श्रमिक ट्रेनों के किराये से रेलवे को 360 करोड़ रुपये की कमाई, प्रति व्यक्ति इतना है किराया

श्रमिक ट्रेनों के किराये से रेलवे को 360 करोड़ रुपये की कमाई, प्रति व्यक्ति इतना है किराया
ट्रेन‍िंग की प्रक्र‍िया, कोव‍िड-19 के बाद शुरू होगी.

रेलवे ने सोमवार को जानकारी दी कि श्रमिक स्पेशल ट्रेन (Shramik Special Train) में प्रति व्यक्ति औसत किराया 600 रुपये रहा है. रेलवे को इससे 360 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है. राज्यों के साथ समन्वय कर अभी भी श्रमिक ट्रेनों का परिचालन किया जाएगा.

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नई दिल्ली. भारतीय रेल (Indian Railway) ने सोमवार को कहा कि श्रमिक स्पेशल ट्रेन (Shramik Special Train) में प्रति व्यक्ति औसत किराया 600 रुपये वसूला गया. एक मई से चलाई जा रही इन ट्रेन से करीब 60 लाख श्रमिकों को उनके गंतव्य तक पहुंचाया गया. इससे करीब 360 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ.

रेलवे बोर्ड के चेयरमैन वी के यादव ने कहा कि भारतीय रेल ने प्रवासी मजदूरों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए अब तक 4,450 श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलायीं.

अब तक 60 लाख श्रमिक घर पहुंचे
यादव ने कहा, ‘‘ श्रमिक स्पेशल ट्रेन के लिए औसत किराया 600 रुपये प्रति यात्री रहा. यह मेल, एक्सप्रेस ट्रेन का सामान्य किराया है ना कि स्पेशल ट्रेन के लिए वसूला जाने वाला ऊंचा किराया. इन ट्रेनों के माध्यम से हमने करीब 60 लाख लोगों को उनके गंतव्य तक पहुंचाया. इनके परिचालन पर आयी लागत का करीब 15 प्रतिशत ही वसूल किया गया. जबकि 85 प्रतिशत राशि का वहन केंद्र सरकार द्वारा किया गया.’’ अधिकारी ने कहा कि एक प्रवासी श्रमिक ट्रेन की परिचालन लागत करीब 75 से 80 लाख रुपये है.
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यादव ने कहा कि अधिकतर प्रवासी मजदूर अपने गंतव्य तक पहुंच चुके हैं. बहुत कम ऐसे मजदूर बचे हैं जो अब वापस अपने घरों को जाना चाहते हैं.

अभी भी होगा श्रमिक ट्रेनों का संचालन
उन्होंने कहा कि बचे हुए प्रवासी मजदूरों के लिए भी हम राज्य सरकारों के साथ समन्वय कर रहे हैं. हमने उनसे तीन जून तक उनकी जरूरत के हिसाब से ट्रेनों की मांग बताने के लिए कहा था. अब तक हमें 171 श्रमिक स्पेशल ट्रेन उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है.

यादव ने कहा, ‘‘14 जून तक हमने 222 श्रमिक स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया. उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद हमने राज्य सरकारों से फिर से उनकी अतिरिक्त ट्रेनों की मांग बताने को कहा है. जब तक राज्यों की ओर से मांग की जाती रहेगी हम ट्रेन का संचालन करते रहेंगे.’’ रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ने दोहराया कि इन ट्रेनों का संचालन 85-15 प्रतिशत की केंद्र-राज्य भागीदारी पर किया गया.

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