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वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट में दावा- भारत की इकोनॉमी में आ रहा है V शेप सुधार

वित्त मंत्रालय की ओर से जारी मासिक आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि इकोनॉमी को सबसे अधिक कृषि क्षेत्र से समर्थन मिल रहा है.
वित्त मंत्रालय की ओर से जारी मासिक आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि इकोनॉमी को सबसे अधिक कृषि क्षेत्र से समर्थन मिल रहा है.

भारत की इकोनॉमी (Indian Economy) में V शेप यानी तेजी से सुधार देखने को मिल रहा है और जुलाई-सितंबर तिमाही में जीडीपी (GDP) में इससे पिछली तिमाही की तुलना में 23 फीसदी वृद्धि दर्ज की गई है.

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नई दिल्ली. भारत की इकोनॉमी (Indian Economy) में V शेप यानी तेजी से सुधार देखने को मिल रहा है और जुलाई-सितंबर तिमाही में जीडीपी (GDP) में इससे पिछली तिमाही की तुलना में 23 फीसदी वृद्धि दर्ज की गई है. वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) की ओर से गुरुवार को जारी मासिक आर्थिक समीक्षा (Monthly Economic Review) में यह बात सामने आई है.

अप्रैल-जून की तिमाही में इकोनॉमी में 23.9 फीसदी की आई थी गिरावट
चालू वित्त वर्ष की दूसरी यानी जुलाई-सितंबर की तिमाही में जीडीपी में एक साल पहले की इसी तिमाही के मुकाबले गिरावट घटकर 7.5 प्रतिशत रह गई है. पहली अप्रैल-जून की तिमाही में भारतीय इकोनॉमी में 23.9 प्रतिशत की गिरावट आई थी. समीक्षा में कहा गया है कि दूसरी तिमाही में सालाना आधार पर 7.5 प्रतिशत की गिरावट आई है, लेकिन तिमाही-दर-तिमाही आधार पर इसमें 23 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

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इकोनॉमी की बुनियाद मजबूत


नवंबर की मासिक आर्थिक समीक्षा में कहा गया है, ''2020-21 के मध्य में वी-आकार की वृद्धि से भारतीय इकोनॉमी की जुझारू क्षमता का पता चलता है. इकोनॉमी की बुनियाद मजबूत है और लॉकडाउन को धीरे-धीरे हटाए जाने के बाद यह आगे बढ़ रही है. इसके अलावा आत्मनिर्भर भारत मिशन की वजह से भी अर्थव्यवस्था पुनरोद्धार की राह पर है.''

इकोनॉमी को सबसे अधिक कृषि क्षेत्र से समर्थन
रिपोर्ट में कहा गया है कि इकोनॉमी को सबसे अधिक कृषि क्षेत्र से समर्थन मिल रहा है. इसके बाद निर्माण और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र भी इकोनॉमी को समर्थन दे रहे हैं. संपर्क की दृष्टि से संवेदनशील सेवा क्षेत्र ने भी इसमें योगदान दिया है. हालांकि, उसका यह योगदान मुख्य रूप से लॉजिस्टिक्स और संचार के रूप में है.

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मासिक समीक्षा में कहा गया है कि अक्टूबर और नवंबर के महीनों में वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता की स्थिति थी. वैश्विक कुल पीएमआई और वस्तुओं के व्यापार में सुस्त वृद्धि दिख रही है. वहीं दुनियाभर में ऊर्जा और धातु की कीमतें अलग-अलग दिशा में बढ़ी हैं, जिससे अनिश्चितता भी और बढ़ी है. रिपोर्ट के अनुसार आधुनिक इकोनॉमी को सबसे अधिक कृषि क्षेत्र से समर्थन में मुद्रास्फीति नरम पड़ी है, जबकि उभरते बाजारों में यह बढ़ रही है. इससे पता चलता है कि इन देशों पर आपूर्ति पक्ष की अड़चनों का प्रभाव अधिक पड़ा है.
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