लाइव टीवी

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने नरेंद्र मोदी के बयान की निंदा की, कहा- माफी मांगे PM

News18Hindi
Updated: January 16, 2020, 1:52 PM IST
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने नरेंद्र मोदी के बयान की निंदा की, कहा- माफी मांगे PM
PM मोदी के लड़कियां स्पालई वाले बयान पर IMA ने जताई आपत्ति

मंगलवार को आईएमए ने विज्ञप्ति जारी कहा कि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बयान में कहा है कि टॉप दवा कंपनियां रिश्वत के तौर की डॉक्टरों को लड़कियां उपलब्ध कराईं हैं. अगर यह बयान प्रधानमंत्री की तरफ से आया है, तो आईएमए इसकी कड़ी निंदा करता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 16, 2020, 1:52 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक बयान की निंदा की है. मंगलवार को आईएमए ने विज्ञप्ति जारी कहा कि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बयान में कहा है कि टॉप दवा कंपनियां रिश्वत के तौर की डॉक्टरों को लड़कियां उपलब्ध कराईं हैं. अगर यह बयान प्रधानमंत्री की तरफ से आया है, तो आईएमए इसकी कड़ी निंदा करता है. आईएमए यह मांग करता है कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) यह बताए कि क्या सच में ऐसी कोई बैठक हुई या प्रधानमंत्री ने ऐसा बयान दिया. आईएमए का कहना है कि अब तक पीएमओ ने इस खबर का खंडन भी नहीं किया है.

क्यों नहीं दर्ज कराया गया आपराधिक मामला
आईएमए ने यह जानने की मांग की है कि अगर सरकार के पास उन कंपनियों की जानकारी थी जो डॉक्टरों को लड़कियां सप्लाई कराती हैं तो उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय में बैठक में बुलाने के बजाय आपराधिक मामला दर्ज क्यों नहीं कराया गया.

आईएमए का कहना है कि उसे उम्मीद है सरकार इन आरोपों को साबित कर पाएगी. लेकिन अगर प्रधानमंत्री की ओर से आया ये बयान बिना किसी सत्यता को परखे दिया गया है तो उन्हें तत्काल माफ़ी मांगनी चाहिए. ये भी पढ़ें: SBI ग्राहकों के लिए बड़ी खबर! 16 मार्च से बदल जाएंगे ATM से पैसे निकालने के नियम



गंभीर मसलों से ध्यान भटकाने की कोशिश
आईएमए का कहना है कि इस तरह के बयान देकर गंभीर मसलों से ध्यान हटाने की कोशिश की जा रही है. इनमें लोगों के इलाज और मेडिकल की पढ़ाई जैसे अहम मुद्दे शामिल हैं. डॉक्टरों की इस संस्था ने कहा कि स्वास्थ्य को लेकर वर्तमान सरकार की सबसे अहम योजना 'आयुष्मान भारत' असरदार नहीं पाई गई है और इसका ज्यादातर इस्तेमाल सरकारी अस्पतालों में होता है, जहां इलाज पहले ही मुफ्त है. योजना के तहत अस्पताल को मिलने वाली रकम का 15% हिस्सा बीमा कंपनियां हड़प लेती हैं. 

ये भी पढ़ें: घर खरीदारों को LIC का तोहफा! 6 महीने नहीं देनी होगी घर की EMI, ऐसे उठाए फायदा

डॉक्टरों पर हमले बढ़े
स्वास्थ्य बजट जीडीपी का महज 1% से 1.3% है. पिछले कुछ वर्ष में स्वास्थ्य के क्षेत्र में बुनियादी ढांचे या मानव संसाधन को बेहतर बनाने के लिए कोई नया निवेश नहीं हुआ है. डॉक्टरों पर हमले और अस्पतालों में हिंसा के मामलों में बढ़ोतरी हुई है. एंबुलेंस तक सुरक्षित नहीं हैं. सरकार ने सुरक्षा देने में असमर्थ रही है. केंद्रीय कानून को भी लागू नहीं किया, जिसका वादा उन्होंने किया था. आईएमए यह मानता है कि इस तरह की रणनीति के जरिए स्वास्थ्य क्षेत्र में वास्तविक मुद्दों से लोगों का ध्यान हटाने की कोशिश की जा रही है.

ये भी पढ़ें: कल से चलेगी Tejas Express, मिलेंगी खास सुविधाएं, दूसरी ट्रेनों से अलग हैं टिकट बुकिंग और रिफंड के नियम

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए मनी से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: January 16, 2020, 1:29 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर