इंडियन इकोनॉमी के लिए खराब संकेत! वर्ल्‍ड बैंक ने भारत की आर्थिक वृद्धि दर घटाकर कर दी 8.3 फीसदी

World Bank ने अनुमान जताया है कि तमाम चुनौतियों के बाद भी भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था अच्‍छा प्रदर्शन करेगी.

World Bank ने अनुमान जताया है कि तमाम चुनौतियों के बाद भी भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था अच्‍छा प्रदर्शन करेगी.

वर्ल्‍ड बैंक (World Bank) ने ग्‍लोबल इकोनॉमिक प्रॉस्‍पेक्‍ट्स (Global Economic Prospects) की हालिया रिपोर्ट में कहा है कि कोरोना वायरस की दूसरी लहर के कारण भारत सरकार को अर्थव्‍यवस्‍था (Indian Economy) में सुधार लाना मुश्किल साबित हो रहा है. विश्‍व बैंक ने कहा कि धीरे-धीरे हालात सामान्‍य होने पर भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था शानदार प्रदर्शन करेगी.

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नई दिल्‍ली. कोरोना वायरस महामारी की तमाम चुनौतियों के बीच भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था (Indian Economy) को लेकर खराब संकेत मिल रहे हैं. अब वर्ल्‍ड बैंक (World Bank) का कहना है कि वित्‍त वर्ष 2021-22 में भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था 8.3 फीसदी की रफ्तार (Economic Growth) से बढ़ेगी. वहीं, वित्‍त वर्ष 2022-23 में आर्थिक वृद्धि की दर (Growth Rate) 7.5 फीसदी रहने का अनुमान जताया है. इससे पहले अप्रैल 2021 में विश्‍व बैंक ने इंडियन इकोनॉमी के वित्‍त वर्ष 2021-22 में 10.1 फीसदी की रफ्तार से बढ़ने का अनुमान जताया था यानी वर्ल्‍ड बैंक ने अपने पिछले अनुमान में अब 1.8 फीसदी की कटौती कर दी है. वर्ल्‍ड बैंक ने कहा है कि कोरोना वायरस की दूसरी लहर के कारण भारत सरकार को अर्थव्‍यवस्‍था में सुधार के लिए कदम उठाना मुश्किल हो रहा है. इसके बाद भी जैसे-जैसे हालात सामान्‍य होंगे, भारत अर्थव्‍यवस्‍था के मोर्चे पर अच्‍छा प्रदर्शन करेगा.

'सर्विस समेत सभी सेक्‍टर्स पर दूसरी लहर का पड़ा बुरा असर'

वर्ल्‍ड बैंक ने मंगलवार को जारी वैश्विक आर्थिक परिदृश्‍य रिपोर्ट में कहा है कि भारत में वित्‍त वर्ष 2020-21 की दूसरी छमाही के दौरान आर्थिक गतिविधियां पटरी पर लौटने लगी थीं. इसके बाद अचानक आई महामारी की दूसरी लहर ने सेवा क्षेत्र समेत सभी सेक्‍टर्स पर उम्‍मीद से ज्‍यादा बुरा असर डाला है. इस दौरान भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था पर दुनिया की किसी भी दूसरी अर्थव्‍यवस्‍था के मुकाबले ज्‍यादा बुरा असर पड़ा है. महामारी की शुरुआत के बाद से अर्थव्यवस्था में सुधार लाना भारत के लिए मुश्किल हो रहा है. विश्‍व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय अर्थव्यवस्था में साल 2019 में 4 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई थी.

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2023 में 6.5 फीसदी की दर से बढ़ेगी भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था

विश्‍व बैंक ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था में 2023 के दौरान 6.5 फीसदी की दर से बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है. वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक अर्थव्यवस्था में 2021 के दौरान 5.6 फीसदी तक विस्तार की उम्‍मीद है. वहीं, भारत की जीडीपी के वित्त वर्ष 2021-22 में 8.3 फीसदी की दर से बढ़ने का अनुमान जताया गया है. कोविड-19 के नए मामलों में बढ़ोतरी के कारण भारत के कई राज्यों में प्रतिबंध की वजह से आर्थिक गतिविधियां ठप हो गईं. वहीं, यातायात गतिविधियां भी कम हो गईं. इससे मार्च 2021 के बाद से विकास की रफ्तार एक तिहाई से ज्‍यादा धीमी हो गई है.

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इन उपायों से इंडियन इकोनॉमती को मिल सकता है फायदा

वर्ल्‍ड बैंक का कहना है कि वित्त वर्ष 2021 के बजट के जरिये महामारी के बाद अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए स्वास्थ्य देखभाल और बुनियादी ढांचे पर ज्‍यादा खर्च की नीति से लाभ मिलेगा. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ओर से सूक्ष्म, लघु व मझोले उद्योगों को आर्थिक मदद मुहैया कराना और नॉन परफॉर्मिंग लोंस के नियमों में ढील देने से कारोबारियों को राहत मिली है. हालांकि, ऐसे उपायों को बढ़ाने और नए सिरे से स्वास्थ्य व आर्थिक समस्याओं को सुलझाने के लिए नीतिगत समर्थन की जरूरत पड़ सकती है. इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर, ग्रामीण विकास और स्‍वास्‍थ्‍य खर्च पर बढ़ोतरी से अर्थव्‍यवस्‍था को फायदा मिलेगा. रिपोर्ट में कहा गया है कि अनुमान में 2.9 फीसदी अंकों का बदलाव किया गया है. यह कोविड-19 की दूसरी लहर और मार्च 2021 के बाद से स्थानीय प्रतिबंधों से हुए आर्थिक नुकसान को दिखाता है.

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