तेल-गैस पाइपलाइन नहीं बल्कि हाइड्रोजन बिजनेस में हिस्सेदारी बेचना चाहती है Indian Oil: रिपोर्ट

इंडियन ऑयल

इंडियन ऑयल

सरकारी क्षेत्र की ​तेल रिफाइनिंग कंपनी इंडियन ऑयल (Indian Oil) अपने हाइड्रोजन फैसिलिटी के जरिए 10 हजार करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है. सरकार की योजना के मुताबिक यह कंपनी अपने पाइपलाइन्स बिजनेस में हिस्सेदारी बेचने की रुचि नहीं दिखा रही है. इंडियन ऑयल हाइड्रोजन का सबसे ज्यादा उत्पादन करती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 4, 2021, 11:26 AM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. इंडियन ऑयल अब अपने हाइड्रोजन प्रोड्यूसिंग फैसिलिटी के जरिए 10,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है. इस बारे में जानकारी रखने वाले कुछ लोगों ने यह बताया है. देश की यह सबसे बड़ी ऑयल रिफाइनिंग कंपनी सबसे ज्यादा हाइड्रोजन का भी उत्पादन करती है. लेकिन, अब यह कंपनी अपने हाइड्रोजन प्रोड्यूसिंग यूनिट्स और सल्फर रिकवरी फैसिलिटी को अपने रिफाइनरीज से अलग करना चाहती है. इनकी एक अलग ईकाई बनाई जाएगी. नई ईकाई की कुछ हिस्सेदारी को एक या इससे अधिक प्राइवेट कंपनियों को बेचा जाएगा.

कंपनी ने इसके लिए केंद्र सरकार को एक प्रस्ताव भेजा है. सरकार इसपर विचार भी कर रही है. दरअसल, केंद्र सरकार इंडियन ऑयल, गेल और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के ऑयल व गैस पाइपलाइन में हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में थी, जिसके बाद हाइड्रोजेन बनाने वाली फैसिलिटी को मोनेटाइज करने पर विचार किया जा रहा है. इंडियन ऑयल अपने पाइपाइन्स में हिस्सेदारी बेचने में दिलचस्पी नहीं दिखा रही है. यही कारण है कि वो हाइड्रोजेन फैसिलिटी के जरिए फंड जुटाने पर विचार कर रहा है.

पाइपलाइन्स बिजनेस से 17 हजार करोड़ जुटाने की योजना
केंद्र सरकार इंडियन ऑयल, गेल और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के पाइपलाइन्स में हिस्सेदारी बेचकर 17,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है. सरकार चाहती है कि अगले वित्त वर्ष तक इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट के जरिए इन तीनों कंपनियों से फंंड जुटाया जाए. इसमें से 8,000 करोड़ रुपये इंडियन आॅयल के पाइपलाइन्स से जुटाने की योजना है. बाकी के रकम गेल और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के जरिए जुटाये जाएंगे.
यह भी पढ़ें: I-T Refund: आयकर विभाग ने 11 महीने में 1.95 करोड़ टैक्सपेयर्स को भेज दिए 1.98 लाख करोड़



इंडियन ऑयल के अधिकारियों का मानना है कि हाइड्रोजन उत्पादन फैसिलिटी को मोनेटाइज करन 10,000 से 12,000 करोड़ रुपये जुटाए जा सकते हैं. हालांकि, इसके लिए प्राइवेट कंपनियों को अच्छी खासी हिस्सेदारी बेचनी होगी.

हिस्सेदारी बेचने के बाद ऐसे रेवेन्यू जेनरेट करने की योजना
इंडियन ऑयल इस हिस्सेदारी की बिक्री के बाद भी हाइड्रोजन सोर्स करना जारी रखेगा ताकि वो थर्ड पार्टी को यह गैस बेच सके. वहीं, पाइपलाइन के जरिए नज़दीकी इंडस्ट्रियल क्लस्टर तक हाइड्रोजन ट्रांसफर करना भी इंडियन ऑयल के जरिए रेवेन्यू जेनरेट होता रहेगा. उर्वरक और अन्य इंडस्ट्रियल कामों के लिए हाइड्रोजन का इस्तेमाल किया जाता है.

कैसे हाइड्रोजन उत्पादन करती है इंडियन ऑयल
आमतौर पर रिफाइनरिंग के पास सुविधा होती है कि वे बड़ी मात्रा में हाइड्रोजन का उत्पादन करें. वे इसका उपयोग इंटरमीडिएट ऑयल प्रोडक्ट्स के लिए करती हैं. साथ ही उत्सर्जन मानक को पूरा करने के लिए रिफाइन किए जा चुके ईंधन से ​हाइड्रोजन के जरिए ही सल्फर निकाला जाता है. इंडियन ऑयल प्राकृतिक गैस और नैफ्था की मदद से हाइड्रोजन तैयार करता है. इंडियन ऑयल के पास हर साल 7,20,000 मिलियन टन हाइड्रोजन उत्पादन करने की क्षमता है.

यह भी पढ़ें: COVID 19 के बाद घर खरीदने के मामले में पुरुषों से आगे निकलीं महिलाएं, उठाना चाहती हैं ये लाभ, पढ़ें पूरी खबर

केंद्र सरकार ने एक नेशनल हाइड्रोजन मिशन का ऐलान किया है. इंडियन ऑयल भी अब ग्रीन हाइड्रोजन की दिशा में आगे बढ़ने की तैयारी कर रहा है. यह कंपनी भविष्य में रिटेल हाइड्रोजन नेटवर्क तैयार करने पर भी काम कर रही है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज