एक्सक्लूसिवः जानिए आखिर पुराने इंजन और ट्रेन के डिब्बाें काे कितने में बेचता है रेलवे

पैसेंजर ट्रेन की 11396 बाेगियां हुई स्क्रैप

पैसेंजर ट्रेन की 11396 बाेगियां हुई स्क्रैप

रेलवे मंत्रालय (Ministry of Railway) की एक रिपाेर्ट के अनुसार पिछले चार सालाें में लाेह धातु से 67 लाख 24 हजार 569 मीट्रिक टन स्क्रैप निकला.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 11, 2021, 4:39 PM IST
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नई दिल्ली. कभी आपने साेचा है कि जब ट्रेन के डिब्बे (Train Coaches), इंजन (Engine) या मालगाड़ी के डिब्बे खराब हाे जाती है ताे रेलवे (Railways) उसका क्या करता हाेगा. भारतीय रेलवे (Indian Railway) किसी काम के नहीं बचे ऐसी ट्रेन, इंजन और मालगाड़ियाें काे स्क्रैप (Scrap) के ताैर पर बेच देता हैआपकाे यह जानकार भी हैरानी हाेगी कि पिछले चार सालाें में भारतीय रेलवे काे यह स्क्रैप बेचकर 15,906.46 कराेड़ का राजस्व (Revenue) मिला है. चार सालाें में इसमें लाेहे के साथ दूसरी चीजें भी स्क्रैप की जाती है जिसमें ट्रेनाें की सीट्स, एसी, लाइट हाेल्डर्स आदि शामिल रहते हैं. रेलवे इन्हें दाे कैटेगरी में रखती है एक ताे लाेह धातु जिसमें लाेहे से बनी चीजें रहती है ताे दूसरी अलाैह धातु जिसमें सीटलाइट हाेल्डर्स अन्य चीजें आती है. रेलवे मंत्रालय की एक रिपाेर्ट के अनुसार पिछले चार सालाें में लाेह धातु से 67 लाख 24 हजार 569 मीट्रिक टन स्क्रैप निकला ताे वहीं अलाेह धातु से 1लाख 33 हजार 694 मीट्रिक टन जिन्हें बेचकर ही रेलवे काे 15,906.46 कराेड़ का राजस्व मिला है



नकारा मालगाड़ियाें के 20495 डिब्बे



रिपाेर्ट के अनुसार भारतीय रेलवे काे पिछले चार सालाें में नकारा मालगाड़ियाें के डिब्बे यानि जाे काम के नहीं बचे या ढुलाई करने याेग्य नहीं रह गए थे कि संख्या वर्ष 2017-18 में 6032 , वर्ष 2018-19 में 6298,  2019-20 में 4597 और  2020-21(18 मार्च 2021 तक ) 3532 थी. यदि इन्हें जाेड़ लिया जाए ताे यह संख्या 20495 डिब्बे मालगाड़ियाें के स्क्रैप किए गए.  



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पैसेंजर ट्रेन के 11396 बाेगियां हुई स्क्रैप



वही बात यदि पैसेंजर ट्रेन या कहे सवारी ट्रेनाें के डिब्बाें या कहे बाेगियाें की ताे चार साल में इनकी कुल संख्या 11396 थी जाे दाेबारा काम में लाने के हिसाब से नहीं बचे थे जिसके चलते रेलवे ने इन्हें भी स्क्रैप में बेचा. इनमें वर्ष 2017-18 में सवारी ट्रेनाें के  3295 डिब्बाें काे स्क्रैप किया गया ताे वर्ष 2018-19 में 4007 डिब्बाें काे. वर्ष  2019-20 में 2398 ताे  2020-21(18 मार्च 2021 तक ) 1726 डिब्बे स्क्रैप हुए





1530 इंजन भी चार साल में बाहर 



सवारी और मालगाड़ियाें काे ढाेने का काम करने वाले 1530 इंजनाें काे भी भारतीय रेलवे ने पिछले चार सालाें में स्क्रैप किया है.  वर्ष 2017-18 में जहां ऐसे इंजनाें की संख्या 633 थी ताे वर्ष 2018-19 में 320 इसके अगले साल यानि 2019-20 में 164 और  2020-21(18 मार्च 2021 तक ) 413 थी. इनमें इंजनाें में पैसेंजर ट्रेन सहित मेंटेनेंस में इस्तेमाल किए जाने वाले और मालगाड़ियाें में इस्तेमाल हाेने वाले इंजन सभी शामिल है. 



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साल दर साल स्क्रैप और उससे हाेने वाली आय



चार सालाें में अब यदि बात हर साल इन स्कैप काे बेचकर रेलवे काे हाेने वाले राजस्व की बात की जाए ताे वह इस तरह से रही. वर्ष 2017-18 में लौह (1037319)और अलाेह (31774) मिलाकर कुल 10 लाख 69 हजार 93 मीट्रिक टन स्क्रैप निकला जिससे 3152.41 कराेड़ का राजस्व मिला ताे अगले साल यानी वर्ष 2018-19 में  लाेह (1250742)और अलाेह (28605) से कुल 12,79,347 मीट्रिक टन जिन्हें बेचकर 4196.72 कराेड़ रुपये मिले. वर्ष  2019-20 में लाेह (2437353)और अलाेह (34505) से कुल 2471861 मीट्रिक टन स्क्रैप निकाला और 4339.52 कराेड़ कमाए ताे वहीं पिछले साल यानि 2020-21(18 मार्च 2021 तक) लौह (1999173और अलौह (38810) से 20 लाख 37 हजार 983 मीट्रिक टन स्क्रैप निकला जिससे भारतीय रेलवे काे 4217.8 कराेड़ रुपये की आमदनी हुई.


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