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Cairn Tax Case: सरकार ने भारतीय संपत्तियों को जब्त करने के आदेश की पुष्टि की, जानें क्या है मामला?

केयर्न एनर्जी (Cairn Energy)

केयर्न एनर्जी (Cairn Energy)

ब्रिटेन की केयर्न एनर्जी (Cairn Energy) की याचिका पर पेरिस में कुछ भारतीय परिसंपत्तियों को ‘फ्रीज’ करने के आदेश की पुष्टि की है.

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    नई दिल्ली: सरकार ने एक फ्रांसीसी अदालत द्वारा ब्रिटेन की केयर्न एनर्जी (Cairn Energy) की याचिका पर पेरिस में कुछ भारतीय परिसंपत्तियों को ‘फ्रीज’ करने के आदेश की पुष्टि की है. पिछली तारीख से कर मामले में एक मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने केयर्न के पक्ष में फैसला दिया था. इस फैसले के बाद केयर्न एनर्जी भारत सरकार (Indian Government) से 1.72 अरब डॉलर की वसूली का प्रयास कर रही है.

    वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी (Minister of State for Finance) ने मंगलवार को राज्यसभा में एक लिखित जवाब में कहा कि सरकार ने अंतरराष्ट्रीय पंचाट द्वारा केयर्न एनर्जी पर पिछली तारीख से 10,247 करोड़ रुपये के कर के आदेश को रद्द करने के फैसले को चुनौती दी है. उन्होंने कहा, ''फ्रांस की एक अदालत ने केयर्न एनर्जी से संबंधित मामले में भारत की कुछ परिसंपत्तियों को जब्त करने का आदेश दिया है." हालांकि, मंत्री ने इन संपत्तियों की पहचान नहीं बताई.

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    पीटीआई ने इससे पहले इसी महीने खबर दी थी कि इन 20 संपत्तियों में से ज्यादातर फ्लैट हैं. इनका मूल्य दो करोड़ यूरो से अधिक है. एक तीन सदस्यीय अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण ने पिछले साल दिसंबर में एकमत से इस मामले में केयर्न के पक्ष में फैसला दिया था और पिछली तारीख से कर के आदेश को रद्द कर दिया था. न्यायाधिकरण में भारत की ओर नियुक्त न्यायाधीश भी शामिल थे.

    आपको बताते हैं क्या था पूरा मामला?
    बता दें केयर्न एक ब्रिटेन की कंपनी है और साल 2007 में कंपनी को लिस्ट कराने के लिए आईपीओ की पेशकश की थी. वहीं, उससे एक साल पहले कंपनी ने भारत में अपनी कई इकाइयों का विलय किया था, लेकिन इस विलय के बाद भी इनके मालिकाना हक में कोई बदलाव नहीं हुआ. सात साल बाद भारत में टैक्स डिपार्टेमेंट ने उस पर कैपिटल गेंस टैक्स का नोटिस भेजा तो उसने 2014 में केयर्न से कहा कि आईपीओ से पहले उसने अपनी कई इकाइयों को केयर्न इंडिया में मिलाया था. इससे उसे कैपिटल गेंस हुआ था इसलिए उसे टैक्स चुकाना होगा. केयर्न इसके खिलाफ अदालत चली गई.

    इंडिया के टैक्स डिपार्टमेंट ने कंपनी के करीब 10 फीसदी से ज्यादा शेयरों को अपने कब्जे में ले लिया. इस मामले की सुनावई के बाद नीदरलैंड्स में हेग के आर्बिट्रेशन कोर्ट ने भारत सरकार के खिलाफ फैसला सुनाया. उसने ब्याज सहित यह रकम केयर्न को चुकाने का निर्देश दिया.

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