ती आर्थिक गतिविधियों के आधार पर अर्थव्यवस्था के पटरी पर आने की उम्मीद जताई जा रही है. क्योंकि लॉकडाउन हटने के बाद विनिर्माण क्षेत्र में फिर से तेजी देखी गई है और इस कारण वस्तु और सेवा कर (GST) का मोटा कलेक्शन भी हुआ है. इधर, त्योहारी सीजन की शुरुआत हो चुकी है और लोग वाहन खरीदने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं.

ऐसे में इस साल ऑटोमोबाइल सेक्टर में बड़े उछाल आने की उम्मीद जताई गई है. बोर्ड के सभी अर्थशास्त्रियों को उम्मीद है कि देश में बढ़ते कोविड-19 के मामलों के बावजूद देश में आर्थिक गतिविधियां सक्रिय रूप से जारी रहेंगी. उन्होंने अर्थव्यवस्था पर चेताते हुए यह भी कहा कि कोरोना वायरस महामारी के कारण गिरी अर्थव्यस्था को पटरी पर लाने के लिए सरकार का सहयोग अतिआवश्यक है. आइए एक नजर डालते हैं महामारी के बावजूद आर्थिक और व्यावसायिक स्तर में सुधार लाने वाले संकेतों पर...



यह भी पढ़ें: एफडी पर ये बैंक दे रहे 8 फीसदी तक ब्याज, वरिष्ठ नागरिकों को ज्यादा मुनाफा
क्रय प्रबंधकों की सूची में आया सुधार: क्रय प्रबंधकों की सूची (Manufacturing PMI) को अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेतों में से एक माना जा रहा है. आईएचएस मार्किट मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई सेक्टर (IHS Market) ऑर्डर और उत्पादन में बढ़ोतरी के कारण अगस्त में 52 से बढ़कर सितंबर में 56.8 होने से साढ़े आठ साल के उच्च स्तर पर पहुंच गया. बता दें कि इसके 50 से नीचे जाने पर अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पड़ता है. अप्रैल-जून में 35.1 के मुकाबले लॉकडाउन के बावजूद जुलाई-सितंबर में विनिर्माण क्षेत्र का सूचकांक बढ़कर 51.6 हो गया है जो अर्थव्यवस्था के लिए शुभ संकेत माना जा रहा है.

जीएसटी कलेक्शन में हुआ इजाफा: सितंबर में वस्तु और सेवा कर (GST) का राजस्व बढ़कर 95,480 करोड़ रुपये हो गया, जो कि एक साल पहले इसी अवधि में 91,916 करोड़ रुपये था. आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल के बाद सितंबर में सबसे अधिक जीएसटी कलेक्शन हुआ है जो कि अर्थव्यस्था के लिहाज से अच्छा संकेत माना जा रहा है. वहीं त्योहारी सीजन में इसके और बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है. बता दें कि अप्रैल में 32,172 करोड़, मई में 62,151 करोड़, जून में 90,917 करोड़ और जुलाई में 87,442 करोड़ रुपये जीएसटी कलेक्शन हुआ था.

वाहनों की बिक्री बढ़ी: लॉकडाउन के कारण अप्रैल और मई में ऑटोमोबाइल सेक्टर पूरी तरह ठप पड़ा रहा. वहीं, जून में लॉकडाउन में राहत होने से वाहनों की बिक्री में एक बार फिर तेजी देखी गई. सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स के आंकड़ों के मुताबिक, जून 2019 की तुलना में जून 2020 में यात्री वाहनों (Passengers Vehicles) की बिक्री में लगभग 50 फीसदी और दोपहिया वाहनों में लगभग 39 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. दोपहिया वाहनों की बिक्री में ज्यादा गिरावट नहीं आई जो इस बात का संकेत देते हैं कि ग्रामीण क्षेत्र के मुकाबले शहरी लोगों ने लॉकडाउन में बाहर निकलना नहीं छोड़ा. वहीं, जीडीपी में ग्रामीण अर्थव्यवस्था ने खुद को साबित किया है, क्योंकि कृषि सेक्टर में महामारी (अप्रैल-जून) के दौरान भी वृ्द्धि देखी गई.

यह भी पढ़ें: खुशखबरी! आज से सस्ता हुआ खाना पकाना और गाड़ी चलाना, घट गए CNG-PNG के दाम

अर्थव्यवस्था में रेलवे का योगदान: देश की अर्थव्यवस्था को उठाने में भारतीय रेलवे की कमाई का भी अहम योगदान होता है. ऐसे में रेलवे को एक बार फिर अर्थव्यवस्था को उठाने के लिए बड़ी उम्मीद की नजर से देखा जा रहा है. बता दें कि भारतीय रेलवे ने सितंबर 2019 तक (15 फीसदी) 102 मिलियन टन (MT) माल ढुलाई का काम संभाला. वहीं सितंबर 2020 में माल ढुलाई से होने वाला राजस्व 14 फीसदी बढ़कर 9,903 करोड़ रुपये हो गया. इस तरह भारतीय रेलवे भी आने वाले समय में अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम योगदान देगा.

यूपीआई पेमेंट्स: यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) डेटा के मुताबिक, अप्रैल से अगस्त तक की अवधि में वॉल्यूम और वैल्यू टर्म्स दोनों में ही डिजिटल लेनदेन (Digital Transaction) में लगातार वृद्धि देखी गई है. यूपीआई डेटा के अनुसार अप्रैल में 1.51 लाख करोड़, मई में 2.18 लाख करोड़, जून में 2.61 लाख करोड़, जुलाई में 2.90 लाख करोड़ और अगस्त में 2.98 लाख करोड़ के लेनदेन (Transaction) देखा गया . वहीं, लॉकडाउन से पहले मार्च में 2.06 लाख करोड़ के लेनदेन की पुष्टि हुई थी. लॉकडाउन के कारण यूपीआई पेमेंट्स में अप्रैल में 27 फीसदी की गिरावट आई. कोरोनावायरस की वजह से 1.3 बिलियन लोगों ने डिजिटल पेमेंट्स का सहारा लिया.

यह भी पढ़ें: Home Loan की EMI पूरी होने के बाद गलती से भी न करें ये भूल, जरूर कर लें ये काम

आयकर में भी हुई बढ़ोतरी: लेखा महानियंत्रक (Controller General of Accounts , CAG) के आंकड़ों के मुताबिक, 2020-21 में कॉर्पोरेट टैक्स में कोई कमी नहीं आई है. इस साल जून में सबसे ज्यादा 37,231 करोड़ रुपये का कॉर्पोरेट टैक्स का भुगतान हुआ है. मई और जुलाई में कॉर्पोरेट टैक्स में भारी गिरावट आई थी. वहीं, अगस्त में 10,991 करोड़ रुपये का कॉर्पोरेट टैक्स का भुगतान किया गया, लेकिन बावजूद इसके अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए आयकर से अभी और उम्मीद है. जबकि आयकर भुगतान में पिछले साल के मुकाबले बड़ी गिरावट देखने को मिली है. बता दें कि आयकर प्राप्तियां 26,000 करोड़ रुपये के ऊपर पहुंच चुकी हैं, जबिक, मई में यह दर 8,748 करोड़ रुपये थी.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज