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indian economy will grow at the rate of 7 7 8 percent says economists rrmb

बेहतर कृषि उत्‍पादन देगा विकास को गति, 7-7.8 फीसदी की दर से बढ़ेगी भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था

भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था मौजूदा समय में जिन चुनौतियों का सामना कर रही है, उनमें से अधिकतर बाहरी स्रोतों से उत्‍पन्‍न हुई हैं.

भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था मौजूदा समय में जिन चुनौतियों का सामना कर रही है, उनमें से अधिकतर बाहरी स्रोतों से उत्‍पन्‍न हुई हैं.

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि वैश्विक मुद्रास्फीति के दबाव और रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian economy) के सामने जोखिम पैदा हुआ है. लेकिन अगर हम घरेलू हालात देखें तो भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत है.

नई दिल्‍ली. भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था (Indian Economy) मौजूदा वैश्विक रूकावटों के बीच दोबारा से सुधर रही है. बेहतर कृषि उत्‍पादन (Agriculture Production) और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने से चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7-7.8 प्रतिशत रह सकती है. अर्थशास्त्रियों ने यह अनुमान जताया है. उनका मानना है कि भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था मौजूदा समय में जिन चुनौतियों का सामना कर रही है, उनमें से अधिकतर बाहरी स्रोतों से उत्‍पन्‍न हुई है.

न्यूज एजेंसी भाषा के अनुसार, जानेमाने अर्थशास्त्री और बीआर अंबेडकर स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के कुलपति एन आर भानुमूर्ति ने कहा कि इस समय भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक कारणों से कई चुनौतियों का सामना कर रही है. उन्होंने कहा कि वैश्विक मुद्रास्फीति के दबाव और रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण अर्थव्यवस्था के सामने जोखिम पैदा हुआ है. लेकिन अगर हम घरेलू हालात देखें तो भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत है.  भानुमूर्ति ने कहा कि बेहतर कृषि उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने से भारत को चालू वित्त वर्ष में वैश्विक बाधाओं के बावजूद 7 प्रतिशत की वृद्धि दर हासिल करनी चाहिए.

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आंकड़े दे रहे मजबूती के संकेत
औद्योगिक विकास अध्ययन संस्थान (ISID) के निदेशक नागेश कुमार ने कहा कि जीएसटी संग्रह, निर्यात और पीएमआई के मजबूत आंकड़े 2022-23 के दौरान एक मजबूत वृद्धि दर का संकेत दे रहे हैं. नागेश कुमार का कहना है कि वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7-7.8 प्रतिशत के बीच रह सकती है. फ्रांस के अर्थशास्त्री गाय सोर्मन ने कहा कि ऊर्जा और उर्वरक आयात की उच्च लागत भारत को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है. उन्होंने कहा कि भारत अभी भी एक कृषि अर्थव्यवस्था है. इस वजह से धीमी वृद्धि का सामाजिक प्रभाव शहर के श्रमिकों के अपने गांव वापस जाने से कम हो जाएगा. इससे कृषि उत्पादन और खाद्यान्न निर्यात बढ़ सकता है.

महंगाई हो सकती है कम
एन आर भानुमूर्ति का कहना है कि मार्च 2022 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति के उच्च स्तर पर पहुंने और पिछले तीन महीनों में इसमें तेजी जारी रहने का प्रमुख कारण ईंधन के दाम में उछाल है. उन्‍होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर ईंधन के दाम बढ़ने और अन्य जिंसों के भाव में तेजी से खुदरा महंगाई में अचानक उछाल आया है. लेकिन ईंधन दरों में कटौती और रेपो रेट में बढ़ोतरी होने से महंगाई दर आने वाली तिमाहियों में नरम पड़ सकती है.

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स्‍टैगफ्लेशन का खतरा नहीं
नागेस कुमार का कहना है कि जिंसों  की कीमतों में तेजी भारत की अर्थव्‍यवस्‍था के नीचे जाने का जोखिम पैदा करती है. ऐसा इसलिए है क्‍योंकि महंगाई दर ऊंची है. उन्होंने कहा, ‘‘इसके बावजूद मुझे नहीं लगता कि भारत निम्न वृद्धि दर के साथ ऊंची मुद्रास्फीति की स्थिति (स्टैगफ्लेशन) की ओर बढ़ रहा है. इसका कारण वृद्धि दर का मजबूत होना है.

Tags: Economy, Indian economy, Rural economy

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