ट्रेन में ट्रैवल करते वक्त नहीं होगी कोरोना संक्रमण की चिंता, बड़ी तैयारी में जुटी रेलवे और IRCTC

ट्रेन में ट्रैवल करते वक्त नहीं होगी कोरोना संक्रमण की चिंता, बड़ी तैयारी में जुटी रेलवे और IRCTC
कोरोना काल के बाद ट्रेन में ट्रैवल करने का अनुभव बदल जाएगा.

इंडियन रेलवे (Indian Railways) कोरोना वायरस संक्रमण से यात्रियों को बचाने के ट्रेन कोच में कई नये फीचर्स जोड़ने जा रहा है. इसमें यात्रियों की सुविधा का पूरा ख्याल रखते हुए कई विशेषतौर पर तैयार किया जा रहा है. कपूरथला रेल कोच फैक्ट्री में पोस्ट-कोविड कोच (Post-Covid Coach) तैयार किए जा रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 7, 2020, 9:20 PM IST
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नई दिल्ली. कोरोना काल के बाद ट्रेन में सफर करने का आपका अनुभव कई मायनों में बदल जाएगा. इंडियन रेलवे की केटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन लिमिटेड (IRCTC) अब 'नये नॉर्मल' के लिए तैयार हो चुकी है. लॉकडाउन के बाद स्पेशल श्रमिक ट्रेनों (Special Shramik Trains) में भी खाना सर्व करने के लिए IRCTC इंडियन रेलवे की मदद कर रही है. हाल ही में कंपनी ने 200 स्पेशल पैसेंजर ट्रेनों के लिए रेडी-टू-ईट मील्स (Ready-To-Eat Meals) लेकर आई थी. इस दौरान IRCTC ने कोविड-19 गाइडलाइंस का पालन करने के लिए अपने 1,500 कर्मचारियों को ट्रेनिंग दी है.

इन कर्मचारियों को रेगुलर सेनिटाइजेशन से लेकर तापमान चेक करने और सोशल डिस्टेंसिंग नियमों के पालन करने के लिए ट्रेन किया गया है. सु​रक्षित ट्रैवल अनुभव देने के लिए कंपनी कई तरह के कदम उठा रही है.

तैयार हो रहे पोस्ट कोविड कोच
इंडियन रेलवे ने ट्रैवलर्स के लिए विशेषतौर पर 'पोस्ट-कोविड कोच' (Post-COVID Coach) तैयार किया है. ट्रेन के इन डिब्बों में कई तरह की हैंड्स फ्री सुविधाओं के साथ प्लाज़्मा एयर प्युरिफिकेशन सिस्टम (Plasma Air Purification System) लगाया जा रहा है. रेलवे ने कोरोना वायरस संक्रमण से बचने के लिए इस तरह के कोच को तैयार किया है. इन डिब्बों को कपूरथला रेल कोच फैक्ट्री (Kapurthala Rail Coach Factory) में तैयार किया जा रहा है. पोस्ट-कोविड कोच में कई तरह के विशेष फीचर्स को लाया जा रहा है.
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हाथ के इस्तेमाल किए बिना ही हो जाएंगे कई काम
इनमें कई ऐसे फीचर्स होंगे जिनमें किसी सुविधा के ​लिए हाथ का इस्तेमाल नहीं करना होगा. मसलन, पानी की टैप या साबुन डिस्पेंसर को पैर से ही ऑपरेट किया जा सकेगा. फ्लश वॉल्व और लैवेटरी दरवाजों को पैर से ही ऑपरेट किया जा सके. वॉश बेसिन में भी कुछ ऐसे ही सिस्टम्स लगे होंगे. दरवाजों को बांह की कलाई से भी खोलने या बंद करने की सुविधा दी जाएगी.

कॉपर कोटिंग
चूंकि, कॉपर में एटी-बैक्टेरियल प्रॉपर्टीज होती है. इसलिए अब रेलवे ने फैसला किया है कि हैंडरेल्स और लैचेज को कॉपर से कोट किया जाएगा. इंडियन रेलवे ने एक बयान में कहा, 'जब कॉपर की किसी सतह पर वायरस लैंड करता है तो आयन पैथोजेन को ब्लास्ट कर देते हैं और इससे वायरस के अंदर के DNA और RNA खत्म हो जाते हैंं.'

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इन नये कोच के एसी डक्ट में प्लाज़्मा एयर इक्विपमेंट लगे होंगे. इससे कोच के हवा को आयनाइज्ड एयर की मदद से स्टेरेलाइज करने में मदद मिलेगी. इसस व्यवस्था से थे आयन कंस्ट्रेशन को 100 ions/cm3 से बढ़कर 6000 ions/cm3 हो जाएगा.

इन नये कोच के अंदर टाइटेनियम डाई-ऑक्साइड Titanium Di-oxide की कोटिंग की जाएगी. नैनो स्ट्रक्चर्ड टाइटेनियम डाई-ऑक्साइड फोटो एक्टिव मैटेरियल की तरह काम करता है. पानी के बेस वाला यह कोटिंग वायरस, बैक्टिरिया, मोल्ड और किसी भी तरह के फंगल ग्रोथ को खत्म कर देता है.

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इन सर्फेस पर होगी TiO2 की कोटिंग
यह एक नॉन-टॉक्सिक मैटेरियल है जिसे यूनाइटेड स्टेट्स फूड एंड फूड टेस्टिंग एडमिनि​स्ट्रेशन (USFDA) द्वारा मंजूरी मिल चुकी है. TiO2 को इंसानों के लिए सुरक्षिक पदार्थ माना जाता है और इससे कोई नुकसान नहीं होता है. इसे वॉशबेसिन, लैवेटरी, सीट्स व बर्थ्स, स्नैक टेबल, ग्लास विंडो, फ्लोर पर कोट किया जाएगा. यह कोटिंग 12 महीनों तक किसी सर्फेस पर रहता है.ch
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