होम /न्यूज /व्यवसाय /

Rakshabandhan Special : चीन को बड़ा झटका! इस साल कलाई पर दिख रही सिर्फ भारतीय राखी, आज कितना रहा कारोबार

Rakshabandhan Special : चीन को बड़ा झटका! इस साल कलाई पर दिख रही सिर्फ भारतीय राखी, आज कितना रहा कारोबार

राखी की बिक्री कोरोना पूर्व स्‍तर से भी ज्‍यादा रही है.

राखी की बिक्री कोरोना पूर्व स्‍तर से भी ज्‍यादा रही है.

रक्षाबंधन का त्‍योहार आज देश के ज्‍यादातर हिस्‍सों में धूमधाम से मनाया जा रहा है. इस साल भारतीय ग्राहकों ने चीनी राखियों का एक तरह से बहिष्‍कार कर दिया. कैट का कहना है कि इस साल करीब 7 हजार करोड़ रुपये का कारोबार हुआ जिसमें चीनी राखियों की हिस्‍सेदारी न के बराबर रही है.

अधिक पढ़ें ...

हाइलाइट्स

साल पूरे देश में लगभग 7 हजार करोड़ रुपये का राखी का व्यापार हुआ.
बीते साल करीब 3,500 करोड़ का कारोबार रक्षाबंधन पर हुआ था.
इस साल कच्‍चे माल की लागत में 30 से 35 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.

नई दिल्‍ली. इस साल रक्षाबंधन के त्‍योहार पर चीन को बड़ा झटका लगा है. बहनों ने अपने भाई की कलाई पर सिर्फ भारतीय राखी बांधकर चीन के कारोबार को तगड़ी चोट पहुंचाई है. कंफेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने बताया कि इस साल चीन से आई राखियों की बिलकुल डिमांड नहीं रही.

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया और राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने बताया कि इस साल पूरे देश में लगभग 7 हजार करोड़ रुपये का राखी का व्यापार हुआ. वह समय चला गया है जब भारतीय लोग चीनी राखी के डिजाइन और लागत कम होने के कारण उसे खरीदने के लिए उत्सुक रहते थे. अब लोगों की मानसिकता में परिवर्तन आ रहा और वे भारतीय उत्‍पादों की खरीद ज्‍यादा करते हैं.

ये भी पढ़ें – 31 जुलाई के बाद भरा है ITR तो ई-वेरिफिकेशन को मिलेंगे बस 30 दिन, जल्‍द करें यह काम, ऑनलाइन ऐसे करें वेरिफाई

रंग लाया वैदिक राखी का अभियान
कैट के अनुसार, इस साल पूरे देश में व्यापारी संगठनों ने वैदिक रक्षा राखी की तैयारियों पर अधिक जोर दिया. वैदिक राखी का अभियान रंग लाया और घरेलू उत्‍पादकों को इसका लाभ मिला. वैदिक राखी बनाने के लिए दूब घास, अक्षत यानी चावल, केसर, चंदन और सरसों के दाने को रेशम के कपड़े में सिलकर कलावा से पिरोया जाता है. इन पांच चीजों का विशेष वैदिक महत्व है जो परिवार की रक्षा और उपचार से संबंधित है.

पिछले साल से दोगुना कारोबार
कोरोना के बाद देश में रक्षाबंधन पर व्‍यापार में बड़ी गिरावट आई थी, लेकिन इस साल बाजारों की रौनक ने उस कमी की भरपाई कर दी है. कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि बीते साल करीब 3,500 करोड़ रुपये का कारोबार रक्षाबंधन के त्‍योहार पर हुआ था, जो इस साल दोगुना बढ़कर करीब 7 हजार करोड़ रुपये पहुंच गया है.

लागत बढ़ने से घट गया मुनाफा
कारोबारियों का कहना है कि इस साल कच्‍चे माल की लागत में 30 से 35 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, लेकिन ग्राहकों पर कम बोझ डालने के लिए राखी की कीमतों में सिर्फ 25 फीसदी वृद्धि की गई. इससे हमारा मार्जिन कम हो गया है. प्रिंटिंग पैकेजिंग बॉक्‍स, मोती, धागे जैसे कच्‍चे माल की कीमतों में इस साल बड़ी बढ़ोतरी हुई, लेकिन ग्राहकों पर इसका ज्‍यादा असर नहीं डाला गया.

चीन से आता है ज्‍यादातर कच्‍चा माल
इस साल भारतीय ग्राहकों ने भले ही चीनी राखी का बहिष्‍कार कर दिया हो लेकिन यहां बनने वाली राखियों के ज्‍यादातर कच्‍चे माल चीन से ही आते हैं. इसमें फैंसी पार्ट, धागे, पन्‍नी, फोम, सजावटी सामान, स्‍टोन, मोती जैसी चीजें शामिल हैं. एक अनुमान के मुताबिक हर साल राखी बनाने के लिए चीन से करीब 1,400 करोड़ रुपये का सामान आयात किया जाता है.

Tags: Business news, Business news in hindi, Market, Rakshabandhan festival

विज्ञापन

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें

अगली ख़बर