S&P की रिपोर्ट से मिले अच्‍छे संकेत! भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था में सुधार से घटेगा बैंकिंग सेक्टर पर दबाव, वापस होंगे फंसे लोन

एसएंडपी ने कहा, भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था तेजी से कोरोना संकट के असर से उबर रही है.

एसएंडपी ने कहा, भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था तेजी से कोरोना संकट के असर से उबर रही है.

ग्‍लोबल रेटिंग एजेंसी स्‍टैंडर्ड एंड पुअर्स (S&P) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारतीय बैकों (Indian Banks) को कोरोना संकट के असर से बचाने के लिए किए मोदी सरकार (Modi Government) के प्रयास काफी हद तक सफल रहे हैं. साथ ही कहा है कि भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था (Indian Economy) तेजी से कोरोना संकट से उबर रही है. भारत का इकोनॉमिक रिस्‍क ट्रेंड स्थिर है.

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  • Last Updated: February 24, 2021, 11:25 PM IST
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नई दिल्‍ली. ग्लोबल रेटिंग एजेंसी स्‍टैंडर्ड एंड पुअर्स (S&P) ने अपनी नई रिपोर्ट में कहा है कि भारत की मेक्रोइकोनॉमी (Indian Macro-Economy) की स्थितियों में सुधार से देश के बैकिंग सिस्टम (Banking Sector) पर बने दबाव में कमी आएगी. साथ ही कहा कि बैंकिंग सिस्टम का कमजोर लोन कुल कर्ज का 12 फीसदी है. इसके अलावा कहा है कि भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था (Indian Economy) तेजी से कोरोना संकट के असर से उबर रही है. एसएंडपी का अनुमान है कि कोरोना संकट के चलते देश के सकल घरेलू उत्‍पाद (GDP) में गिरावट 10 फीसदी के स्तर पर पहुंच सकती है.

'भारत में बैंकों के लिए क्रेडिट रिस्क काफी उच्‍चस्‍तर पर है'
रेटिंग एजेंसी का अनुमान है कि 31 मार्च 2022 को खत्‍म होने वाले वित्‍त वर्ष में कर्ज लागत सुधरकर कुल लोन के 2.2 फीसदी पर आ जाएगी. वहीं, वर्ष 2021 में ये 2.7 फीसदी पर रहेगी. एजेंसी ने भारत के बैकिंग सेक्टर को ग्रुप-6 (Group 6) में रखा है. एसएंडपी का कहना है कि भारत का इकोनॉमिक रिस्क ट्रेंड स्थिर है. वहीं, बैंकों के लिए क्रेडिट रिस्क काफी उच्‍चस्‍तर पर है. भारतीय बैकों पर बड़ी-बड़ी कंपनियों का भारी-भरकम लोन बकाया है. इसको लेकर सरकार के नए कानूनों के बावजूद खराब लोनों (Bad Loans) का समाधान काफी धीमे स्तर पर है. कोरोना महामारी के कारण आई मंदी ने भारतीय बैंकों की एसेट क्वालिटी में हो रहे सुधार को धीमा कर दिया है.

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भारत के बैंकिंग सेक्‍टर को इस तरह मिल सकती है राहत


एसएंडपी ने रिपोर्ट में कहा है कि कोरोना संकट का भारत के छोटे और मध्यम उद्योगों पर काफी बुरा असर पड़ा है. इससे बैंकों के खुदरा और खासकर बिना गारंटी वाले कर्ज की स्थिति ज्‍यादा खराब हुई है. सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ओर से उठाए गए एसएमई के लिए इमरजेंसी गारंटी स्कीम जैसे कदमों से बैंकों पर दबाव कुछ कम होगा. वित्त वर्ष 2022 में घोषित बजट में बैड बैंक की स्थापना और एनसीएलटी (NCLT) फ्रेम वर्क मजबूत बनाने का एलान किया है. एजेंसी का कहना है कि सरकार के इस कदम से बैंकों को फायदा हो सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इकोनॉमी में सुधार के साथ ही अर्थव्यवस्था के तमाम क्षेत्रों में तेजी आएगी, जिससे बैंकिंग सेक्टर से फंसे लोन वापस हो सकते हैं और इस सेक्टर को राहत मिल सकती है.
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